भारत का पासपोर्ट अगर नागरिकता का प्रमाण नहीं है तो फिर कौन सा दस्तावेज़ काम आएगा?

भारत का पासपोर्ट अगर नागरिकता का प्रमाण नहीं है तो फिर कौन सा दस्तावेज़ काम आएगा?

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इमेज कैप्शन, पासपोर्ट को आमतौर पर नागरिकता के सबूत के रूप में देखा जाता है

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भारतीय मीडिया में बुधवार शाम से एक ख़बर सुर्खियों में है कि भारत का पासपोर्ट यात्रा दस्तावेज़ है न कि नागरिकता का अंतिम प्रमाणपत्र.

भारत के कई मीडिया आउटलेट में यह ख़बर विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से चल रही है.

अंग्रेज़ी अख़बार द हिन्दू ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, ”विदेश मंत्रालय के अधिकारी ने कहा कि भारतीय पासपोर्ट का मक़सद लोगों को विदेशी बंदरगाहों और इलाक़ों में आवाजाही में मदद करना है. इसलिए इसकी तुलना उन दस्तावेज़ों से नहीं की जानी चाहिए, जिनका इस्तेमाल नागरिकता संबंधी अधिकार स्थापित करने के लिए किया जाता है.”

हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, ”भारत के वर्क फोर्स को वैश्विक अर्थव्यवस्था से जोड़ने में पासपोर्ट की भूमिका पर ज़ोर देते हुए विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि सरकार आने वाले महीनों में पश्चिमी देशों और जापान के साथ आवाजाही और तेज़ करेगी. इसका मक़सद भारतीय नागरिकों को इन औद्योगिक अर्थव्यवस्थाओं में सुरक्षित रोज़गार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है.”

द हिन्दू की रिपोर्ट के मुताबिक़ विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि भारतीय पासपोर्ट को नागरिकता साबित करने वाले दस्तावेज़ के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए.

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “पासपोर्ट एक यात्रा दस्तावेज़ है न कि नागरिकता का प्रमाणपत्र. सैद्धांतिक रूप से पासपोर्ट को नागरिकता के प्रमाण के रूप में देखा जाता है और यही बात इसे अन्य दस्तावेज़ों से अलग बनाती है. विदेश यात्रा के दौरान पासपोर्ट आपकी राष्ट्रीयता की पुष्टि करता है, लेकिन इसे नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता.”

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इमेज कैप्शन, सवाल उठ रहा है कि पासपोर्ट भारतीय नागरिक होने का प्रमाण नहीं है तो फिर क्या है?

उठ रहे हैं ये सवाल

द हिन्दू ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, ”विदेश मंत्रालय के अधिकारी ने यह बात उस सवाल के जवाब में कही, जिसमें पूछा गया था कि क्या भारतीय पासपोर्ट का इस्तेमाल एसआईआर के दौरान मतदाता सूची से बाहर किए जाने को चुनौती देने के लिए किया जा सकता है.”

विदेश मंत्रालय ने यह भी रेखांकित किया कि नए चिप आधारित ई-पासपोर्ट में बायोमेट्रिक डेटा जैसी उन्नत सुरक्षा सुविधाएं जोड़ी गई हैं, ताकि वैश्विक स्तर पर उनकी स्वीकार्यता बढ़े और धोखाधड़ी के जोखिम को कम किया जा सके.

भारत ने अब चिप से लैस ई-पासपोर्ट जारी करना शुरू कर दिया है, जिसे सुरक्षा और प्रामाणिकता के अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप माना जा रहा है.

हालांकि कुछ मामलों में अदालतों ने भी पासपोर्ट को नागरिकता साबित करने का अंतिम दस्तावेज़ नहीं माना है.

निरूपमा मेनन राव

2013 में एक व्यक्ति और तीन अन्य अभियुक्तों ने पासपोर्ट के साथ जन्म प्रमाणपत्र और आधार कार्ड के ज़रिए अपनी नागरिकता साबित करने की कोशिश की थी लेकिन उन्हें अदालत से राहत नहीं मिली थी.

इस रिपोर्ट में टीओआई ने लिखा था, ”जन्म प्रमाणपत्र, पासपोर्ट और आधार कार्ड यह साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं हो सकते कि आप भारतीय नागरिक हैं. ख़ासकर अगर आपका जन्म एक जुलाई 1987 के बाद हुआ है.”

बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक व्यक्ति और तीन अन्य अभियुक्तों को राहत देने से इनकार कर दिया था, जिन पर अवैध प्रवासी होने का आरोप था. उन्होंने ख़ुद को भारतीय साबित करने के लिए पासपोर्ट (जो बाद में रद्द कर दिए गए), आधार कार्ड और जन्म प्रमाणपत्र पेश किए थे.

ऐसे में सवाल उठ रहा है कि पासपोर्ट भारतीय नागरिक होने का प्रमाण नहीं है तो फिर क्या है? पासपोर्ट एक्ट 1967 की धारा पाँच के तहत पासपोर्ट प्राधिकरण आवेदन पर विचार करने और ज़रूरी जांच करने के बाद ही पासपोर्ट जारी कर सकता है.

वहीं धारा 6(2)(a) स्पष्ट रूप से कहती है कि अगर आवेदक भारत का नागरिक नहीं है, तो पासपोर्ट जारी करने से इनकार किया जाएगा.

जाने-माने गीतकार और फ़िल्मकार जावेद अख़्तर ने एक्स पर लिखा है, ”विदेश मंत्रालय का कहना है कि पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं, बल्कि सिर्फ़ यात्रा का दस्तावेज है. सच में? तो क्या इसका मतलब यह है कि सरकार यह यात्रा दस्तावेज़ ऐसे लोगों को भी जारी कर रही है, जिनके भारतीय नागरिक होने को लेकर वह पूरी तरह आश्वस्त नहीं है? यह तर्क अपने आप में बेहद अजीब और विरोधाभासी लगता है.”

जावेद अख़्तर

भारत के पूर्व क़ानून मंत्री और जाने-माने वकील कपिल सिब्बल ने एक्स पर लिखा है, ”विदेश मंत्रालय का कहना है कि पासपोर्ट एक यात्रा दस्तावेज़ है, नागरिकता का दस्तावेज़ नहीं. तो फिर नागरिकता का प्रमाण कौन-सा दस्तावेज़ है? एक बीएलओ मेरी नागरिकता पर सवाल उठा सकता है. मुझे वोट देने के अधिकार से वंचित कर सकता है. नतीजा? बीजेपी चुनाव जीत जाएगी. अब नज़र भारत के सुप्रीम कोर्ट पर है.”

कपिल सिब्बल की इस पोस्ट को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने रीपोस्ट किया है.

शिव सेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे ने भी इसे लेकर कई सवाल पूछे हैं. ठाकरे ने एक्स पर लिखा है, ”अगर विदेश मंत्रालय का मानना है कि पासपोर्ट नागरिकता का दस्तावेज़ नहीं है, तो कुछ बुनियादी सवाल उठते हैं-

1. पासपोर्ट जारी करने से पहले पुलिस आख़िर किस बात का सत्यापन करती है?

2. क्या हमारा देश ग़ैर-भारतीयों को भी यात्रा दस्तावेज़ के नाम पर भारतीय पासपोर्ट जारी करता है?

3. क्या इस बयान से दूसरे देशों के मन में यह संदेह नहीं पैदा होगा कि कहीं ग़ैर-भारतीयों को भी भारतीय पासपोर्ट तो नहीं दिए जा रहे?

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इमेज कैप्शन, भारत ने अब चिप से लैस ई-पासपोर्ट जारी करना शुरू कर दिया है

क्या कहता है पासपोर्ट क़ानून

भारत की पूर्व विदेश सचिव निरूपमा मेनन राव मानती हैं कि विदेश मंत्रालय की बात क़ानूनी रूप से सही है क्योंकि पासपोर्ट, पासपोर्ट्स एक्ट, 1967 के तहत जारी होता है, जबकि नागरिकता सिटिज़नशिप एक्ट 1955 के तहत नियंत्रित होती है. उनका कहना है कि एक क़ानून दस्तावेज़ को नियंत्रित करता है, दूसरा क़ानूनी स्थिति को.

निरूपमा मेनन राव ने एक्स पर लिखा है, ” लेकिन क़ानून और आम लोगों की समझ हमेशा एक जैसी नहीं होती. ज़्यादातर भारतीयों के लिए पासपोर्ट सबसे भरोसेमंद दस्तावेज़ है. उस पर रिपब्लिक ऑफ इंडिया लिखा होता है और व्यक्ति की पहचान दर्ज होती है. दुनिया भर में उसे इसलिए स्वीकार किया जाता है क्योंकि विदेशी सरकारों को भरोसा होता है कि भारत ने पासपोर्ट जारी करने से पहले उस व्यक्ति की राष्ट्रीयता का सत्यापन किया है. इसलिए यह पूछना स्वाभाविक है कि अगर पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है, तो फिर क्या है?”

”इसका उत्तर थोड़ा जटिल है. पासपोर्ट नागरिकता बनाता नहीं है. अगर नागरिकता को अदालत में चुनौती दी जाए, तो पासपोर्ट वह अंतिम क़ानूनी दस्तावेज़ भी नहीं है जो अकेले नागरिकता तय कर दे.

दुनिया के कई लोकतांत्रिक देशों की तरह भारत भी नागरिकता क़ानून और पासपोर्ट क़ानून के बीच स्पष्ट अंतर रखता है. धोखाधड़ी, विवाद या अवैध तरीक़े से नागरिकता हासिल करने जैसे मामलों में नागरिकता का निर्धारण सिटिज़नशिप एक्ट 1955 और उससे जुड़े साक्ष्यों के आधार पर करना पड़ सकता है.”

निरूपमा मेनन राव कहती हैं, ”यही कारण है कि क़ानून की नज़र में पासपोर्ट हर संभावित परिस्थिति में नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं माना जाता. लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि उसका व्यावहारिक महत्व कम हो गया. पासपोर्ट तभी जारी होता है, जब सरकार यह सुनिश्चित कर ले कि आवेदक उसका पात्र है. विदेश मंत्रालय के बयान से यह वास्तविकता नहीं बदलती.”

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इमेज कैप्शन, पासपोर्ट और नागरिकता क़ानून दोनों अलग-अलग हैं

भ्रम की स्थिति

क़ानून यह मानकर चलता है कि पासपोर्ट तभी जारी होगा जब स्टेट यह सुनिश्चित कर ले कि आवेदक भारतीय नागरिक है. ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि पासपोर्ट जब ग़ैर भारतीय नागरिकों को जारी ही नहीं किया जाता है तो फिर जिनके पास पासपोर्ट है, उनके भारतीय होने पर संदेह क्यों है?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, विदेश मंत्रालय का कहना है कि पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण हो सकता है लेकिन नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं.

अगर नागरिकता ग़लत दावे या ग़लत जानकारी के आधार पर हासिल की गई हो तो क़ानूनी रूप से सरकार के पास यह अधिकार बना रहता है कि वह पासपोर्ट को जब्त या रद्द करे.

लेकिन इतनी जांच और पड़ताल के बाद जारी होने वाले पासपोर्ट को भी नागरिकता का प्रमाणपत्र नहीं माना जा सकता है तो फिर कौन सा दस्तावेज़ बचता है?

हाल ही में मतदाता सूचियों के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (एसआईआर) के दौरान सुप्रीम कोर्ट के सामने प्रमुख क़ानूनी सवालों में से एक यह था कि क्या पहले से रजिस्टर्ड मतदाताओं से पात्रता साबित करने के लिए दोबारा नए दस्तावेज मांगे जा सकते हैं.

कपिल सिब्बल

मतदाता पहचान पत्र यह स्थापित करता है कि किसी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में दर्ज है.

लेकिन यह अपने आप में नागरिकता का स्वतंत्र प्रमाण नहीं है.हालांकि केवल भारतीय नागरिक ही मतदाता के रूप में रजिस्टर्ड हो सकते हैं.

इसके बावजूद चुनाव आयोग के पास यह अधिकार बना रहता है कि वह जांच करे कि किसी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में वैध है या नहीं.

इसी कारण, एसआईआर के दौरान केवल पुराने वोटर कार्ड का होना अपने आप में नागरिकता से जुड़े सवालों का अंतिम उत्तर नहीं माना गया.

अगर वोटर आईडी नागरिकता का निर्णायक प्रमाण नहीं है, पासपोर्ट भी नहीं है, तो स्वाभाविक रूप से नागरिक यह सवाल उठा सकते हैं कि आख़िर कौन-सा दस्तावेज़ नागरिकता का अंतिम और निर्णायक प्रमाण माना जाएगा?

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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