इंदौर का 72 साल पुराना शास्त्री ब्रिज टूटेगा, 139 करोड़ की लागत से बनेगा नया शानदार 6-लेन ओवरब्रिज

इंदौर का 72 साल पुराना शास्त्री ब्रिज टूटेगा, 139 करोड़ की लागत से बनेगा नया शानदार 6-लेन ओवरब्रिज

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। इंदौर रेलवे स्टेशन के विस्तार, यार्ड का नवीनीकरण और ट्रेनों की गति बढ़ाने में बाधा बन रहे 72 वर्ष पुराने शास्त्री ब्रिज की जगह नया रेलवे ओवरब्रिज बनाया जाएगा। इस रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण 139 करोड़ रुपये की लागत से होगा, इसके लिए रेल मंत्रालय ने स्वीकृति दी है। रेल अधिकारियों के मुताबिक नया ब्रिज छह लेन का होगा। वर्तमान ब्रिज 12 मीटर चौड़ा है, नया ब्रिज 16 मीटर चौड़ा होगा।

नए ब्रिज की चौड़ाई वर्तमान के मुकाबले डेढ़ गुना होगी और ऊंचाई 7.2 मीटर (संशोधित मानक अनुसार) ज्यादा होगी। नए ब्रिज पर सिर्फ वाहन ही चलेंगे और फुटपाथ नहीं होगा। पैदल चलने वालों के लिए ब्रिज के समानांतर फुट ओवरब्रिज का निर्माण किया जाएगा।

ब्रिज निर्माण का खर्च कुल रेलवे वहन करेगा, लेकिन सीवेज, पानी की लाइन, बिजली के पोल शिफ्ट करने का कार्य नगर निगम अपने खर्च पर करेगा। नया ब्रिज संभागायुक्त कार्यालय के पास से शुरू होकर खादीवाला पेट्रोल पंप के पास समाप्त होगा।

सांसद शंकर लालवानी के अनुसार रेल मंत्रालय ने नए रेलवे ओवरब्रिज बनाने की स्वीकृति दे दी है। वर्तमान ब्रिज से डेढ़ गुना और ज्यादा ऊंचा बनाया जाएगा। अब जल्द एजेंसी तय करने के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू होगी।

नए ब्रिज से फायदा

24 से 26 कोच की ट्रेनों का संचालन हो सकेगा। ब्रिज के नीचे बना हुआ कर्व समाप्त हो जाएगा। मालगाड़ियां सभी प्लेटफार्म से गुजर पाएंगी। ट्रेनों की आवृत्ति बढ़ेगी। छह में से दो पिटलाइन हटेंगी और यार्ड नए सिरे से बनेगा।

प्लेटफार्म पांच और छह तक पहुंच आसान होगी। वर्तमान में प्लेटफार्म पांच और छह पर जाने के लिए अभी 1.2 मीटर चौड़े कॉरिडोर से होकर गुजरना पड़ता है। थ्रू लेन से स्टेशन की क्षमता बढ़ेगी।

सिंहस्थ तक बन नहीं पाएगा ब्रिज, जनता होगी परेशान

वर्तमान शास्त्री ब्रिज का लोकार्पण 12 जनवरी 1953 को हुआ था। तत्कालीन परिवहन मंत्री लालबहादुर शास्त्री ने लोकार्पित किया था। ब्रिज से शहर के लगभग सभी मुख्य बाजार सीधे-सीधे जुड़े हैं। शास्त्री ब्रिज के टूटने से आवागमन में भारी परेशानी आएगी।

रेलवे के अधिकारियों के मुताबिक प्रस्तावित ब्रिज के लिए सर्वे, डिजाइन और ड्राइंग तैयार कर टेंडर होने में कम से कम छह माह का समय लगेगा। टेंडर तय होने के बाद रेलवे ने ब्रिज को 15 माह में तैयार करने का लक्ष्य रखा है। इस हिसाब से देखें तो ब्रिज सिंहस्थ से पहले तैयार होता नजर नहीं आ रहा।

नए ब्रिज में रेलवे वाले हिस्से में कोई पिलर नहीं होगा। यही वजह है कि ब्रिज की चौड़ाई बढ़ाई जा रही है। एक पिलर से दूसरे पिलर के बीच करीब 60 मीटर की दूरी होगी।

रेलवे स्टेशन पर बढ़ेगा ट्रेनों का आवागमन

“इंदौर रेलवे स्टेशन के विस्तार के लिए शास्त्री ब्रिज को तोड़कर नया बनाया जाएगा। यार्ड का नवीनीकरण बहुत जरूरी है। आगामी वर्षों में ट्रेनों की आवाजाही बढ़ेगी, क्योंकि इंदौर-धार-दाहोद, इंदौर-बुधनी, इंदौर-मनमाड़ और इंदौर-खंडवा से भी ट्रेनों का आवागमन होगा।” – अश्विनी कुमार, डीआरएम, रतलाम मंडल

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