रक्षा क्षेत्र में देश को ‘आत्म निर्भर‘ बनाने में इंदौर, भोपाल सहित देश के दर्जनों शहर अपना योगदान देंगे। रक्षा मंत्रालय द्वारा ‘आत्म निर्भर‘ अभियान का …और पढ़ें

HighLights
- सैन्य उत्पादन में एमएसएई, युवा उद्यमियों की भागीदारी भी होगी सुनिश्चित
- रक्षा क्षेत्र में उद्यमिता के लिए किए जाने वाले कार्य, आइडिया व फीडबैक ले रहे हैं
- इंदौर में रक्षा मंत्रालय की इस संबंध में कार्यशाला हो चुकी है
उदय प्रताप सिंह, इंदौर। रक्षा क्षेत्र में देश को ‘आत्म निर्भर‘ बनाने में इंदौर, भोपाल सहित देश के दर्जनों शहर अपना योगदान देंगे। रक्षा मंत्रालय द्वारा ‘आत्म निर्भर‘ अभियान कार्यक्रम शुरू किया गया है। इस कार्यक्रम के तहत रक्षा मंत्रालय के अधिकारी देश के अलग-अलग शहरों में एमएसएमई उद्यमी, आइटी व एआई एक्सपर्ट सहित युवाओं के बीच पहुंच रहे हैं और रक्षा क्षेत्र में उद्यमिता के लिए किए जाने वाले कार्य, आइडिया व फीडबैक ले रहे हैं।
इंदौर में रक्षा मंत्रालय की इस संबंध में कार्यशाला हो चुकी है। अब 19 जून को भोपाल में और उसके बाद ग्वालियर व जबलपुर में कार्यशाला होगी। इन कार्यशालों में मिलने वाले सुक्षाओं के सैन्य अधिकारी रक्षा मंत्री को सौंपेगे। इसके आधार पर देश के अलग-अलग शहरों में रक्षा विभाग के अन्य उपक्रमों में युवा व उद्यमियों की उपयोगिता सुनश्चित की जाएगी।
देश में बनाए गए सात क्लस्टर
रक्षा मंत्रालय देश के प्रमुख शहरों को बांटकर सात क्लस्टर बनाकर सुझाव ले रहा है। इसमें से एक क्लस्टर में महाराष्ट्र, मप्र, गोवा व पुंडुचेरी है।। इसमें क्षेत्रफल के अनुसार बड़े राज्य महाराष्ट्र को लीड स्टेट व मप्र को को -लीड स्टेट चुना गया है। इसी तरह देश के अन्य राज्यों के भी क्लस्टर बनाए गए है। गोवा व पुंडुचेरी को भागीदार राज्य के रुप में शामिल किया गया है। इसी तरह देश के अन्य राज्यों के भी क्लस्टर बनाए गए है। इनमें नार्थ ईस्ट के राज्यों का भी एक समूह बनाया गया है।
20 व 21 अगस्त को रक्षा मंत्री को सौंपी जाएगी थीमेटिक रिपोर्ट
डिफेंस आत्मनिर्भरता प्रोजेक्ट के तहत प्रथम चरण में कंसेप्ट नोट तैयार किया गया। इसमें तय किया गया कि देश को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए राज्यों के युवा व उद्यमियों को किस तरह सहयोग लिया जाएगा। इसके बाद दूसरे चरण में सभी राज्यों के अधिकारी व जनप्रतिनिधों के साथ इस मुद्दे पर चर्चा की गई। अब तीसरे चरण के तहत तय सात समूह के चयनित राज्यों में उद्यमियों से चर्चा की जा रही है। पूरी चर्चा के पश्चात 20 व 21 अगस्त को सातों क्लस्टर में शामिल राज्य व केंद्रशासित प्रदेशों से मिले सुझावों की थीमेटिक रिपोर्ट को सैन्य अधिकारी रक्षा मंत्री को सौंपेंगे। -अनिल कुमार राय, डिप्टी डायरेक्टर जनरल, डिपार्टमेंट आफ डिफेंस प्रोडक्शन
मप्र की यह है सैन्य ताकत
जबलपुर में चार ऑर्डिनेंस फैक्ट्री: यहां सेना के उपयोग के लिए बम व गोला बारूद व बम सेल का निर्माण किया जाता है।इसके अलावा सैन्य उपयोग के लिए वाहन व और सेना बंदूक भी तैयार की जाती है।
इंदौर में सैन्य प्रशक्षिण : महू में सेना के साइबर सुरक्षा, एआई व अन्य तकनीक पर काम होगा। इसके अलावा यहां सैन्य अधिकारियों के साथ मित्र विदेशी देशों के अधिकारियों को तकनीकी प्रशिक्षण की व्यवस्था है। यहां पर आर्मी वार कालेज, इंफेंट्री स्कूल और मिलिट्री कालेज आफ टेली कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग प्रशिक्षण संस्थान है।
भोपाल में सैन्य वाहन होंगे तैयार : भारत अर्थ मूवर लिमिटेड कंपनी ने काम शुरु किया। यह सेना की ही एक ईकाई है। यह सेना के लिए वाहन तैयार करने के अलावा रेल कोच व मेट्रो जैसे निर्माण कार्य भारत में करेगी।
ग्वालियर में एयरबेस व डीआरडीओ लैब : महारजपुरा वायुसेना एयर बेस है। मोरार केंटोमेंट क्षेत्र बना है। यहां पर डीआरडीओ लैब है, यहां पर केमिकल व जैविक हथियारों पर शोध होता है।
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