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भोपाल एम्स अस्पताल में 3 साल के मासूम की मौत के मामले में बड़ी लापरवाही सामने आई है। जांच में खुलासा हुआ है कि बच्चे को गलती से खतरनाक केमिकल फॉर्मेलिन इंजेक्ट कर दिया गया, जिससे उसकी मौत हो गई। पुलिस ने दो नर्सिंग ऑफिसर्स के खिलाफ 11 जून मामला दर्ज कर लिया है। सागर जिले के बीना तहसील के ग्राम कौरजा निवासी 3 वर्षीय सार्थक यादव को 15 दिसंबर 2025 को गंभीर बीमारी और बुखार के चलते एम्स भोपाल के पीडियाट्रिक वार्ड में भर्ती कराया गया था। वह ब्लड कैंसर से पीड़ित था और उसका इलाज चल रहा था। जांच में सामने आया कि बायोप्सी प्रक्रिया के लिए उपयोग होने वाला खतरनाक रसायन फॉर्मेलिन एक सीरिंज में भरकर वार्ड में ही रखा था। ड्यूटी पर मौजूद नर्सिंग ऑफिसर अनुका गुजराती ने इसे सुरक्षित रखने के बजाय मरीज के बेड के पास ही छोड़ दिया, जो नियमों के खिलाफ है। बिना जांच किए लगा दिया इंजेक्शन
17 दिसंबर की सुबह बच्चे की आईवी लाइन चोक होने पर ड्यूटी पर मौजूद नर्स मधुबाला शर्मा ने बिना लेबल और दवा की जांच किए उसी सिरिंज को उठाकर बच्चे को फ्लश कर दिया। इस दौरान बच्चे के पिता ने तीन बार चेतावनी दी कि यह सही दवा नहीं है, फिर भी नर्स ने उनकी बात नजरअंदाज कर दी। इंजेक्शन लगते ही बिगड़ी हालत, मौत
फॉर्मेलिन शरीर में जाते ही बच्चा अचेत हो गया। उसे तत्काल पीआईसीयू में शिफ्ट किया गया, जहां डॉक्टरों ने सीपीआर समेत तमाम प्रयास किए, लेकिन सुबह 8:45 बजे उसकी मौत हो गई। जांच रिपोर्ट में लापरवाही साबित
एम्स अस्पताल की आंतरिक जांच समिति की रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि बच्चे की मौत का सीधा कारण फॉर्मेलिन का गलत तरीके से इंट्रावीनस इंजेक्शन लगना था। रिपोर्ट में नर्सिंग स्टाफ की गंभीर लापरवाही उजागर हुई है। दोनों नर्सों पर आपराधिक मामला दर्ज
थाना बागसेवनिया पुलिस ने जांच के आधार पर नर्स मधुबाला शर्मा के खिलाफ घोर लापरवाही से मौत कारित करने और नर्स अनुका गुजराती के खिलाफ खतरनाक रसायन को असुरक्षित रखने के आरोप में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 106(1) और 286 के तहत केस दर्ज कर लिया है। मामले की विवेचना जारी है। फॉर्मेलिन क्या है
फॉर्मेलिन दरअसल फॉर्मल्डिहाइड (Formaldehyde) गैस का पानी में घुला हुआ घोल होता है। आमतौर पर इसमें लगभग 37–40% फॉर्मल्डिहाइड होता है और इसे एक तेज, विषैला रसायन माना जाता है। इसका उपयोग मेडिकल क्षेत्र में बायोप्सी या ऑपरेशन से निकाले गए टिश्यू (ऊतक) को सुरक्षित रखने के लिए होता है। बच्चे को थी बल्ड कैंसर की बीमारी
मामले की जांच में यह सामने आया है कि बालक सार्थक यादव बी-सेल एक्यूट लिम्फोब्लास्टिक ल्यूकेमिया नामक गंभीर बीमारी से पीड़ित था। यह एक प्रकार का ब्लड कैंसर (रक्त कैंसर) होता है, जिसमें असामान्य सफेद रक्त कोशिकाएं तेजी से बढ़ती हैं और शरीर की सामान्य रोग प्रतिरोधक क्षमता को प्रभावित करती हैं। इसी बीमारी के इलाज के लिए उसे एम्स भोपाल के पीडियाट्रिक वार्ड में भर्ती कराया गया था। यह खतरनाक क्यों है? इस केस में क्या हुआ? एम्स भोपाल के मामले में यही फॉर्मेलिन गलती से बच्चे की नस (IV) में इंजेक्ट हो गया, जबकि इसका इस्तेमाल सिर्फ सैंपल सुरक्षित रखने के लिए होना चाहिए था , यही वजह है कि यह घटना बेहद गंभीर मानी जा रही है। नर्स मधुबाला शर्मा नर्स अनुका गुजराती
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