यह लाइन माल और यात्री परिवहन दोनों के लिए महत्वपूर्ण होगी, जिससे रेल कनेक्टिविटी बेहतर होगी और यात्रा समय में तीन घंटे की बचत होगी। इससे ईंधन और समय क …और पढ़ें

HighLights
- भोपाल-रामगंजमंडी कनेक्टिविटी को मिलेगी रफ्तार
- नई रेललाइन से क्षेत्र को मिलेगी बेहतर कनेक्टिविटी
- व्यापार और आवागमन को मिलेगा बढ़ावा
नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। भोपाल-रामगंजमंडी नई बड़ी रेल लाइन परियोजना के अंतर्गत श्यामपुर-कुरावर के बीच बनी 13.70 किलोमीटर नई रेललाइन का शुक्रवार को रेल संरक्षा आयुक्त (सीआरएस), मध्य वृत्त मुंबई, गुरू प्रकाश ने निरीक्षण किया। यह निरीक्षण रेलखंड को यात्री और मालगाड़ी संचालन के लिए सुरक्षित और तकनीकी रूप से उपयुक्त घोषित करने की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा था।
ट्रैक पर क्या हुआ निरीक्षण और क्या निकला परिणाम
निरीक्षण के दौरान सीआरएस ने मोटर ट्राली के माध्यम से पूरे रेलखंड का गहन परीक्षण किया। इसमें रेलवे ट्रैक की गुणवत्ता, पुलों की मजबूती, समपार फाटकों की सुरक्षा, सिग्नल प्रणाली और दूरसंचार व्यवस्था की जांच की गई। इसके बाद श्यामपुर और कुरावर स्टेशन यार्ड का परीक्षण किया गया और नई रेललाइन पर अधिकतम 120 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से सफल स्पीड ट्रायल किया गया। निरीक्षण के दौरान रेलखंड संचालन के लिए उपयुक्त पाया गया और कमीशनिंग प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।
परियोजना की वर्तमान स्थिति
रामगंजमंडी-भोपाल नई रेललाइन परियोजना कुल 276 किलोमीटर लंबी है, जिसमें 27 स्टेशन शामिल हैं। इनमें रामगंजमंडी, झालावाड़, अकलेरा, राजगढ़, ब्यावरा, सोनकच्छ, कुरावर, श्यामपुर, दुराहा, संत हिरदाराम नगर और निशातपुरा डी केबिन सहित अन्य स्टेशन शामिल हैं। परियोजना का 111 किलोमीटर हिस्सा भोपाल मंडल और 165 किलोमीटर हिस्सा कोटा मंडल के अधीन है।
भोपाल मंडल में कितना काम पूरा हुआ
भोपाल मंडल में निशातपुरा डी केबिन से कुरावर तक कुल 56 किलोमीटर रेलखंड का कार्य सीआरएस निरीक्षण के साथ पूरा हो गया है। शेष कार्य सोनकच्छ-नरसिंहगढ़ और ब्यावरा-सोनकच्छ सेक्शन में वित्तीय वर्ष 2026-27 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस परियोजना के लिए भोपाल मंडल में 111 किलोमीटर रेललाइन और 12 स्टेशनों के निर्माण के लिए 1,255 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है।
क्या होगा फायदा
इस परियोजना में मध्य प्रदेश और राजस्थान राज्य शामिल हैं एवं पांच जिले- भोपाल, सीहोर, राजगढ़, झालावाड़ और कोटा इससे जुड़े हुए हैं। यह लाइन माल और यात्री परिवहन दोनों के लिए महत्वपूर्ण होगी, जिससे रेल कनेक्टिविटी बेहतर होगी और यात्रा समय में तीन घंटे की बचत होगी। ब्यावरा-झालावाड़ मार्ग के बजाय यह नया मार्ग 42 किमी छोटा होगा, जिससे ईंधन और समय की बचत होगी।
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