एमपी में मानसून की एंट्री: नौ दिन की देरी से पहुंचा, अगले चार दिन में प्रदेश के अधिकांश हिस्से होंगे तरबतर

एमपी में मानसून की एंट्री: नौ दिन की देरी से पहुंचा, अगले चार दिन में प्रदेश के अधिकांश हिस्से होंगे तरबतर

लंबे इंतजार के बाद आखिरकार दक्षिण-पश्चिम मानसून ने बुधवार को मध्य प्रदेश में प्रवेश कर लिया। मौसम विभाग ने आधिकारिक तौर पर मानसून के आगमन की घोषणा करते हुए बताया कि यह बालाघाट, डिंडौरी, अनूपपुर, सिवनी, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, बैतूल, हरदा, खंडवा, बुरहानपुर, खरगोन और बड़वानी के रास्ते प्रदेश में पहुंचा है। इस बार मानसून सामान्य तिथि 15 जून के मुकाबले नौ दिन की देरी से आया है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार अगले तीन से चार दिनों में मानसून तेजी से आगे बढ़ेगा और मध्य प्रदेश के अधिकांश हिस्सों को अपनी चपेट में ले लेगा। मानसून के प्रवेश के साथ ही बैतूल और बुरहानपुर सहित कई जिलों में बारिश का दौर शुरू हो गया है।


10 साल में कब आया मानसून, कब हुई विदाई









वर्ष मानसून की एंट्री मानसून की विदाई









2025 16 जून 15 अक्टूबर









2024 21 जून 7 अक्टूबर









2023 24 जून 9 अक्टूबर









2022 16 जून 14 अक्टूबर









2021 9 जून 11 अक्टूबर









2020 14 जून 21 अक्टूबर









2019 24 जून 12 अक्टूबर









2018 25 जून 4 अक्टूबर









2017 22 जून 11 अक्टूबर









2016 19 जून 13 अक्टूबर

क्या कहता है 10 साल का रिकॉर्ड

पिछले एक दशक के आंकड़े बताते हैं कि मध्य प्रदेश में मानसून की एंट्री 9 जून से लेकर 25 जून तक के बीच हुई है। सबसे जल्दी 2021 में 9 जून को मानसून पहुंचा था, जबकि सबसे देर से 2018 में 25 जून को प्रवेश हुआ था। वहीं मानसून की विदाई आमतौर पर अक्टूबर के पहले और दूसरे सप्ताह के बीच होती रही है।

भोपाल समेत 42 जिलों में अलर्ट

मानसून की एंट्री के साथ मौसम विभाग ने भोपाल सहित 42 जिलों में तेज हवाओं, गरज-चमक और बारिश की चेतावनी जारी की है। राजधानी भोपाल, रायसेन, सीहोर, इंदौर, उज्जैन, देवास, शाजापुर, धार, खरगोन, बड़वानी, आलीराजपुर, हरदा, नर्मदापुरम, सागर, दमोह, जबलपुर, कटनी, सिवनी, रीवा, सिंगरौली, मऊगंज और अन्य जिलों में मौसम सक्रिय रहने का अनुमान है।

24 घंटे में 39 जिलों में बरसे बादल

मानसून आगमन से पहले ही प्रदेश में प्री-मानसून गतिविधियां तेज रहीं। पिछले 24 घंटों के दौरान 39 जिलों में आंधी और बारिश दर्ज की गई। इंदौर, भोपाल, रायसेन, सीहोर, धार, उज्जैन, राजगढ़, छिंदवाड़ा, बालाघाट, सिवनी, जबलपुर, ग्वालियर और सागर समेत कई जिलों में तेज बारिश हुई। बालाघाट जिले में ओलावृष्टि भी दर्ज की गई।

बारिश का बड़ा घाटा अब भी बरकरार

मानसून की देरी का असर जून के बारिश आंकड़ों में साफ दिखाई दे रहा है। एक जून से अब तक प्रदेश में औसतन 78.5 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन केवल 37.1 मिलीमीटर वर्षा दर्ज हुई है। यह सामान्य से 53 प्रतिशत कम है। इंदौर, उज्जैन और ग्वालियर सहित 48 जिलों में वर्षा का आंकड़ा सामान्य से नीचे बना हुआ है। कम बारिश के कारण सोयाबीन सहित खरीफ फसलों की बुवाई भी प्रभावित हुई है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि पर्याप्त नमी के लिए कम से कम चार इंच बारिश आवश्यक होती है। फिलहाल भोपाल ऐसा प्रमुख जिला है जहां पांच इंच के करीब बारिश दर्ज हो चुकी है, जो सामान्य से 63 प्रतिशत अधिक है।

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पूर्वी संभागों में सबसे ज्यादा कमी

जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में अब तक औसतन 72 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। वहीं भोपाल, इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम और ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में औसतन 35 प्रतिशत कम वर्षा हुई है।

तापमान में आई राहत

बारिश और बादलों के कारण कई जिलों में तापमान में गिरावट दर्ज की गई। पचमढ़ी प्रदेश का सबसे ठंडा स्थान रहा, जहां अधिकतम तापमान 30.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। भोपाल में 32.2 डिग्री, इंदौर में 33.9 डिग्री और जबलपुर में 35.4 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज हुआ। वहीं दतिया और सीधी सबसे गर्म रहे, जहां पारा 41.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया।

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किसानों को राहत की उम्मीद

मानसून के औपचारिक प्रवेश के बाद किसानों को अच्छी बारिश की उम्मीद बंधी है। मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले कुछ दिनों में प्रदेशभर में वर्षा गतिविधियां तेज होंगी, जिससे खरीफ सीजन की बुवाई को गति मिलने के साथ जलाशयों और भूजल स्तर को भी फायदा पहुंचेगा।

 

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