हादसे में 20 से 25 प्रतिशत तक झुलसी जिनी फिलहाल बॉम्बे हॉस्पिटल के आईसीयू में भर्ती हैं। उनके बाएं हाथ की सर्जरी हो चुकी है, जबकि डॉक्टरों का कहना है कि पूरी तरह स्वस्थ होने में तीन से चार महीने लग सकते हैं। आईसीयू से जारी वीडियो संदेश में जिनी ने बताया कि अगर उस वक्त उन्होंने हिम्मत नहीं दिखाई होती तो शायद उनकी जान बचाना मुश्किल हो जाता।
हादसे के वक्त कोई मदद को आगे नहीं आया
जिनी बताती हैं कि 23 जून की शाम वह टू-व्हीलर से अकेले अपनी नानी के घर जा रही थीं। जैसे ही वह सुमन नगर जैन मंदिर के पास पहुंचीं, अचानक धमाका हुआ और आग की लपटें उठने लगीं। वहां कोई बैरिकेडिंग नहीं थी, जिसके कारण देखते ही देखते वह और उनकी बाइक आग की चपेट में आ गए। उन्होंने लोगों से पानी डालने को कहा, लेकिन सभी डरे हुए थे और कोई आगे नहीं आया। सड़क पर बारिश का पानी जमा था, ऐसे में उन्होंने खुद ही कूदकर अपने शरीर पर पानी डालना शुरू कर दिया। कुछ देर बाद एक राहगीर ने उन पर दो बाल्टी पानी डाला, लेकिन तब तक उनका पूरा बायां हाथ जल चुका था।
हाईकोर्ट ने दिया एयरलिफ्ट करने का सख्त निर्देश
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने गुरुवार को जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हादसे में गंभीर रूप से झुलसी युवती जिनी झाला को बेहतर इलाज के लिए तत्काल एयरलिफ्ट कर अहमदाबाद स्थित जाइडस हॉस्पिटल भेजने के निर्देश दिए हैं। याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट के समक्ष याचिकाकर्ता के एडवोकेट श्रवण कुमार लाहोटी ने यह मुद्दा भी उठाया कि हादसे में घायल लोगों से इंदौर के बॉम्बे हॉस्पिटल द्वारा इलाज का शुल्क लिया जा रहा है। इस पर इंदौर नगर निगम की ओर से उपस्थित एडवोकेट ने कोर्ट को बताया कि अस्पताल को पहले ही निर्देश जारी किए जा चुके हैं कि किसी भी घायल व्यक्ति से इलाज के लिए कोई राशि न ली जाए।
परिवार की मांग पर मिली विशेषज्ञ उपचार की अनुमति
गंभीर रूप से झुलसी जिनी झाला के लिए विशेष व्यवस्था की मांग को लेकर इंटरविनर जिनी झाला के भाई यशवीर झाला की ओर से एडवोकेट मनोज कुमार अग्रवाल ने आवेदन प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि जिनी गंभीर रूप से झुलस गई हैं और उनकी एक सर्जरी की जा चुकी है, लेकिन इस प्रकार की गंभीर बर्न इंजरी के लिए विशेष इलाज केवल अहमदाबाद के जाइडस हॉस्पिटल में उपलब्ध है। परिवार ने उन्हें वहां स्थानांतरित करने की अनुमति मांगी। पीड़िता की तस्वीरों और प्रस्तुत तथ्यों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने यह मांग स्वीकार कर ली और राज्य सरकार को निर्देश दिए कि जिनी झाला को जल्द से जल्द एयरलिफ्ट कर अहमदाबाद पहुंचाया जाए।
राज्य सरकार उठाएगी खर्च
कोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग के आयुक्त, इंदौर कलेक्टर और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को निर्देशित किया है कि एयरलिफ्टिंग और उपचार की सभी आवश्यक व्यवस्थाएं तत्काल सुनिश्चित की जाएं। साथ ही 30 तारीख तक कम्प्लायंस रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत करने के आदेश दिए गए हैं। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जिनी के इलाज से संबंधित सभी खर्च राज्य सरकार द्वारा वहन किए जाएंगे। कोर्ट ने इस मामले को मानवीय संवेदनाओं से जुड़ा बताते हुए पीड़िता को सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने पर जोर दिया है। उधर, इस मामले में नगर निगम ने जांच के लिए जो तीन सदस्यीय टीम बनाई है, उसमें आशीष पाठक, आसित खरे और पीएस कुशवाह शामिल हैं। यह कमेटी दो दिनों में अपनी रिपोर्ट पेश करेगी।
अस्पताल पहुंचने के लिए रैपिडो का लिया सहारा
जिनी के मुताबिक, हादसे के बाद उन्होंने राहगीरों से अस्पताल पहुंचाने की गुहार लगाई, लेकिन कोई तैयार नहीं हुआ। वह लगातार लोगों से कह रही थीं कि अस्पताल पहुंचा दो, लेकिन लोग डर रहे थे। आखिर में उन्होंने एक रैपिडो बाइक सवार को रोका और उनके साथ बॉम्बे हॉस्पिटल पहुंचीं। अस्पताल पहुंचते ही उन्होंने हाथ हिलाकर डॉक्टरों से कहा कि जल्दी उनका इलाज शुरू करें।
मंगेतर को दूसरे नंबरों से मिली सूचना
जिनी के मंगेतर और कंस्ट्रक्शन कारोबारी रजत प्रताप सिंह ने बताया कि घटना के समय वह देहरादून जा रहे थे। इसी दौरान जिनी का फोन आया, लेकिन कार ड्राइविंग के दौरान वह कॉल नहीं उठा पाए। कुछ देर बाद दूसरे नंबरों से कॉल आए, तब पता चला कि गैस हादसे में एक युवती गंभीर रूप से झुलस गई है। बाद में परिजनों से बात हुई तो पूरी घटना का पता चला। जिनी के शरीर का एक हिस्सा और चेहरा भी बुरी तरह झुलस गया है।
तीन और सर्जरी होना अभी बाकी
रजत बताते हैं कि जिनी के हाथ की त्वचा की दो लेयर्स पूरी तरह जल चुकी हैं, जबकि तीसरी लेयर भी गंभीर रूप से प्रभावित है। एक सर्जरी हो चुकी है और अभी तीन और सर्जरी होना बाकी हैं। उन्हें पूरी तरह ठीक होने में कम से कम तीन से चार महीने का समय लगेगा।
एफआईआर न होने पर उठाए सवाल
रजत प्रताप सिंह ने आरोप लगाया कि स्थानीय स्तर पर बिना अनुमति बोरिंग का काम कराया जा रहा था, जबकि प्रशासन ने 30 जुलाई तक बोरिंग पर प्रतिबंध लगा रखा है। उन्होंने कहा कि घटना को लेकर तीन बार पुलिस को आवेदन दिया गया, लेकिन दो दिन बाद भी एफआईआर दर्ज नहीं हुई। उनका कहना है कि अभी तक नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भी इस मामले में सुध नहीं ली है।
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