चांदी के आयात को लेकर सरकार का बड़ा फ़ैसला, लेकिन सोने के लिए नहीं कोई शर्त

चांदी के आयात को लेकर सरकार का बड़ा फ़ैसला, लेकिन सोने के लिए नहीं कोई शर्त

सरकार के नए फ़ैसले के बाद चांदी की कीमतें बढ़ सकती हैं (फ़ाइल फ़ोटो)

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इमेज कैप्शन, सरकार के नए फ़ैसले के बाद चांदी की कीमतें बढ़ सकती हैं (फ़ाइल फ़ोटो)

भारत सरकार ने चांदी की आयात नीति में संशोधन कर दिया है. भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अधीन आने वाले डायरेक्टरेट ऑफ़ फ़ॉरेन ट्रेड ने इसकी घोषणा की है.

इस संशोधन के बाद चांदी के आयात को भारत में ‘फ़्री’ से हटाकर ‘रिस्ट्रिक्टेड’ श्रेणी में डाल दिया गया है. यानी पहले चांदी आयात करने के लिए केवल ड्यूटी (शुल्क) देनी होती थी, लेकिन अब ऐसा नहीं हो पाएगा.

चांदी की इम्पोर्ट पॉलिसी में बदलाव के बाद अब चांदी आयात करने के लिए डायरेक्टरेट जनरल ऑफ़ फ़ॉरेन ट्रेड के पास इसके लाइसेंस के लिए आवेदन देना होगा और लाइसेंस मिलने के बाद ही चांदी के आयात की अनुमति दी जाएगी.

ख़ास बात यह है कि ऐसी कोई शर्त सोने के साथ नहीं रखी गई है, जो कि चांदी के मुक़ाबले काफ़ी महंगा है. हम जानने की कोशिश करेंगे कि ऐसा क्यों किया गया है और इसके पीछे क्या मक़सद हो सकता है.

विदेशी मुद्रा बचाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के बाद 12 मई को सोने और चांदी पर इम्पोर्ट ड्यूटी 6% से बढ़ाकर 15% कर दी गई थी.

इसका मक़सद स्पष्ट था कि सोना और चांदी महंगे होने से इसकी ख़रीदारी कम होगी, जिससे भारत को इसके आयात के लिए कम विदेशी मुद्रा ख़र्च करनी होगी.

चांदी के आयात पर अंकुश क्यों?

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इमेज कैप्शन, भारत में सोने-चांदी का आयात करने के लिए केवल इम्पोर्ट ड्यूटी चुकानी होती थी, लेकिन अब चांदी का आयात करने के लिए लाइसेंस लेना ज़रूरी होगा (फ़ाइल फ़ोटो)

डायरेक्टरेट ऑफ़ फ़ॉरेन ट्रेड ने 16 मई को चांदी के आयात को लेकर अपना नया आदेश जारी किया है. यानी सोने-चांदी पर इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ाने के महज़ चार दिन के बाद यह फ़ैसला लिया गया.

ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) के निदेशक अजय श्रीवास्तव कहते हैं, “अब तक आप इम्पोर्ट ड्यूटी देकर जितनी चाहे चांदी इम्पोर्ट कर सकते थे. लेकिन अब डीजीएफ़टी तय करेगा कि आपको चांदी के इम्पोर्ट का लाइसेंस देना है या नहीं.”

वह कहते हैं, “दरअसल भारत और यूएई के बीच साल 2022 में एक समझौता हुआ था, जिसके तहत भारत को यूएई से आयात होने वाली चांदी पर हर साल इम्पोर्ट ड्यूटी 1% कम करनी थी. इस तरह से फ़िलहाल भारत को यूएई से चांदी आयात करने पर केवल 7% आयात शुल्क देना पड़ता था. जबकि अगर आप ब्रिटेन से चांदी आयात करते हैं तो आपको 15% आयात शुल्क देना होता था.”

“यह एक बहुत बड़ा अंतर था. हालाँकि सरकार ने इस फ़ैसले के पीछे की वजह नहीं बताई है. लेकिन अगर इसका मक़सद विदेशी मुद्रा बचाना होता तो चांदी से कई गुना महंगे सोने के लिए ऐसा फ़ैसला किया जाता.”

अजय श्रीवास्तव भारत सरकार के विदेश व्यापार महानिदेशालय में ‘एडिशनल डायरेक्टर जनरल फ़ॉरेन ट्रेड’ के पद पर रह चुके हैं.

उनका मानना है, “यूएई से सोने के आयात पर अन्य देशों के मुक़ाबले केवल 1% की छूट है, यानी यह 14% है, जो बहुत बड़ा अंतर नहीं है. लेकिन चांदी के मामले में हो सकता है कि सरकार को आशंका हो कि उसकी पॉलिसी का फ़ायदा उठाकर कोई भी कारोबारी यूएई के ज़रिए भारत तक चांदी ले आएगा. फ़िलहाल तो यही नज़र आ रहा है.”

ज़ाहिर तौर पर इसका एक असर जो नज़र आता है, वह यह हो सकता है कि चांदी की क़ीमतों में बढ़ोतरी दिखे.

48 घंटे में दोबारा सीएनजी के दाम बढ़े

दिल्ली में आईजीएल ने सीएनजी की दाम फिर से बढ़ा दिए हैं (फ़ाइल फ़ोटो)

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इमेज कैप्शन, दिल्ली में आईजीएल ने सीएनजी के दाम फिर से बढ़ा दिए हैं (फ़ाइल फ़ोटो)

ईरान पर अमेरिका और इसराइल के हमले के बाद होर्मुज़ स्ट्रेट बाधित हुआ और तब से ही अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की क़ीमत बढ़ने लगी थी. हालांकि भारत में इनकी क़ीमतों पर असर अब नज़र आ रहा है.

शुक्रवार को पेट्रोल और डीज़ल की क़ीमतों में तीन-तीन रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी. इसके साथ ही सीएनजी की क़ीमत में भी दो रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी की गई.

अभी लोगों को महंगाई का यह झटका लगा ही था कि रविवार को राजधानी दिल्ली में सीएनजी की क़ीमत में फिर से एक रुपये की बढ़ोतरी कर दी गई.

इंडियन यूथ कांग्रेस ने इस बढ़ोतरी पर सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, “आज सुबह की 2 ख़बरें- प्रधानमंत्री अपनी विदेश यात्रा के बीच नीदरलैंड्स पहुंच चुके है, और दिल्ली में 2 दिनों के अंदर सीएनजी के दाम दो बार बढ़ चुके हैं. बाकी आप लोग देश बचाते रहिए.”

एचपीसीएल ने बिहार से जुड़े दावों का किया खंडन

पेट्रोल पंप (सांकेतिक तस्वीर)

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इमेज कैप्शन, एचपीसीएल ने सोशल मीडिया पर बिहार के पेट्रोल पंपों से जुड़े दावे का खंडन किया है (सांकेतिक तस्वीर)

डीज़ल और पेट्रोल की क़ीमतों में बढ़ोतरी के साथ ही सोशल मीडिया पर देश के कई इलाक़ों में पेट्रोल पंपों पर भारी भीड़ के दावे किए जा रहे हैं.

ऐसे कई वीडियो में भीड़ की वजह से लोगों में नाराज़गी नज़र आ रही है.

सोशल मीडिया पर यह भी दावा किया जा रहा है कि बिहार में कई पेट्रोल पंपों को बंद कर दिया गया है. ऐसे ही एक दावे का एचपीसीएल (हिन्दुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड) ने खंडन किया है.

एचपीसीएल ने बिहार के गया में एक पेट्रोल पंप को लेकर किए जाए रहे दावे को शनिवार को ग़लत बताया है.

एचपीसीएल का कहना है, “बिहार के संबंध में सोशल मीडिया पर एक भ्रामक, बेबुनियाद और तथ्यों से परे वीडियो प्रसारित किया जा रहा है. इस वीडियो में आरोप लगाया गया है कि वहाँ पेट्रोल और डीज़ल की बिक्री में कमी आ गई है और बिक्री पर सीमाएँ लगा दी गई हैं.”

“इस वीडियो में किए गए दावे पूरी तरह से झूठे हैं और रिटेल आउटलेट पर मौजूद वास्तविक स्थिति को नहीं दर्शाते हैं. इस पूरी अवधि के दौरान आउटलेट पर पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध रहा है.”

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित

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