उषा वेंस ने पति जेडी वेंस के सामने ख़ुद के हिन्दू होने पर क्या कहा जिस पर छिड़ी बहस

उषा वेंस ने पति जेडी वेंस के सामने ख़ुद के हिन्दू होने पर क्या कहा जिस पर छिड़ी बहस

उषा वेंस

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इमेज कैप्शन, उषा वेंस जेडी वेंस के चौथे बच्चे की माँ बनने वाली हैं

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अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की तमन्ना रही है कि उनकी हिन्दू पत्नी उषा वेंस भी कैथोलिक ईसाई बन जाएं.

जेडी वेंस ख़ुद 2019 में कैथोलिक ईसाई बने थे. कैथोलिक बनने से पहले जेडी नास्तिक थे. यानी जेडी जब नास्तिक थे, तभी उषा से उनकी शादी हुई थी.

जेडी वेंस के पिछले साल दिए गए एक बयान के बाद काफ़ी विवाद खड़ा हो गया था. उन्होंने इच्छा जताई थी कि उनकी पत्नी उषा एक दिन उनके आध्यात्मिक मार्ग का अनुसरण करेंगी. जेडी वेंस की इस इच्छा पर भारत में भी सोशल मीडिया पर काफ़ी बहस हुई थी.

उषा अभी जेडी वेंस के चौथे बच्चे की माँ बनने वाली हैं. इसी महीने 14 जून को उषा ने सीबीएस न्यूज़ के रॉबर्ट कोस्टा को दिए इंटरव्यू में कहा कि उन्हें कभी धर्म परिवर्तन करने की ज़रूरत महसूस नहीं हुई.

उषा जब ये बातें कह रही थीं तो साथ में उनके पति जेडी वेंस भी थे.

उषा वेंस ने इस इंटरव्यू में कहा था, “मैं एक हिंदू परिवार में पली-बढ़ी हूँ, जो बहुत स्थिर और ख़ुशहाल था. मुझे कभी ऐसा महसूस नहीं हुआ कि कुछ अलग तलाशने की ज़रूरत है, जैसा कि मेरे पति को महसूस हुआ.”

उषा ने इंटरव्यू में जेडी से कहा, “तुम्हारे लिए थेरेपी काम नहीं आई, चर्च काम आया.”

जेडी वेंस

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इमेज कैप्शन, पिछले साल अप्रैल में जेडी वेंस अपनी पत्नी और तीनों बच्चों के साथ भारत आए थे

‘उपराष्ट्रपति या चौथे बच्चे के पिता’

जेडी वेंस ने पिछले हफ़्ते ही कहा था, ”मैं अक्सर मज़ाक में कहता हूँ कि मेरी ज़िंदगी में दो बेहद महत्वपूर्ण लोग हैं. एक भारतीय और एक पाकिस्तानी. भारतीय मेरी पत्नी हैं और पाकिस्तानी फ़ील्ड मार्शल मुनीर हैं.”

हालांकि तथ्यात्मक रूप से ये सही नहीं है कि उषा भारतीय हैं. उषा अमेरिकी नागरिक हैं और वहीं पली बढ़ी हैं. हालांकि इससे पहले भी जेडी वेंस ने अपनी पत्नी को लेकर जो कुछ कहा, उसे असहज करने के रूप में देखा गया.

अपनी नई आत्मकथा में उन्होंने उषा से मिलने से पहले मैरी नाम की एक महिला के साथ अपने गंभीर प्रेम संबंध का ज़िक्र किया है.

फिर मार्च में मिशिगन में एक कार्यक्रम के दौरान उनकी यह टिप्पणी भी चर्चा में रही. जेडी वेंस ने कहा था, “उषा इस समय चौथे बच्चे के साथ 22 हफ़्ते की गर्भवती हैं. जब हमने उपराष्ट्रपति पद की दौड़ में उतरने का फ़ैसला किया, तो उन्होंने कहा कि तुम या तो उपराष्ट्रपति बन सकते हो या चौथे बच्चे के पिता. लेकिन देवियों और सज्जनों, मैं मनाने में सफल रहा, इसलिए मैंने दोनों हासिल कर लिए.”

तब उषा दर्शकों के बीच बैठी थीं.

उषा वेंस अपने हिंदू संस्कारों और परवरिश को हमेशा गर्व के साथ स्वीकार करती रही हैं. सीबीएस को दिए इंटरव्यू में उषा ने जिस साफ़गोई से अपनी बात रखी है, उसे पति-पत्नी के बीच मतभेद के रूप में नहीं बल्कि उषा के आत्मविश्वास के तौर पर देखा जा रहा है.

उषा वेंस एक वकील हैं और कभी अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के चीफ़ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स के लिए क्लर्क रह चुकी हैं. उषा भारतीय प्रवासी की बेटी हैं और उनकी परवरिश दक्षिणी कैलिफोर्निया में हुई.

रॉबर्ट कोस्टा ने जब उनसे पूछा कि एक दंपती और परिवार के रूप में उनकी ज़िंदगी को लेकर लोगों के बीच कौन-सी ग़लतफ़हमियां हैं, तो उषा ने कहा, “मुझे लगता है कि एक समय लोगों ने इस बात को बहुत पकड़ लिया था कि जेडी मेरे धर्म परिवर्तन में रुचि रखते हैं. मुझे लगता है कि इसे मूल रूप से ग़लत समझा गया क्योंकि वह कैथोलिक हैं. उनकी आस्था का एक हिस्सा यह भी है कि वे अपनी आस्था को फैलाना चाहते हैं. लेकिन ऐसा नहीं है कि वह हर दिन मुझे धर्म परिवर्तन के लिए समझाते रहते हैं.”

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इमेज कैप्शन, उषा वेंस एक वकील हैं और कभी अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के चीफ़ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स के लिए क्लर्क रह चुकी हैं

उषा का आत्मविश्वास

अमेरिका के राजनीति विज्ञानी रिचर्ड हनानिया ने एक्स पर लिखा है, ”मुझे यह महिला बेहद पसंद है. जेडी वेंस सत्ता हासिल करने के लिए अपनी पहचान के हर पहलू को बदल सकते हैं. लेकिन वह उषा को नहीं बदल सकते.”

अमेरिका की प्रोफ़ेसर ऑड्रे ट्रूशके दक्षिण एशिया के इतिहास की विशेषज्ञता रखती हैं. भारत के मध्यकालीन इतिहास की वो विद्वान हैं. ऑड्रे ट्रूशके ने उषा की टिप्पणी को काफ़ी अहम बताया है.

ऑड्रे ट्रूशके ने एक्स पर लिखा है, ”यह ख़ासतौर पर धर्म के अध्ययन के विद्वानों के लिए एक दिलचस्प मामला है. अपने हिन्दू होने की पहचान को धार्मिक सिद्धांतों या अनुष्ठानों की बजाय ख़ुशहाल वैवाहिक माता-पिता से जोड़ना और साथ ही बच्चों को कैथोलिक परंपरा में पालने को लेकर कोई आपत्ति न होना, जबकि वह धर्म संरचनात्मक रूप से आपको बाहर रखता है, यह अपने आप में काफ़ी रोचक है.”

ऑड्रे ट्रूशके कहती हैं, ”जिन लोगों को संदर्भ चाहिए, उनके लिए सामान्य बात यह है कि धार्मिक अध्ययन के विद्वान अक्सर इस पर चर्चा करते हैं कि धर्म को आस्था, आचरण या दोनों के किसी संयोजन के आधार पर परिभाषित किया जाना चाहिए और अगर दोनों, तो किस अनुपात में.”

”उषा के मामले में यह स्पष्ट रूप से इनमें से किसी भी पारंपरिक ढांचे में आसानी से फिट नहीं बैठता. कैथोलिक धर्म में हिंदुओं को संरचनात्मक रूप से बाहर रखने वाली बात काफ़ी हद तक तथ्यात्मक है. ग़ैर-कैथोलिक लोग इस धर्म के प्रमुख अनुष्ठानों में भाग नहीं ले सकते, खासकर कम्युनियन में.”

ट्रूशके का बयान

जेडी वेंस की राजनीति में क्या उषा बाधा हैं?

ऑड्रे ट्रूशके कहती हैं, ”अंतिम विचार यह है कि उषा कई बार कह चुकी हैं कि उनके बच्चे किताबों, त्योहारों, यात्राओं आदि के ज़रिए हिंदू परंपराओं से परिचित होते हैं. लेकिन केवल इतना होना बच्चों को हिंदू परंपरा में पालना नहीं माना जाता. मेरे बच्चे भी किताबों, त्योहारों और यात्राओं के ज़रिए कई धार्मिक-सांस्कृतिक परंपराओं से परिचित होते हैं, लेकिन उससे उनकी धार्मिक पहचान स्वतः तय नहीं हो जाती.”

तो सवाल यह है, ”क्या हम ऐसे दौर में हैं, जहाँ अलग-अलग संस्कृतियां धीरे-धीरे ग़ैर-ईसाई धार्मिक पहचान की जगह ले रही हैं?”

अमेरिका की लौरा एलिजाबेथ लूमर धुर दक्षिणपंथी राजनीतिक कॉमेंटेंटर हैं. लौरा ने भी उषा की तारीफ़ करते हुए लिखा है कि यह बहुत ही मज़बूत बयान है.

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इमेज कैप्शन, विश्लेषक कहते हैं कि उषा अपने व्यक्तित्व को लेकर काफ़ी आत्मविश्वासी दिखती हैं

लौरा ने एक्स पर लिखा है, ”उषा वेंस का यह एक मज़बूत बयान है. उषा के ख़िलाफ़ टकर कार्लसन (पॉलिटिकल कमेंटेटर) के क़रीबी लोगों ने कई बार अपमानजनक टिप्पणियां कीं. टकर के समर्थकों को संतुष्ट करने के लिए उषा कैथोलिक बन जाएं, ये कहीं से भी तार्किक नहीं है.”

“टकर कार्लसन के समर्थक 2028 तक उषा को निशाना बनाने की कोशिश करेंगे, क्योंकि वह एक ब्राउन हिन्दू महिला हैं. ऐसा उनकी तमाम उपलब्धियों के बावजूद होगा.

“कार्लसन के समर्थक यह दिखाने की कोशिश करेंगे कि वह पर्याप्त रूप से अमेरिकी नहीं हैं. उनके पति जेडी चाहे कितनी भी सहनशीलता दिखाएं या कितनी भी नरमी बरतें, इससे ये लोग उनके पक्ष में वोट देने वाले नहीं हैं. क्योंकि अंदर से टकर के समर्थकों में नस्लीय श्रेष्ठता की सोच, ब्लैकमेल की राजनीति, यहूदी-विरोध और अमेरिका-विरोधी भावनाएं गहराई से मौजूद हैं.”

“मैं उम्मीद करती हूं कि उषा वेंस कभी धर्म परिवर्तन न करें, क्योंकि मुझे पता है कि इससे उनके आलोचक और ज़्यादा परेशान होते हैं. उन्हें किसी को ख़ुश करने के लिए कुछ करने की ज़रूरत नहीं है. उषा अपने व्यक्तित्व को लेकर काफ़ी आत्मविश्वासी दिखती हैं और यह देखना अच्छा लगता है.”

जेडी वांस

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इमेज कैप्शन, जेडी से उषा की शादी तब हुई थी, जब वह नास्तिक थे

जेडी वेंस क्यों बने कैथोलिक?

पिछले हफ़्ते जेडी वेंस की धर्म और आस्था पर आधारित नई किताब ‘कम्युनियन: फाइंडिंग माय वे बैक टु फेथ’ आई थी.

इस किताब में वेंस ने अपनी आध्यात्मिक यात्रा को विस्तार से बताया है.

वेंस ने इस किताब में अपनी दादी के अपेक्षाकृत सरल और कम औपचारिक ईसाई परिवेश से लेकर, पेंटेकोस्टल मत को लेकर पिता की घोर आस्था, कॉलेज के दिनों में जेडी की नास्तिकता और अंततः एक रूढ़िवादी कैथोलिक बनने तक के सफ़र को बताया है.

वेंस का तर्क है कि कैथोलिक सोच से प्रेरित एक वैकल्पिक राजनीतिक रास्ता जो न पूरी तरह दक्षिणपंथी हो और न वामपंथी, आज के अमेरिका की राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक चुनौतियों का समाधान देने में मदद कर सकता है.

कैथोलिक धर्म अपनाकर वेंस अमेरिकी दक्षिणपंथ के उन प्रभावशाली चेहरों में शामिल हो गए हैं, जिनकी वैचारिक और राजनीतिक भूमिका लंबे समय से महत्वपूर्ण रही है.

अमेरिका ऐतिहासिक रूप से प्रोटेस्टेंट बहुल देश रहा है और कैथोलिक समुदाय वहां अल्पसंख्यक है, फिर भी अमेरिकी रूढ़िवादी राजनीति पर कैथोलिक प्रभाव काफ़ी रहा है.

इस किताब में वेंस ने लिखा है कि शादी के बाद जब उन्होंने उषा के साथ बच्चे के बारे में सोचना शुरू किया तब वह ख़ुद को ‘क्रिश्चियन क्यूरियस’ (ईसाई धर्म में दिलचस्पी रखने वाला) मानते थे और कैथोलिक धर्म उन्हें बौद्धिक रूप से आकर्षित करने लगा था. उन्हें चिंता थी कि धर्म के प्रति उनकी नई गहरी रुचि उनकी हिंदू परंपरा में पली-बढ़ी पत्नी पर एक तरह का दबाव या थोपना न बन जाए.

हालांकि वेंस के अनुसार, उषा का मानना था कि उनके कठिन और भावनात्मक रूप से चुनौतीपूर्ण शुरुआती जीवन को देखते हुए आस्था उनके लिए सकारात्मक साबित हुई. वेंस की किताब भी उषा की व्यक्तिगत धार्मिक आस्था के बारे में काफ़ी संयमित और सीमित जानकारी देती है.

उषा वेंस

जेडी वेंस के हालिया बयानों से मागा (मेक अमेरिका ग्रेट अगेन) समर्थकों में निराशा देखने को मिली है. पिछले हफ़्ते ही स्विट्ज़रलैंड में वेंस ने मागा समर्थकों के बीच अपने बयान से हलचल मचा दी. वेंस ने पाकिस्तान के प्रति अपना लगाव खुलकर जताया.

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर के साथ खड़े होकर अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने कहा था, “मैं मज़ाक में कहता हूँ कि मेरी ज़िंदगी में दो बेहद अहम लोग हैं, एक भारतीय और एक पाकिस्तानी. भारतीय मेरी पत्नी हैं और पाकिस्तानी फ़ील्ड मार्शल मुनीर हैं.”

बाद में जब एक पाकिस्तानी पत्रकार ने अमेरिका-ईरान वार्ता में पाकिस्तान की भूमिका पर उनसे सवाल किया, तो उन्होंने कहा, “आई लव पाकिस्तान.”

मागा आंदोलन अमेरिकी वर्चस्ववादी राष्ट्रवाद और कट्टर पहचान की राजनीति से गहराई से प्रभावित रहा है, उसके भीतर पाकिस्तानी सैन्य प्रतिष्ठान के प्रति वेंस की इस गर्मजोशी को सहज रूप से नहीं लिया गया.

रिपब्लिकन सीनेटर रिक स्कॉट ने सार्वजनिक रूप से नाराज़गी जताते हुए कहा कि “पाकिस्तान का आतंकवादियों को पनाह देने का लंबा इतिहास रहा है और फ़िलहाल वे ईरान के दशकों पुराने आतंकी अभियान को सहारा देने में शांति स्थापित करने से ज़्यादा चिंतित दिखते हैं.”

वहीं रिप्बलिकन नेता टिम शीही ने फॉक्स न्यूज़ से कहा कि पाकिस्तान ने एक दशक तक ओसामा बिन लादेन को छिपाकर रखा और आईएसआईएस के ज़रिए आयतुल्लाह शासन को समर्थन दिया.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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