वांगचुक बोले-सरकार के खिलाफ बोला, मेरा एनकाउंटर हो सकता है:लेह हिंसा का एक साल पूरा होने पर कहा- गृहमंत्री इस्तीफा दें, हिंसा की जिम्मेदारी लें

वांगचुक बोले-सरकार के खिलाफ बोला, मेरा एनकाउंटर हो सकता है:लेह हिंसा का एक साल पूरा होने पर कहा- गृहमंत्री इस्तीफा दें, हिंसा की जिम्मेदारी लें

वांगचुक बोले-सरकार के खिलाफ बोला, मेरा एनकाउंटर हो सकता है:लेह हिंसा का एक साल पूरा होने पर कहा- गृहमंत्री इस्तीफा दें, हिंसा की जिम्मेदारी लें


क्लाइमेट एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने गुरुवार को आशंका जताई कि सरकार के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने की वजह से उन्हें किसी एनकाउंटर में मारा जा सकता है। उन्होंने पिछले साल लेह में हुई हिंसा को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफ़े की मांग की। वांगचुक ने यह बात हिंसा की पहली बरसी पर आयोजित कार्यक्रम में कही। पिछले साल लद्दाख में राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची की सुरक्षा की मांग को लेकर प्रदर्शन हुए थे। उन्होंने न्यायिक जांच की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की। रिपोर्ट जारी नहीं होने पर स्वतंत्र ‘पीपुल्स ट्रिब्यूनल’ बनाकर पुलिस फायरिंग की जांच कराने की चेतावनी दी। वांगचुक बोले- जान की धमकी मिली वांगचुक ने कहा कि उन्हें अपनी जान को लेकर धमकियां मिली हैं। उन्होंने कहा कि देश को जगाने में मदद मिले तो वह किसी भी नतीजे का सामना करने को तैयार हैं। उन्होंने कहा, “उन्होंने मुझे जेल में डाल दिया है। अब यह भी संभव है कि कहीं मेरा एनकाउंटर कर दिया जाए। लोग कहते हैं- तुम्हारा एनकाउंटर कर दिया जाएगा। अगर ऐसा होता है तो होने दीजिए, ताकि देश जागे।” वांगचुक ने पिछले साल के आंदोलन के दौरान हुई मौतों के लिए गृह मंत्री को राजनीतिक रूप से जिम्मेदार बताया। उन्होंने कहा कि इस घटना की जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने कहा, “आज लद्दाख से मैं कहता हूं कि अमित शाह को इस्तीफा देना चाहिए। लद्दाख में जो हुआ, उसकी जिम्मेदारी उन्हें लेनी होगी।” वांगचुक ने आरोप लगाया कि सुरक्षा बलों ने स्थानीय युवाओं पर AK-47 समेत स्वचालित हथियारों का इस्तेमाल किया। बाद में इन्हीं युवाओं को ‘राष्ट्र-विरोधी’ बताया गया। राहुल गांधी के बयान का समर्थन वांगचुक ने जंतर-मंतर पर छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी की अमित शाह के इस्तीफे की मांग का समर्थन किया। हालांकि, उन्होंने लद्दाख के हालात पर राहुल गांधी की चुप्पी पर सवाल उठाया। वांगचुक ने कहा, “राहुल गांधी खड़े हुए और पूछा कि छात्रों पर ऐसे हथियारों का इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है। उन्होंने अमित शाह के इस्तीफे की मांग की। मैं इसका समर्थन करता हूं।” उन्होंने कहा, “लेकिन अगर उन्होंने पहले अमित शाह के इस्तीफे की मांग की थी, तो लद्दाख में हुई घटना पर क्या? यहां AK-47 का इस्तेमाल हुआ और लोग मारे गए। गोलियां उनके सिर और सीने में लगीं।” उन्होंने कहा कि पिछले साल के प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों की मौत स्वचालित हथियारों से की गई फायरिंग में हुई। वांगचुक ने कहा कि जिन लोगों की जान गई, उन्हें बाद में राष्ट्र-विरोधी बताया गया। लद्दाख की मांगों से जोड़ी हिंसा वांगचुक ने हिंसा को लद्दाख की लंबे समय से चली आ रही मांगों से जोड़ा। इनमें संवैधानिक सुरक्षा की मांग भी शामिल है। उन्होंने आरोप लगाया कि लोगों से किए गए आश्वासन बाद में पूरे नहीं किए गए। उन्होंने कहा कि लद्दाख को न्याय दिलाना सिर्फ केंद्रशासित प्रदेश के लोगों की जिम्मेदारी नहीं है। वांगचुक ने कहा कि यह पूरे देश की जिम्मेदारी है। लेह और कारगिल में बंद रहा बाजार बुधवार को पिछले साल 24 सितंबर की हिंसा की बरसी पर लेह और लद्दाख के दूसरे हिस्सों में बंद रखा गया। लेह और कारगिल में दुकानें और कारोबारी प्रतिष्ठान बंद रहे। सड़कों पर आवाजाही कम रही और सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ। लद्दाख में कुछ लोगों ने इस दिन को ‘शहीद दिवस’ के तौर पर मनाया। वांगचुक ने आरोप लगाया कि भारी सुरक्षा व्यवस्था और पाबंदियों के कारण गुरुवार के स्मरण कार्यक्रम में कम लोग पहुंचे। उन्होंने कहा कि हर जगह बैरिकेड लगाए गए हैं। गांवों और रास्तों पर सशस्त्र जवान तैनात हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ गांव प्रतिनिधियों और छात्रों को मारे गए लोगों की याद में आयोजित कार्यक्रमों में जाने से हतोत्साहित किया जा रहा था। वांगचुक ने कहा कि कम लोगों की मौजूदगी को आंदोलन की हार नहीं समझना चाहिए। लद्दाख पुलिस ने आरोपों को बताया गलत लद्दाख पुलिस ने इन आरोपों को “झूठा, बेबुनियाद और भ्रामक” बताया। पुलिस ने कहा कि 2025 की हिंसा में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि देने के लिए आयोजित प्रार्थना सभा में जाने से किसी को नहीं रोका गया। पुलिस के मुताबिक, सुरक्षा तैनाती सामान्य सुरक्षा प्रोटोकॉल का हिस्सा थी। पुलिस ने कहा कि लद्दाख बौद्ध एसोसिएशन (LBA) को लेह के NDS ग्राउंड में सार्वजनिक सभा की अनुमति दी गई थी। इस मैदान की क्षमता 10,000 लोगों की है। पुलिस ने बयान में कहा कि कार्यक्रम में 800 से कम लोग पहुंचे। पुलिस ने किसी भी व्यक्ति को आयोजन स्थल तक जाने या कार्यक्रम में शामिल होने से नहीं रोका। पुलिस के मुताबिक, शहर में लगाए गए बैरिकेड केवल यातायात और भीड़ संभालने के लिए थे। आयोजकों ने पहले बड़ी संख्या में लोगों के आने की जानकारी दी थी, इसलिए ये इंतजाम किए गए थे। वांगचुक बोले- लोकतंत्र के लिए भारत चुना वांगचुक ने कहा कि लद्दाख ने भारत के साथ रहना इसलिए चुना, क्योंकि उसे लोकतंत्र और सम्मान के साथ जीने के अधिकार पर भरोसा था। उन्होंने आरोप लगाया कि लद्दाख के हालात ने डर का माहौल बना दिया है। उनके मुताबिक, यह उस लोकतांत्रिक सोच के खिलाफ है, जिसके कारण लोगों ने भारत को चुना था। वांगचुक ने कहा कि 2014 से 2019 तक देश में हालात अच्छे थे, जब बीजेपी सत्ता में आई थी। उन्होंने अमित शाह पर निशाना साधते हुए कहा, “जब से वह गृह मंत्री बने हैं, हर जगह दंगे और अशांति हुई है। लद्दाख में वादे किए गए और फिर तोड़ दिए गए।” वांगचुक ने कहा, “एक तरफ लद्दाख के पास चीन था और दूसरी तरफ भारत। हमने भारत को इसलिए चुना, क्योंकि हमें भरोसा था कि यहां लोकतंत्र है और हम सिर ऊंचा करके जी सकेंगे।” उन्होंने कहा, “आज लद्दाख पर ऐसा दमन किया जा रहा है कि मेरी नजर में चीन भी तिब्बत के साथ ऐसा नहीं कर रहा।”

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