भारत-अमेरिका संबंधों की परीक्षा: ऊर्जा पर कई अनसुलझे सवाल, रूस का पहलू सबसे संवेदनशील – Test For India-us Relations Rubio Jaishankar Mumbai Meeting Unresolved Questions Russia Factor Most Sensitive

भारत-अमेरिका संबंधों की परीक्षा: ऊर्जा पर कई अनसुलझे सवाल, रूस का पहलू सबसे संवेदनशील – Test For India-us Relations Rubio Jaishankar Mumbai Meeting Unresolved Questions Russia Factor Most Sensitive

भारत-अमेरिका संबंधों की परीक्षा: ऊर्जा पर कई अनसुलझे सवाल, रूस का पहलू सबसे संवेदनशील – Test For India-us Relations Rubio Jaishankar Mumbai Meeting Unresolved Questions Russia Factor Most Sensitive

एस जयशंकर, मार्को रूबियो (फाइल)
– फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बीच आज मुंबई में द्विपक्षीय वार्ता होगी। यह मुलाकात ऐसे समय हो रही है जब दोनों देशों के रिश्ते रूस से ऊर्जा आपूर्ति और नीतिगत मतभेदों के बीच काफी उतार-चढ़ाव भरे रहे हैं। यही कारण है कि इस हाई प्रोफाइल बैठक पर दुनिया भर की निगाहें लगी हुई हैं।


भारत के लिए चुनौती क्या?

भारत की तीन दिन की यात्रा से पहले सोमवार को समरकंद में रुबियो ने कहा कि दोनों देश व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के बेहद करीब हैं। हालांकि दोनों देशों की ओर से इसी तरह के कई बयान आते रहे हैं, लेकिन औपचारिक सहमति तक नहीं पहुंचा जा सका है। भारत के लिए चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि यह समझौता जहां निर्यात और निवेश को बढ़ावा दे, वहीं घरेलू उद्योगों और संवेदनशील क्षेत्रों के हितों की पूरी रक्षा हो।

रूस से ऊर्जा खरीद का सवाल

इस बातचीत का सबसे संवेदनशील पहलू रूस से तेल खरीद का सवाल है। समरकंद में रुबियो ने स्वीकार किया कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, कीमतों और राष्ट्रीय सुरक्षा के कारण ही अमेरिका को टैरिफ प्रतिबंधों से छूट देनी पड़ी है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि भारत के साथ व्यापार समझौते की संभावनाएं इन फैसलों से जुड़ी हैं। रुबियो ने स्वीकार किया कि वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों तक पहुंच हर देश के लिए समान रूप से आसान नहीं है।

व्यापार समझौते की पसोपेश के बीच आज मुंबई में जयशंकर-रुबियो मुलाकात

अमेरिका के कड़े रुख के बीच रुबियो का भारत दौरा भारत की सामरिक स्वायत्तता की परीक्षा भी होगा। अमेरिका का लक्ष्य भारत पर रूस से तेल आयात कम करने का दबाव बनाना रहा है। इधर न्यूयॉर्क में जयशंकर यह साफ संदेश दे चुके हैं कि 140 करोड़ भारतीयों की ऊर्जा सुरक्षा सरकार के लिए सर्वोपरि है, यानी भारत अमेरिकी दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है।

क्या प्रस्ताव दे सकता है अमेरिका?

जब तक वैश्विक बाजार में किफायती और सुलभ विकल्प नहीं मिलते, वह अपनी ऊर्जा जरूरतों से समझौता नहीं करेगा। इस रस्साकशी के बीच अमेरिका रक्षा क्षेत्र में उन्नत क्रिटिकल टेक्नोलॉजी का प्रस्ताव देकर ऊर्जा मोर्चे पर भारत से रियायतें मांगने की कोशिश कर सकता है।

कठिन मोलभाव की बिसात

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