अधिक मास के आखिरी 5 दिनों में महासंयोग, सोमवती अमावस्या और शिवरात्रि पर इन उपायों से मिटेंगे सारे कष्ट

अधिक मास के आखिरी 5 दिनों में महासंयोग, सोमवती अमावस्या और शिवरात्रि पर इन उपायों से मिटेंगे सारे कष्ट

तीन वर्ष में एक बार आने वाले पुरुषोत्तम मास के अब पांच दिन शेष बचे हैं। ये पांचों ही दिन तिथियों और ग्रहों के गोचर के चलते विशेष महत्व के हैं। …और पढ़ें

Publish Date: Wed, 10 Jun 2026 10:01:08 PM (IST)Updated Date: Wed, 10 Jun 2026 10:01:08 PM (IST)

अधिक मास के आखिरी 5 दिनों में महासंयोग, सोमवती अमावस्या और शिवरात्रि पर इन उपायों से मिटेंगे सारे कष्ट
अधिक मास के आखिरी 5 दिनों में महासंयोग।

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। तीन वर्ष में एक बार आने वाले पुरुषोत्तम मास के अब पांच दिन शेष बचे हैं। ये पांचों ही दिन तिथियों और ग्रहों के गोचर के चलते विशेष महत्व के हैं। ज्योतिर्विदों के अनुसार, यह तिथि जगत के पालनहार श्रीहरि और महादेव के पूजन के साथ ही पितरों की कृपा पाने का विशेष अवसर है। इसमें 11 को परमा एकादशी, 12 को शुक्र प्रदोष व्रत, 13 को ज्येष्ठ अधिक मासिक शिवरात्रि एवं 15 को सोमवती अमावस्या का संयोग बनेगा। पुण्यदायी इस माह के समापन पर हो रहे अनुष्ठान में आस्था का उल्लास दुगुना होगा।

15 जून को समापन, 19 से शुरू होंगे मांगलिक कार्य

इस वर्ष 59 दिनी ज्येष्ठ मास में 17 मई को शुरू हुए अधिक मास का समापन 15 जून को होगा। इसके बाद 16 जून से शुद्ध ज्येष्ठ मास की शुरुआत होगी। पुरुषोत्तम मास में धार्मिक अनुष्ठानों का क्रम जारी है। इससे पहले अधिक मास 2023 में आया था। अधिक मास के चलते मांगलिक कार्यों पर लगा विराम भी 19 जून को हट जाएगा। इसके बाद विवाह, मुंडन, उपनयन संस्कार, गृह प्रवेश आदि की शुरुआत होगी।

पांच दिनी चक्र में दिखेगा हरि-हर का एकाकार रूप

ज्योतिर्विद् पंडित विनायक शर्मा के अनुसार, 11 से 15 जून तक का पांच दिनी चक्र पुण्यदायी संयोग बना रहा है। इन पांच दिनों के अनुष्ठान में हरि-हर (विष्णु और शिव) का एकाकार रूप देखने को मिलेगा। मान्यता है कि इस अवसर पर पूजन-अर्चन एवं पवित्र नदियों में स्नान से पापों का क्षय होता है।

दो दिन रहेगी अमावस्या तिथि, भीष्म पितामह ने बताया था महत्व

काली मंदिर खजराना के आचार्य शिवप्रसाद तिवारी के अनुसार, इस बार अमावस्या 14 और 15 जून को रहेगी, जिससे 15 जून को साल की पहली सोमवती अमावस्या का संयोग बनेगा। कहा जाता है कि महाभारत काल में भीष्म पितामह ने इस तिथि का महत्व बताते हुए कहा था कि इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से हजारों अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य प्राप्त होता है।

परमा एकादशी, प्रदोष और मासिक शिवरात्रि का महासंयोग

11 जून को पुरुषोत्तमी ‘परमा एकादशी’ पर शोभन योग का निर्माण हो रहा है। इस व्रत को करने से कुबेर देव को अपनी खोई हुई निधि वापस मिली थी। इस दिन भगवान लक्ष्मी-नारायण के पूजन से सात जन्मों की दरिद्रता और आर्थिक संकट दूर होते हैं।

12 जून को ज्येष्ठ माह का प्रदोष व्रत और अगले दिन 13 जून को मासिक शिवरात्रि है। इन दो दिनों में शिव मंदिरों में सुबह से ही भक्तों का तांता लगेगा।

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