कोर्ट ने कहा कि पहली नजर में मामले में आपसी सद्भाव बिगाडने का अपराध होना प्रतीत होता है। यह गैर जमानतीय अपराध है और इसमें अपराध सिद्ध होने पर तीन वर्ष …और पढ़ें

HighLights
- कोर्ट ने कहा- पहली नजर में आपसी सद्भाव बिगाड़ने का अपराध होना प्रतीत होता है
- कांग्रेस पार्षद फौजिया अलीम की मुश्किलें बढ़ीं, फिलहाल नहीं हो सकेगी गिरफ्तारी
- यह गैर जमानतीय अपराध है और इसमें अपराध सिद्ध होने पर तीन वर्ष तक कारावास का प्रविधान है
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। वंदे मातरम का अपमान करने के मामले में कांग्रेस पार्षद फौजिया अलीम की मुश्किलें बढ़ गई है। जिला कोर्ट ने उन्हें इस मामले में अग्रिम जमानत देने से इंकार कर दिया।
कोर्ट ने कहा कि पहली नजर में मामले में आपसी सद्भाव बिगाडने का अपराध होना प्रतीत होता है। यह गैर जमानतीय अपराध है और इसमें अपराध सिद्ध होने पर तीन वर्ष तक कारावास का प्रविधान है। हालांकि जमानत निरस्त होने के बावजूद फिलहाल फौजिया अलीम की गिरफ्तारी नहीं हो सकेगी।
लोक अभियोजक अभिजीत सिंह राठौर ने बताया कि 8 अप्रैल को हुए नगर निगम सम्मेलन में कांग्रेस पार्षद फौजिया अलीम ने कहा था कि वे वंदे मातरम नहीं गाएंगी। पार्षद रुबिना खान ने भी उनका समर्थन किया था। मामले में अलीम और खान के विरुद्ध एमजी रोड पुलिस ने आपसी सौहार्द खराब करने और समूहों के बीच शत्रुता फैलाने की धारा में केस दर्ज किया है।
कभी वंदे मातरम गाने से इंकार नहीं किया
अलीम ने इसी मामले में अग्रिम जमानत आवेदन प्रस्तुत किया था। इसमें उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी वंदे मातरम गाने से इंकार नहीं किया है। वे 20 साल से पार्षद हैं और 5 साल तक नेता प्रतिपक्ष रही हैं। 25 सालों के अपने सार्वजनिक जीवन में उन्होंने वंदे मातरम का सम्मान किया है। उन्होंने कभी भी धार्मिक और सामुदायिक शत्रुता बढ़ाने का काम नहीं किया है।
राजनीतिक कारणों से झूठे केस में फंसाया जा रहा है
पुलिस की जांच में भी उन्होंने पूरा सहयोग किया है। उन्हें केवल राजनीतिक कारणों से झूठे केस में फंसाया जा रहा है। उन्होंने खुद को एलएलबी अंतिम वर्ष की छात्रा बताते हुए कहा कि परीक्षा 10 जून से शुरु हो रही हैं। उन्हें जेल भेजा गया तो उनकी परीक्षा और भविष्य प्रभावित हो जाएगा।
इधर राठौर ने तर्क रखे कि फौजिया अलीम पार्षद पद का दुरुपयोग करते हुए गवाहों को डराते हुए साक्ष्यों को प्रभावित कर सकती हैं। कोर्ट ने सभी तथ्यों को देखने के बाद फौजिया अलीम का जमानत आवेदन को निरस्त कर दिया। हालांकि कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा सात वर्ष से कम की सजा वाले अपराध को लेकर अर्नेश कुमार विरुद्ध बिहार राज्य मामले में जारी गाइड लाइन का अक्षरक्ष: पालन करने के लिए कहा है। इसमें कहा है कि सात वर्ष से कम सजा वाले अपराध में पहले तो गिरफ्तार न किया जाए। गिरफ्तारी आवश्यक हो तो इसके कारण लिखित रूप में बताए जाएं।
इंदौर नगर निगम में वंदे मातरम के अपमान पर कांग्रेस पार्षद रुबिना और फौजिया पर FIR
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