जल संकट और घटते प्रवाह की मार झेल रही गंभीर नदी को अब नया जीवन मिलने की उम्मीद जगी है। जिला प्रशासन ने गंभीर नदी के पुनर्जीवन का बड़ा अभियान शुरू किया …और पढ़ें

HighLights
- दोनों पहाडियों पर लगेंगे 60 हजार पेडऔर बनेंगे सीसीटी, ताकि बारिश की हर बूंद को सहेजा जा सके
- भमती पहाड़ी पर 40 हजार पौधे लगाए जाएंगे और प्रत्येक पौधे के आसपास सीसीटी तैयार किए जाएंगे
- कोरभान पहाड़ी पर 20 हजार पौधारोपण के साथ उतनी ही संख्या में जल संरक्षण संरचनाएं बनाई जाएंगी
प्रेम जाट, नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदाैर। जल संकट और घटते प्रवाह की मार झेल रही गंभीर नदी को अब नया जीवन मिलने की उम्मीद जगी है। मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद जिला प्रशासन ने गंभीर नदी के पुनर्जीवन का बड़ा अभियान शुरू किया है। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत गंभीर नदी के मुख्य जल स्रोत मानी जाने वाली भमती और कोरभान पहाड़ियों पर करीब 60 हजार पौधे लगाए जाएंगे और इतने ही सतत कंटूर ट्रेंच (सीसीटी) बनाए जाएंगे, ताकि बारिश का पानी बहकर व्यर्थ न जाए, बल्कि जमीन में समाहित होकर नदी को फिर से जीवन दे सके।
प्रशासन की यह पहल केवल नदी बचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे जलागम क्षेत्र की तस्वीर बदलने की तैयारी है। भमती पहाड़ी पर 40 हजार पौधे लगाए जाएंगे और प्रत्येक पौधे के आसपास सीसीटी तैयार किए जाएंगे, जिससे पानी लंबे समय तक संरक्षित रह सके। वहीं कोरभान पहाड़ी पर 20 हजार पौधारोपण के साथ उतनी ही संख्या में जल संरक्षण संरचनाएं बनाई जाएंगी।
प्रशासनिक अधिकारियों ने भमती और कोरभान पहाड़ी क्षेत्रों का सीमांकन कर जमीनी निरीक्षण किया था।वहीं जलागम क्षेत्र में किए जाने वाले मृदा एवं जल संरक्षण कार्यों का अवलोकन किया गया।महू तहसीलदार विवेक सोनी का कहना है कि पहाड़ियों पर बनाए जाने वाले सीसीटी वर्षा जल को रोकने में अहम भूमिका निभाएंगे। इससे पानी धीरे-धीरे जमीन में समाएगा, भू-जल स्तर सुधरेगा और गंभीर नदी के प्राकृतिक प्रवाह को मजबूती मिलेगी।गौरतलब है कि गंभीर नदी जानापावा से निकलती है और उज्जैन में शिप्रा नदी में मिलती है।बीते दिनों कलेक्टर शिवम वर्मा द्वारा भी गंभीर नदी पुनर्जीवन कार्यो का निरीक्षण किया गया था।
भमती से निकली है चंद्रभागा नदी
विशेषज्ञों का कहना है कि भमती पहाडी गंभीर नदी के लिए प्राकृतिक जल स्रोत का काम करती हैं। यहां से चंदभागा नदी निकली है, जो गंभीर की सहायक नदी है। ऐसे में पहाडी पर किया जा रहा संरक्षण कार्य नदी पुनर्जीवन में सहायक होगा। बारिश का पानी पहाड़ी से तेजी से बहने के बजाय छोटे-छोटे ट्रेंच में रुकेगा, जिससे मिट्टी का कटाव भी कम होगा और क्षेत्र की हरियाली बढ़ेगी। वही पहाडी पर लगाए जाने वाले पौधों की जडों से भूमिगत जल स्तर भी बढेगा।
रीछा पहाडी को छोड़ा
बीते दिनों सीमांकन करने पहुंची प्रशासन की टीम ने भमती नदी का सीमांकन किया था, इसमें पहाडी पर किसी तरह का अतिक्रमण नहीं मिला।इसके साथ ही रीछा पहाडी पर भी सीसीटी और पौधा रोपण की योजना थी, लेकिन यह रिकार्ड में निजी भूमि में दर्ज है। इसलिए अब इस पहाडी पर सीसीटी नहीं बनाए जाएंगे।प्रशासन भमती अौर कोरभान पहाडी पर ही काम करेगा।
निजी एनजीओं से किया अनुबंध
दोनों पहाडियों पर 60 हजार पौधे लगाए जाना है। इसके लिए जनपद पंचायत महू द्वारा एनजीओ के साथ एमओयू किया गया है। एनजीओं द्वारा वर्षाकाल में दोनों पहाड़ियों पर पौधा रोपण किया जाएगा।वहीं इन पहाड़ियों पर सीसीटी का निर्माण भी होगा। यदि योजना सफल रही तो न केवल नदी में पानी की उपलब्धता बढ़ेगी, बल्कि आसपास के क्षेत्रों के भू-जल स्तर में भी सुधार देखने को मिलेगा।
कारम नदी पर करीब 100 वर्ष पुराने पुल पर हादसे की आशंका, पिलर में नदी के कटाव से 20 फीट गहरा गड्ढा
Source link
#इदर #भमत #और #करभन #पहडय #दग #गभर #नद #क #नय #जवन #लगग #पड #और #बनग #ससट #सहजग #हर #बद


