भरतपुर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का गृह क्षेत्र है। ऐसे में यहां भाजपा के प्रदर्शन पर खास नजर थी। चुनाव प्रचार के दौरान मुख्यमंत्री ने भरतपुर में रोड शो भी किया था, जिसमें भाजपा के 57 प्रत्याशी शामिल हुए थे। इसके बावजूद पार्टी 65 वार्डों में से 20 पर ही जीत दर्ज कर सकी।

भरतपुर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का गृह क्षेत्र है। ऐसे में यहां भाजपा के प्रदर्शन पर खास नजर थी। चुनाव प्रचार के दौरान मुख्यमंत्री ने भरतपुर में रोड शो भी किया था, जिसमें भाजपा के 57 प्रत्याशी शामिल हुए थे। इसके बावजूद पार्टी 65 वार्डों में से 20 पर ही जीत दर्ज कर सकी।
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के गृह क्षेत्र भरतपुर में नगर निगम चुनाव के नतीजों ने सियासी समीकरण बदल दिए हैं। भरतपुर नगर निगम के 65 वार्डों के सभी परिणाम सामने आ चुके हैं और यहां निर्दलीय प्रत्याशियों ने भाजपा-कांग्रेस दोनों को पीछे छोड़ दिया है। निर्दलीयों ने 36 वार्डों में जीत दर्ज की है, जबकि भाजपा को 20 और कांग्रेस को महज 7 वार्डों में जीत मिली। इसके अलावा बसपा और RLP ने एक-एक वार्ड में जीत दर्ज की है।
65 में से 36 सीटों पर निर्दलीयों का कब्जा
भरतपुर नगर निगम में निर्दलीय प्रत्याशियों ने कुल 65 में से 36 वार्ड जीतकर 55.4 प्रतिशत सीटों पर कब्जा जमाया है। भाजपा और कांग्रेस दोनों को मिलाकर 27 सीटें मिली हैं। इस तरह निर्दलीयों ने दोनों प्रमुख दलों की कुल सीटों से भी 9 ज्यादा वार्ड अपने नाम किए हैं। भाजपा से निर्दलीयों की जीत का अंतर 16 सीट का रहा।
CM के गृह क्षेत्र में भाजपा के सामने बड़ी चुनौती
भरतपुर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का गृह क्षेत्र है। ऐसे में यहां भाजपा के प्रदर्शन पर खास नजर थी। चुनाव प्रचार के दौरान मुख्यमंत्री ने भरतपुर में रोड शो भी किया था, जिसमें भाजपा के 57 प्रत्याशी शामिल हुए थे। इसके बावजूद पार्टी 65 वार्डों में से 20 पर ही जीत दर्ज कर सकी। नतीजों ने भरतपुर में भाजपा के स्थानीय संगठन और चुनावी रणनीति को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।
कांग्रेस सिर्फ 7 वार्डों तक सिमटी
भरतपुर नगर निगम चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन भी निराशाजनक रहा। पार्टी को सिर्फ 7 वार्डों में जीत मिली और वह तीसरे नंबर पर रही। भाजपा को कांग्रेस से 13 सीट ज्यादा मिलीं, लेकिन दोनों दल मिलकर भी निर्दलीयों के आंकड़े तक नहीं पहुंच सके। कांग्रेस के सामने अब अपने पार्षदों को एकजुट रखने और बोर्ड गठन के समीकरण में अपनी भूमिका तय करने की चुनौती होगी।
बोर्ड गठन में निर्दलीय होंगे सबसे अहम
भरतपुर नगर निगम में किसी एक राजनीतिक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। ऐसे में बोर्ड गठन के लिए निर्दलीय पार्षद सबसे महत्वपूर्ण हो गए हैं। 36 निर्दलीय पार्षदों की जीत के बाद अब भाजपा और कांग्रेस दोनों की नजर उनके समर्थन पर रहेगी। हालांकि बोर्ड गठन का अंतिम गणित पार्षदों के रुख और आपसी राजनीतिक समीकरणों पर निर्भर करेगा।
बसपा और RLP ने भी खोला खाता
भरतपुर के 65 वार्डों के परिणाम में बसपा और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी यानी RLP ने भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है। दोनों दलों के खाते में एक-एक वार्ड गया है। हालांकि सीटों के लिहाज से सबसे बड़ा प्रदर्शन निर्दलीयों का रहा, जिन्होंने प्रमुख राजनीतिक दलों के सामने मजबूत चुनौती पेश की।
रूपवास में भी निर्दलीयों का जलवा
भरतपुर जिले की रूपवास नगरपालिका के 25 वार्डों में भी निर्दलीय प्रत्याशियों का दबदबा देखने को मिला। यहां निर्दलीयों ने 14 वार्डों में जीत दर्ज की। भाजपा को 9 और कांग्रेस को 2 सीटें मिलीं। रूपवास में भाजपा ने 19 और कांग्रेस ने 9 वार्डों में प्रत्याशी उतारे थे।
मतदान के बाद से ही शुरू हो गई थी जोड़तोड़
भरतपुर नगर निगम में 9 सितंबर को मतदान हुआ था और कुल 73.13 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था। मतदान के बाद भाजपा और कांग्रेस ने अपने प्रत्याशियों को बाड़ेबंदी में रखा था। अब परिणाम आने के बाद राजनीतिक समीकरण तेजी से बदलने लगे हैं। निर्दलीय पार्षदों की संख्या को देखते हुए दोनों दलों के लिए उन्हें अपने पक्ष में करना सबसे बड़ी चुनौती होगी।
अब किसके साथ जाएंगे निर्दलीय?
भरतपुर के नतीजों ने सबसे बड़ा सवाल बोर्ड गठन को लेकर खड़ा कर दिया है। 36 निर्दलीय पार्षदों के सामने अब यह तय करना होगा कि वे किस राजनीतिक खेमे के साथ जाते हैं या फिर अपना अलग समूह बनाकर बोर्ड गठन में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। फिलहाल इतना साफ है कि मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र भरतपुर में इस बार जनता ने भाजपा या कांग्रेस को नहीं, बल्कि निर्दलीय प्रत्याशियों को सबसे ज्यादा मौका दिया है। अब नगर निगम की सत्ता की चाबी भी इन्हीं निर्दलीय पार्षदों के हाथ में नजर आ रही है।
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