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बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय में बीते दो दिनों से कुलपति के खिलाफ अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) का धरना जारी है। एबीवीपी कार्यकर्ता कुलपति के इस्तीफे और विश्वविद्यालय में धारा-52 लागू करने की मांग कर रहे हैं। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि दो दिन बीत जाने के बाद भी न तो किसी जिम्मेदार अधिकारी ने प्रदर्शनकारियों से चर्चा की और न ही कुलपति सामने आए। विरोध के दौरान छात्रों ने “कुलपति लापता हैं” लिखे पोस्टर भी प्रदर्शित किए। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे एबीवीपी के प्रांत मंत्री केतन चतुर्वेदी ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय में शैक्षणिक, प्रशासनिक और आर्थिक अनियमितताओं का अंबार है। विश्वविद्यालय केवल 34 शिक्षकों के भरोसे संचालित हो रहा है। कुलपति के निरीक्षण में कई महाविद्यालय बिना भवन के संचालित हो रहे हैं। यहां तक की विश्वविद्यालय का नाम भी जल्दबाजी में बदला जा रहा है। बिना भवन के चल रहे महाविद्यालय, जांच की मांग एबीवीपी ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय से संबद्ध कई महाविद्यालय ऐसे हैं, जो कागजों पर संचालित हो रहे हैं। संगठन ने हाल ही में सामने आए श्रीराम कॉलेज का उदाहरण देते हुए कहा कि जांच समिति को कॉलेज अपने निर्धारित पते पर ही नहीं मिला। इसके बावजूद वर्षों से उसे संबद्धता और निरंतरता मिलती रही। परिषद का दावा है कि कई कॉलेज स्वीकृत पते के बजाय दूसरी जगह संचालित हो रहे हैं। आरोप है कि निरीक्षण व्यवस्था में पारदर्शिता की कमी के कारण ऐसे संस्थानों को लगातार मान्यता मिल रही है। एबीवीपी ने सभी संबद्ध महाविद्यालयों की स्वतंत्र जांच कराने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। बिना पर्याप्त चर्चा के बदला जा रहा नाम केतन चतुर्वेदी ने कहा कि विश्वविद्यालय का नाम बिना पर्याप्त चर्चा के जल्दबाजी में बदला जा रहा है। इसके लिए कार्य परिषद की आपातकालीन बैठक बुलाई गई थी, लेकिन बैठक का एजेंडा पहले से सदस्यों को उपलब्ध नहीं कराया गया। उन्होंने कहा कि संभवतः कार्य परिषद के सदस्यों को बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय के इतिहास और इससे जुड़े तथ्यों की पूरी जानकारी नहीं थी, इसलिए यह प्रस्ताव पारित किया गया। उनका कहना है कि यदि बैठक से पहले प्री-एजेंडा जारी किया जाता और इस विषय पर विस्तृत चर्चा होती, तो अधिक संतुलित और बेहतर निर्णय लिया जा सकता था। देखें प्रदर्शन का कुछ तस्वीरें परीक्षा परिणाम, प्रवेश प्रक्रिया और भर्ती पर सवाल परिषद ने आरोप लगाया कि एमबीए प्रथम और तृतीय सेमेस्टर सहित कई परीक्षाओं के परिणाम महीनों से लंबित हैं। पुनर्मूल्यांकन के परिणाम भी एक-एक वर्ष तक जारी नहीं हो रहे। इस वर्ष प्रवेश प्रक्रिया में स्पष्ट नीति नहीं होने से छात्रों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है, जिसके चलते प्रवेश में करीब 40 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई है। संगठन का कहना है कि शिक्षकों की भर्ती के लिए विज्ञापन जारी होने के बावजूद नियुक्तियां नहीं की जा रही हैं। वर्तमान में केवल 34 शिक्षकों के भरोसे विश्वविद्यालय का संचालन हो रहा है, जिससे शैक्षणिक गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। टेंडर, डिजिलॉकर और सुरक्षा व्यवस्था पर भी आरोप एबीवीपी ने विश्वविद्यालय में आर्थिक अनियमितताओं के आरोप भी लगाए हैं। संगठन का दावा है कि सुरक्षा एजेंसी और उत्तर पुस्तिकाओं से जुड़े टेंडर नियमों को दरकिनार कर जारी किए गए। इसके अलावा डिजिलॉकर में उपलब्ध डिग्री और अंकसूची में त्रुटि सुधार की कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं है। परिषद ने छात्रावासों में पेयजल, भोजन और सुरक्षा व्यवस्था को भी चिंताजनक बताया। आरोप है कि रात के समय विश्वविद्यालय परिसर असामाजिक गतिविधियों का केंद्र बन जाता है, जिससे छात्राओं की सुरक्षा पर सवाल खड़े होते हैं। एबीवीपी की 10 प्रमुख मांगें उग्र आंदोलन की चेतावनी एबीवीपी ने चेतावनी दी है कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन और उच्च शिक्षा विभाग ने जल्द कार्रवाई नहीं की तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। आंदोलन चरण बद्ध तरीके से चलेगा सभी महाविद्यालय के छात्र भी इसमें उतरेंगे। हम सड़के जाम करेंगे। संगठन ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है और छात्र, कर्मचारी तथा शोधार्थी सभी इससे प्रभावित हो रहे हैं। परिषद ने मुख्यमंत्री और उच्च शिक्षा मंत्री से हस्तक्षेप कर बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय में व्याप्त अनियमितताओं की जांच कराने की मांग की है।
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