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विधानसभा क्षेत्र क्रमांक-4 में 7 जून को हुए विवाद और बवाल के मामले में आरोपी बनाए गए विधायक मालिनी गौड़ के करीबी सौरभ उर्फ शानू दिघे ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को राजनीतिक दबाव में की गई कार्रवाई बताते हुए उसे निरस्त करने और मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। दिघे ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि पुलिस ने पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की, जबकि उनकी पत्नी द्वारा दिए गए आवेदन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने पुलिस पर मिलीभगत और निष्पक्ष जांच नहीं करने के गंभीर आरोप भी लगाए हैं। याचिका में कहा गया है कि घटना के दौरान कुछ प्रभावशाली लोग उनके घर में जबरन घुस आए थे। इनमें परमवीर राठौर, सुयश आगर, धीरज वर्मा, कृष्णाराव, नितेश और सौरभ मराठा के नाम शामिल किए गए हैं। दिघे का आरोप है कि इन लोगों ने उनकी पत्नी का मंगलसूत्र तोड़ दिया, उनकी मां के साथ धक्का-मुक्की की, घर और वाहन में तोड़फोड़ की तथा आग लगाने की धमकी भी दी। साथ ही करीब 20 से 25 ग्राम सोने की चेन ले जाने का भी आरोप लगाया गया है। दिघे का कहना है कि इन आरोपों के बावजूद संबंधित लोगों पर कोई मामला दर्ज नहीं किया गया, जबकि राजनीतिक दबाव में उन्हें और उनके साथियों को आरोपी बना दिया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि घटना के बाद समझौता हो गया था, लेकिन इसके बावजूद बाद में एफआईआर दर्ज कर ली गई। गौरतलब है कि अन्नपूर्णा थाना पुलिस ने रविवार शाम दर्ज एफआईआर में सौरभ उर्फ शानू दिघे, वीरेंद्र शेंडेगे, विधायक के पीए प्रणय चित्तौड़ा, मनीष ईमोलिया, अमित कोकाटे, प्रशांत सोनी और गिरीश शेंडेगे को आरोपी बनाया है। इनके खिलाफ हत्या के प्रयास, जबरन घर में घुसने और संगठित अपराध सहित विभिन्न गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान केस डायरी तलब की है। मामले की अगली सुनवाई अगले हफ्ते संभावित है।
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