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वेनेज़ुएला में आए दो बड़े भूकंपों के बाद 30 आफ़्टर शॉक यानी भूकंप के बाद आने वाले झटके भी महसूस किए गए.
देश की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रॉड्रिगेज़ ने अब तक 164 लोगों की मौत और 971 लोगों के घायल होने की पुष्टि की है.
सरकारी टीवी चैनल ‘वेनेज़ोलना डी टेलीविज़न’ पर रॉड्रिगेज़ ने बताया कि दो भूकंपों के बाद 30 आफ्टरशॉक आए.
रोड्रिगेज़ ने आगे बताया कि क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे और घरों के पुनर्निर्माण में मदद के लिए इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (आईएमएफ़) से 20 करोड़ डॉलर का फ़ंड बनाया गया है.
वेनेज़ुएला में इस भूकंप को देखते हुए सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लगी पाबंदी हटी दी गई है. देश में लोग सोशल मीडिया की ओर शिफ़्ट कर रहे हैं और लापता लोगों की तलाश कर रहे हैं.
देश की यूनिवर्सिटी से लेकर सेलिब्रिटी तक गुमशुदा लोगों की तलाश के लिए सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर कर रहे हैं.
पिछले कुछ महीनों से यह लातिन अमेरिकी देश काफी उथल-पुथल से गुज़र रहा है. इसी साल की शुरुआत में अमेरिका ने वामपंथी नेता निकोलस मादुरो को हिरासत में लिया था और उन पर मुक़दमा चलाने के लिए उन्हें न्यूयॉर्क ला जाया गया.
तबसे वेनेज़ुएला का कामकाज रोड्रिगेज़ कार्यवाहक राष्ट्रपति के तौर पर मादुरो की सहयोगी और पूर्व उप राष्ट्रपति डेल्सी संभाल रही हैं.
‘लगा नहीं बचूंगी’
बुधवार शाम को जब वेनेज़ुएला की धरती जोर-जोर से हिलने लगी, तो वेरोनिका को डर लगा कि काराकास स्थित उनके अपार्टमेंट की दीवारें कहीं उन पर न गिर जाएं.
उन्होंने बीबीसी मुंडो से कहा, “मुझे लगा कि मैं नहीं बच पाउंगी.”
वह अपनी मां के साथ देश में चल रही छुट्टियाँ मना रही थीं, तभी स्थानीय समय के मुताबिक़ शाम (बुधवार) क़रीब 6 बजे कुछ ही सेकंड के अंतराल पर आए दो शक्तिशाली भूकंप ने पूरे शहर को हिला दिया.
पहला भूकंप 7.2 तीव्रता का था, जबकि दूसरा 7.5 तीव्रता का था. इनमें दूसरा झटका साल 1900 के बाद देश में आया सबसे शक्तिशाली भूकंप था.
ख़बर लिखे जाने तक 164 से अधिक लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है और क़रीब एक हज़ार लोग घायल हुए हैं.
हालांकि अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि सबसे ज़्यादा प्रभावित इलाक़ों में नुक़सान का पूरा आकलन अभी शुरू भी नहीं हो पाया है.
वेनेज़ुएला की राजधानी काराकास की सड़कों पर मलबा बिखरा पड़ा है. बचावकर्मी ढही हुई इमारतों के मलबे में जीवित बचे लोगों की तलाश कर रहे हैं.
कुछ वीडियो फ़ुटेज में मलबे में दबे लोगों की मदद के लिए पुकार भी सुनाई दे रही है.
वेनेज़ुएला के अन्य प्रभावित हिस्सों में नुक़सान की तस्वीर अभी पूरी तरह साफ़ नहीं हो सकी है. बिजली और इंटरनेट सेवाएं बाधित होने से हालात और अधिक मुश्किल हो गए हैं.
सड़कों पर गुज़ारी रात
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रात होते-होते सदमे में डूबे स्थानीय लोग सड़कों पर भटकते नज़र आए. इनमें से कई लोग बेघर हो चुके थे, वे अपने घरों या परिजनों की ख़बर मिलने का इंतजार कर रहे थे.
वेरोनिका, बीबीसी मुंडो की पत्रकार वेलेंटीना ओरोपेजा की बहन हैं. भूकंप के बाद वेलेंटीना ने अपने परिवार का पता लगाने में कई घंटे बिताए.
वेलेंटीना के फ़ोन पर वेरोनिका का एक घबराया हुआ वॉइस मैसेज आया था, जिसमें वह भूकंप के ‘भयानक’ झटकों के बारे में उसी समय बता रही थीं.
पीछे उनकी मां की आवाज़ भी सुनाई दे रही थी. इसके बाद उनसे कोई संपर्क नहीं हो पाया.
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घबराई हुई वेलेंटीना ने मदद के लिए अपने जानने वालों से संपर्क करना शुरू कर दिया. इसी दौरान उनकी गली में ढही हुई इमारतों की तस्वीरें उनके फ़ोन पर आने लगीं.
आख़िरकार जब वह वेरोनिका और अपनी मां से संपर्क कर सकीं, तो वेरोनिका ने बताया कि वे दोनों सुरक्षित हैं, लेकिन संभव है कि उनका घर अब रहने लायक न बचा हो.
वेरोनिका ने कहा, “इमारत पूरी तरह तबाह हो चुकी है, दीवारों में बड़ी दरारें पड़ गई हैं.”
यह पहली बार नहीं है जब वेनेज़ुएला की राजधानी काराकास किसी बड़े भूकंप की चपेट में आई हो.
काराकास में साल 1967 में 6.6 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसमें 200 से अधिक लोगों की मौत हुई थी. उस भूकंप में पालोस ग्रांदेस और अल्तामीरा जैसे पॉश इलाक़ों की कई इमारतें भी नष्ट हो गई थीं.
भूकंप से पहले बहुत तेज़ धमाके की आवाज़
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लेकिन बुधवार को आए भूकंप के झटके पहले के मुकाबले कहीं अधिक भयावह थे.
वेलेंटीना की मां के मुताबिक, “ये झटके ज़्यादा देर तक महसूस हुए और उनकी तीव्रता भी अधिक थी.”
उन्होंने कांपती आवाज़ में कहा, “मैंने कभी नहीं सोचा था कि हमें ऐसा कुछ देखने को मिलेगा.”
पूर्वी काराकास के निवासी कोरो मार्टिनेज ने भी समाचार एजेंसी रॉयटर्स से यही बात कही.
56 साल की मार्टिनेज ने कहा, “मैंने अपने जीवन में ऐसा कभी महसूस नहीं किया.”
उन्होंने बताया, “एक बहुत तेज़ धमाके जैसी आवाज़ आई. घर के अंदर सामान गिरने लगा, यहां तक कि फ्रिज़ के भीतर रखे जग भी नीचे गिर गए.”
बीबीसी मुंडो की पत्रकार निकोल कोल्स्टर ने बताया कि मध्य काराकास के प्रमुख इलाके पालोस ग्रांदेस में स्थित सातवीं मंजिल के उनके अपार्टमेंट की खिड़कियां अचानक हिलने लगीं. उन्हें सुरक्षित जगह पर पहुंचने के लिए केवल कुछ पल ही मिले.
उन्होंने कहा, “मुझे बस इतना सूझा कि मुख्य दरवाज़े और पत्थर की दीवार के बीच खड़ी हो जाऊं, ताकि ख़ुद को बचा सकूं.”
उन्होंने कहा, “मुझे लगा कि पूरी इमारत मेरे ऊपर गिर जाएगी.”
मलबे के नीचे से आ रही आवाज़ें
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सड़क पर निकलने के बाद निकोल ने बताया कि उन्हें मलबे के ढेरों के बीच से लोगों की आवाज़ें सुनाई दे रही थीं. कई लोग इतने घबराए हुए थे कि घर से निकलते समय जूते पहनने तक का मौक़ा नहीं मिला. लोग एक-दूसरे से लिपटकर रो रहे थे.
कई घंटे बाद भी बहुत से लोग अपने घरों में लौटने की हिम्मत नहीं जुटा सके. कुछ लोग आफ्टर शॉक यानी भूकंप के बाद आने वाले झटकों के डर से वापस नहीं गए.
शहर भर में सैकड़ों लोगों ने चौक और सड़कों पर रात बिताई. फुटपाथों पर तंबू लगाए गए, जबकि कई लोगों ने अपनी कारों को ही अस्थायी बिस्तर बना लिया.
लोस पालोस ग्रांदेस की एक महिला सोने की कोशिश भी नहीं कर रही थीं, उन्होंने बीबीसी मुंडो से कहा कि वह अब भी सदमे में हैं.
उन्होंने गुरुवार तड़के कहा, “ऐसी घटना के बाद कोई सामान्य जीवन में कैसे लौट सकता है? यह किसी फ़िल्म जैसा लग रहा है.”
काराकास के सबसे ज़्यादा प्रभावित इलाक़ों में शामिल इस उपनगर से कुछ लोग अपने पालतू जानवरों को बचाकर बाहर निकलने में सफल रहे.
हालांकि देश के अन्य हिस्सों में रहने वाले कई लोग अब भी चिंता में हैं. शिक्षक एलन चुंग भी ऐसे ही लोगों में शामिल हैं, जिन्हें यह नहीं पता कि उनके पालतू जानवर सुरक्षित हैं या नहीं.
उन्होंने बीबीसी रेडियो 4 के ‘टुडे’ कार्यक्रम से कहा, “मेरे पास दो बिल्लियां हैं. दुर्भाग्य से मैं अब तक अपने अपार्टमेंट में वापस नहीं जा सका हूं, इसलिए यह भी नहीं जानता कि वे ठीक हैं या नहीं. आशा करता हूं कि वे सुरक्षित होंगी.”
तबाही की असली तस्वीर आनी अभी बाक़ी
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कराकास के उत्तर में स्थित ला ग्वेइरा, जो भूकंप से सबसे ज़्यादा प्रभावित राज्य माना जा रहा है, वहां से जानकारी जुटाने का काम बुनियादी ढांचे को हुए भारी नुक़सान के कारण प्रभावित हुआ है.
हालांकि इलाक़े से सामने आई तस्वीरें और वीडियो बड़े पैमाने पर तबाही की तस्वीर पेश कर रहे हैं.
इनमें ढही हुई इमारतें, कई जगह लगी भीषण आग और राज्य की राजधानी में बनाए गए अस्थायी अस्पतालों में इलाज के लिए पहुंच रहे बड़ी संख्या में घायल लोग दिखाई दे रहे हैं.
कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रॉड्रिगेज़ ने कहा कि शहर में ‘दर्जनों’ इमारतें ढह गई हैं. उन्होंने ला ग्वेइरा को ‘आपदा क्षेत्र’ और ‘वास्तविक त्रासदी’ बताया.
हालात इतने गंभीर हैं कि प्रशासन अभी तक यह अनुमान भी नहीं लगा पाया है कि कुल कितने लोगों की जान गई है.
ला ग्वेइरा के अलावा मिरांडा, अरागुआ, काराबोबो और फाल्कोन राज्य भी भूकंप से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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