अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते में किन बिंदुओं का ज़िक्र है

अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते में किन बिंदुओं का ज़िक्र है

डोनाल्ड ट्रंप

इमेज स्रोत, Reuters

इमेज कैप्शन, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि रविवार को समझौते पर हस्ताक्षर किए जाएंगे, हालांकि ईरान ने सावधानी बरतने की बात कही है

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने कहा है कि अमेरिका के साथ लड़ाई खत्म करने का समझौता होने वाला है. अमेरिकी राष्ट्रपति ने भी कहा है कि रविवार को समझौते पर हस्ताक्षर होंगे.

सैयद अब्बास अराग़ची ने यह भी कहा कि इस समझौते में लेबनान में इसराइल और हिज़्बुल्लाह के बीच चल रहे संघर्ष को ख़त्म करने की बात भी शामिल है.

अराग़ची ने बताया कि समझौते में होर्मुज़ स्ट्रेट को फिर से खोलना और ईरान पर लगी अमेरिकी नाकेबंदी को हटाना शामिल है. हालांकि, उन्होंने कहा कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत बाद में शुरू होगी.

अमेरिकी अधिकारियों ने समझौते की कुछ जानकारियों की पुष्टि करते हुए कहा है कि ईरान को मिलने वाले आर्थिक फ़ायदे इस बात पर निर्भर करेंगे कि वह अपनी ज़िम्मेदारियों को पूरा करता है या नहीं.

अमेरिका की पिछली रिपोर्टों से पता चला है कि शायद इस समझौते में लेबनान को शामिल नहीं किया जाए, जबकि ईरान ने कथित तौर पर इस बात पर ज़ोर दिया है.

इसी साल 28 फ़रवरी को ईरान पर अमेरिका और इसराइल ने हमला शुरू किया था, जिसके जवाब में ईरान ने इसराइल और खाड़ी में अमेरिका के सहयोगी देशों पर हमला किया.

इसके साथ ही ईरान ने होर्मुज़ स्ट्रेट को भी बंद कर दिया, जो दुनिया भर में तेल और गैस की सप्लाई का एक अहम समुद्री रास्ता है.

अप्रैल में अमेरिका और ईरान के बीच सीज़फ़ायर होने के बावजूद भी अमेरिका और ईरान के बीच रुक-रुक कर गोलीबारी हुई है, जिसमें इस हफ़्ते दो बार हमले और जवाबी हमले भी शामिल हैं.

समझौते की उम्मीद

एफ़-35 लाइटनिंग-2

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, ट्रंप ने पिछले दिनों कहा था कि अमेरिका ईरान पर सख़्त हमला करेगा लेकिन इसके बाद ही उन्होंने हमला रोकते हुए समझौते पर सहमति बनने का दावा किया

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को ट्रुथ सोशल पर दावा किया कि रविवार को दोनों पक्षों में हस्ताक्षर होंगे, जबकि ईरान ने कहा है कि हस्ताक्षर का अभी कोई सटीक समय तय नहीं हुआ है.

इससे पहले गुरुवार को ट्रंप ने समझौते का संकेत दिया था और कहा था, “बातचीत में शामिल लोगों ने अभी-अभी एक बड़ा समझौता किया है. एक ऐसी डील जिस पर जल्द ही साइन होने की उम्मीद है.”

उन्होंने इसके बाद ईरान के ख़िलाफ़ पहले से ‘तय हमले’ रद्द करने की घोषणा की थी.

शुक्रवार को, ईरानी मीडिया ने कथित 14-पॉइंट डील के कुछ विवरण सार्वजनिक किए थे.

हालाँकि ट्रंप ने कहा कि इसका “उन शर्तों से कोई लेना-देना नहीं है जिन पर सहमति बनी है और सच्चाई से इसका कोई लेना-देना नहीं है.”

कुछ घंटों बाद, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच मेमोरेंडम ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग (एमओयू) पर सहमति हो गई है.

शनिवार को, शरीफ़ ने एक्स पर लिखा कि उनका देश “शांति समझौते पर इलेक्ट्रॉनिक साइनिंग की तैयारी कर रहा है, जिसके बाद अगले हफ़्ते तकनीकी मुद्दों पर बातचीत होगी.”

ईरान की सरकारी मीडिया में अरागची के हवाले से कहा गया है कि देश की शीर्ष सुरक्षा संस्था, ‘सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल’ में समझौते की नई शर्तों को लेकर ‘समर्थन और विरोध’ दोनों हैं.

अराग़ची ने कहा, “फ़िलहाल हमें इंतज़ार करना होगा. अगर मंज़ूरी मिलती है, तो समझौते पर दूर से (इलेक्ट्रॉनिक) ही हस्ताक्षर किए जाएंगे.”

हालांकि ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बक़ाई ने कहा कि अमेरिका के साथ समझौते पर हस्ताक्षर करने का समय अभी तक निर्धारित नहीं किया गया है, लेकिन आने वाले दिनों में इसकी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है.

उधर, इसराइल उन बातचीत में शामिल नहीं है जिनका मक़सद युद्धविराम को बढ़ाना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम समेत अहम मुद्दों पर बातचीत शुरू करना है.

पश्चिमी देश दशकों से ईरान पर परमाणु हथियार बनाने की कोशिश करने का आरोप लगाते रहे हैं.

ईरान ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा है कि उसका कार्यक्रम बिजली पैदा करने और शोध जैसे शांतिपूर्ण मक़सद के लिए है.

होर्मुज़ स्ट्रेट पर क्या सहमति बनी

होर्मुज़ स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण शिपिंग मार्गों में से एक है

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, होर्मुज़ स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण शिपिंग मार्गों में से एक है

ईरानी विदेश मंत्री ने इस बात पर ज़ोर दिया है कि एमओयू में बताई गई पहली बात ईरान पर लगे अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को हटाना था.

अराग़ची ने कहा कि होर्मुज़ स्ट्रेट का प्रशासन ‘पहले जैसा नहीं रहेगा.’

इस समुद्री रास्ते को बंद करने के बाद से, ईरान ने वहाँ से गुज़रने वाले जहाज़ों से फ़ीस लेने पर ज़ोर दिया है, जबकि अमेरिका का कहना है कि सभी जहाज़ों की आवाजाही स्वतंत्र होनी चाहिए.

शुक्रवार दोपहर पत्रकारों के साथ एक विस्तृत ब्रीफ़िंग में, अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि इस समझौते के तहत ईरान की शिपिंग पर लगी अमेरिकी नाकेबंदी हटाने के बदले होर्मुज़ स्ट्रेट को फिर से खोल दिया जाएगा.

अधिकारियों के अनुसार, ये कदम लगभग तुरंत लागू हो जाएंगे. इसके बाद 60 दिनों तक बातचीत चलेगी, जिसमें ईरान के संवर्धित यूरेनियम के मुद्दे पर फ़ोकस किया जाएगा. यह परमाणु बम बनाने के लिए एक ज़रूरी चीज़ है.

अधिकारियों ने कहा कि इसके तहत सारा मटीरियल वहीं नष्ट कर दिया जाएगा और फिर देश से हटा दिया जाएगा, हालांकि इसके लिए क्या तरीक़ा अपनाया जाएगा इसे तय किया जाना बाक़ी है.

अधिकारियों ने ज़ोर देकर कहा कि ईरान को कोई राशि पहले नहीं दी जाएगी. यह ईरान की उन पिछली ख़बरों को स्पष्ट तौर पर खारिज़ करता है जिनमें कहा गया था कि ठोस बातचीत शुरू होने से पहले ईरान की कुछ फ़्रीज़ संपत्तियों को मुक्त कर दिया जाएगा.

अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि ईरान को वैश्विक अर्थव्यवस्था में धीरे-धीरे शामिल किया जाएगा. इसमें प्रतिबंध हटाना और फ्रीज़ की गई संपत्ति को धीरे-धीरे बहाल करना जैसे कदम शामिल होंगे.

इस बीच हाल ही में रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि यूएई ने ईरान को तीन डॉलर की धनराशि उपलब्ध कराई है, हालांकि यह राशि अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण फ़्रीज़ संपत्ति से जुड़ी है या किसी अन्य स्रोत से है, इसकी पुष्टि नहीं की है.

एमओयू में हिज़्बुल्लाह को लेकर क्या कहा गया है

हिज़्बुल्लाह

इमेज स्रोत, EPA

इमेज कैप्शन, अमेरिका का अनुमान है कि हर साल ईरान से हिज़्बुल्लाह को लाखों डॉलर की धनराशि मिलती है

इस समझौते में ईरान से कहा गया है कि वह इलाक़े में प्रॉक्सी ग्रुप्स जैसे; हिज़्बुल्लाह और मिडिल ईस्ट में ईरान के दूसरे प्रॉक्सी को फ़ंडिंग देना बंद करे.

अमेरिकी अधिकारियों ने ज़ोर देकर कहा कि यह एमओयू भरोसे या वादों पर नहीं, बल्कि “पुख़्ता तौर पर लागू करने” पर आधारित है.

उनका कहना है कि ईरान को आर्थिक फ़ायदे तभी मिलेंगे जब यह पक्का हो जाएगा कि उसने उन उपायों को लागू किया है जिनका उसने वादा किया.

हालाँकि बातचीत में शामिल सभी पक्षों अमेरिका, ईरान, पाकिस्तान और क़तर की तरफ़ से सावधानी के साथ उम्मीद जताई जा रही है, फिर भी मंज़िल तक पहुँचना अभी बाक़ी है.

पिछले एक-दो महीनों में कई बार इस समझौते के होने की उम्मीद जगी, लेकिन बाद में बात बिगड़ गई.

अमेरिकी प्रशासन के मुताबिक़, अब अंतर यह है कि इसकी उम्मीद ज़्यादा है और समझौते की मुख्य बातों को लेकर ज़्यादा खुलापन है.

वहीं, ईरान के विदेश मंत्री ने कहा कि “जैसे ही हमारी बातचीत का आख़िरी दौर पूरा हो जाएगा, इस समझौते पर दस्तख़त किए जाएंगे और इसकी घोषणा की जाएगी.”

अराग़ची ने सरकारी टीवी से कहा, “ऐसा आने वाले दिनों में हो सकता है. मुझे काफ़ी उम्मीद है.”

14 सूत्रीय मसौदे की प्रमुख बातें

ईरानी प्रतिनिधिमंडल

इमेज स्रोत, Reuters

इमेज कैप्शन, ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए के अनुसार, परमाणु मुद्दे को अगले चरण की वार्ता के लिए स्थगित किया गया है

बीबीसी मॉनिटरिंग के मुताबिक़, ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी मेहर ने वार्ता टीम के करीबी सूत्रों का हवाला देते हुए 14 सूत्रीय मसौदा समझौता ज्ञापन का विवरण प्रकाशित किया है.

इस सूची में लेबनान सहित सभी मोर्चों पर युद्ध की समाप्ति, ‘ईरानी व्यवस्थाओं’ के साथ 30 दिनों के भीतर होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलना, फ़्रीज़ हुए ईरानी फ़ंड को जारी करना और 60 दिनों के भीतर परमाणु मुद्दों, प्रतिबंधों और युद्ध के बाद मुआवज़े या पुनर्निर्माण को लेकर सीमित वार्ता शामिल थी.

आईआरएनए द्वारा जारी किए गए विवरण में समझौते को दो चरणों वाली व्यवस्था के रूप बताया गया है.

पहला, सभी मोर्चों पर युद्ध समाप्त करना, और दूसरा, 60 दिनों तक चली वार्ता में परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों में राहत और युद्ध में हुए नुकसान के मुआवज़े पर ध्यान केंद्रित करना.

रिपोर्ट में कहा गया है कि तेहरान प्रारंभिक समझौता ज्ञापन में परमाणु मामलों पर कोई प्रतिबद्धता नहीं जताएगा और अगर इस पर हस्ताक्षर हो जाते हैं, तो ईरान के शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम में कोई बदलाव नहीं होगा.

आईआरएनए के अनुसार, कोई भी आगामी वार्ता ईरान द्वारा निर्धारित “बुनियादी सिद्धांतों” के तहत होगी, जिसमें यूरेनियम संवर्धन का अधिकार और इस्लामिक गणराज्य की संवर्धित सामग्री को अपने पास रखने का अधिकार शामिल है.

हालांकि आईआरएनए का यह रुख़ इसराइल के रुख़ से उलट होता है.

इसराइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू के कार्यालय का कहना है कि इसराइल ईरान के साथ किसी भी समझौता ज्ञापन का पक्षकार नहीं है.

इसराइली पीएमओ के अनुसार, इसराइल चाहता है कि किसी भी अंतिम समझौते में संवर्द्धित यूरेनियम सामग्री को हटाना, संवर्द्धन केंद्रों को नष्ट करना, मिसाइल उत्पादन पर प्रतिबंध लगाना और क्षेत्र में हथियारबंद समूहों के लिए ईरानी समर्थन को समाप्त करना शामिल होना चाहिए.

इसराइल के रुख़ से लगता है कि प्रस्तावित समझौता मसौदा राजनीतिक और व्यवहारिक रूप से कमज़ोर है. जबकि ट्रंप इसे अंतिम समझौते के रूप में पेश कर रहे हैं.

ओलिविया आयरलैंड और व्हाइट हाउस संवाददाता बर्न्ड डेबुस्मान की अतिरिक्त रिपोर्टिंग

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

Source link
#अमरक #और #ईरन #क #बच #सभवत #समझत #म #कन #बदओ #क #जकर #ह

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *