इन दिनों पंजाब में बिजली संकट बना हुआ है। राज्य की आम आदमी सरकार इसके लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदारी ठहरा रही है। राज्य सरकार के मंत्री तरुणप्रीत सिंह सोंड ने कहा कि राज्य में 17,000 मेगावाट की मांग के मुकाबले 14,000 मेगावाट बिजली उपलब्ध है। करीब 3,000 मेगावाट की कमी है। उन्होंने कहा कि केंद्र से मिलने वाली 1,000 मेगावाट बिजली भी इस बार नहीं मिल रही। इस बीच केंद्रीय कोयला मंत्रालय ने पंजाब में बिजली उत्पादन घटने के लिए कोयले की कमी को जिम्मेदार ठहराने वाली खबरों को खारिज किया है। मंत्रालय ने रविवार को कहा कि राज्य के बिजली संयंत्रों को पर्याप्त कोयला उपलब्ध कराया जा रहा है। बिजली उत्पादन कम होने की मुख्य वजह बिजलीघरों का कम इस्तेमाल, निजी बिजली संयंत्रों में तकनीकी खराबी और उपलब्ध कोयले का समय पर उठान नहीं होना है।
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