भास्कर संवाददाता|झाड़ला ग्राम पखरी में आयोजित नौ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा, महायज्ञ एवं श्रीराम दरबार प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव का बुधवार को धार्मिक अनुष्ठानों के साथ समापन हो गया। 17 जून को भव्य कलश यात्रा से शुरू हुए इस आयोजन के अंतिम दिन गंगा यात्रा निकाली गई, जिसमें ग्रामीणों ने ढोल-नगाड़ों, बैंड-बाजों और जय श्रीराम के उद्घोष के साथ उत्साहपूर्वक भाग लिया। गांव की गलियां दिनभर भक्ति और श्रद्धा के रंग में रंगी रहीं। कथावाचक कामेश कृष्ण महाराज ने विश्राम दिवस पर श्रीमद्भागवत कथा का महत्व बताते हुए कहा कि भागवत मानव जीवन को धर्म, ज्ञान और भक्ति का मार्ग दिखाने वाला सनातन ग्रंथ है। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं, सुदामा चरित्र और राजा परीक्षित को दिए गए अंतिम उपदेश का वर्णन करते हुए कहा कि कलियुग में प्रभु नाम का स्मरण और संकीर्तन ही जीवन का सबसे बड़ा सहारा है। मंगलवार रात आयोजित नानी बाई के मायरे के प्रसंग ने भावविभोर हुए श्रद्धालु मंगलवार रात आयोजित नानी बाई के मायरे के प्रसंग ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। पंडित मनोज मेहता ने भक्त और भगवान के संबंध की मार्मिक व्याख्या करते हुए बताया कि भगवान अपने भक्तों की रक्षा और सम्मान के लिए स्वयं उपस्थित होते हैं। आयोजन के दौरान प्रस्तुत झांकियों और धार्मिक प्रसंगों को देखने बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। महोत्सव का मुख्य आकर्षण श्रीराम दरबार की प्राण प्रतिष्ठा रही। यज्ञाचार्य देवनारायण शर्मा एवं उनकी टीम ने वैदिक विधि-विधान से यज्ञ की पूर्णाहुति कराई। समापन अवसर पर विधायक प्रतिनिधि सुदीप शर्मा, मंडल अध्यक्ष रवि मीणा, जनपद सदस्य विनोद मारण सहित सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद रहे। महाआरती और महाप्रसादी के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
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