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भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपनी नई प्रदेश कार्यसमिति का ऐलान कर दिया है। इस नई कार्यकारिणी में खंडवा जिले से कैबिनेट मंत्री विजय शाह और पूर्व विधायक देवेंद्र वर्मा को बतौर प्रदेश कार्यसमिति सदस्य शामिल किया गया है। संगठन में इन दोनों बड़े नेताओं को अहम जिम्मेदारी मिलने के बाद मंत्री विजय शाह के समर्थकों में खुशी की लहर है। वहीं, विधानसभा चुनाव में टिकट कटने के बाद से हाशिए पर चल रहे पूर्व विधायक देवेंद्र वर्मा के समर्थक भी इस फैसले से दोबारा सक्रिय हो गए हैं। चार बार के विधायक रहे देवेंद्र वर्मा का 2023 के विधानसभा चुनाव में टिकट कट गया था। इसके बाद उन्होंने स्थानीय चुनावी कार्यक्रमों से दूरी बना ली थी। वे खंडवा छोड़कर विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर की सीट दिमनी (मुरैना) चले गए और पूरे चुनाव के दौरान वहीं प्रचार किया। इसके बाद वे घर बैठ गए और सक्रिय राजनीति से किनारा कर लिया था। हालांकि, इसी साल वे महापौर गुट के करीब आए और पार्टी के कार्यक्रमों में दोबारा शामिल होने लगे थे। अब प्रदेश कार्यसमिति में जगह मिलने से उनके राजनीतिक सफर को एक नया ‘बूस्टर डोज’ मिल गया है। सांसद, विधायक और मंत्री से रहा है वर्मा का गतिरोध
खंडवा सांसद स्व. नंदकुमार सिंह चौहान के निधन के बाद निमाड़ में ‘नंदू भैया गुट’ से देवेंद्र वर्मा इकलौते सीनियर नेता बचे थे। 2023 में 5वीं बार विधायक बनने पर उनका कैबिनेट मंत्री बनना तय माना जा रहा था, लेकिन उनका टिकट काटकर तत्कालीन जिला पंचायत अध्यक्ष कंचन तनवे को दे दिया गया। टिकट कटने के पीछे कैबिनेट मंत्री विजय शाह की साजिश बताई गई थी, जिसके बाद से वर्मा उनके धुर विरोधी हो गए थे। विधायक कंचन तनवे के साथ भी उनका जिला पंचायत चुनाव के समय से ही गतिरोध चल रहा था, जबकि महापौर अमृता यादव से उनकी पहले से ही पटरी नहीं बैठती थी। आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर देवेंद्र वर्मा ने खंडवा सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल के खिलाफ भी बगावत कर दी थी। उन्होंने टिकट कटने वाले अन्य पूर्व विधायकों को लामबंद कर लिया था, लेकिन बाद में संगठन स्तर पर समझाइश के बाद मामला सुलझा लिया गया। विवादों के बाद भी बरकरार रहा मंत्री विजय शाह का कद
दूसरी ओर, कैबिनेट मंत्री विजय शाह को भी प्रदेश कार्यसमिति का सदस्य बनाया गया है। हाल ही में हुए ‘कर्नल सोफिया कुरैशी विवाद’ के बाद उनके राजनीतिक करियर और पद पर खतरे को लेकर कई तरह की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया था। इन अटकलों के बावजूद मंत्री शाह के चेहरे पर कोई शिकन नहीं दिखी और वे पूरे आत्मविश्वास के साथ कहते रहे कि ‘टाइगर अभी जिंदा है’। अब प्रदेश संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलने के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि उन पर मंडरा रहा खतरा टल गया है। इस फैसले के बाद उनके समर्थकों में खासा उत्साह देखा जा रहा है।
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