कृषि विश्वविद्यालय स्थानीय जलवायु, मिट्टी और फसलों को ध्यान में रखकर AI आधारित तकनीक विकसित करने की संभावनाएं तलाशेगा। रिसर्च का उद्देश्य ऐसी तकनीक तै…और पढ़ें

HighLights
- संक्रमित फसल की फोटो से होगी बीमारी की पहचान
- मिट्टी की नमी बताएगी सिंचाई का सही समय
- छात्रों को मिलेगा AI आधारित तकनीकों का प्रशिक्षण
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब खेती का तरीका बदलने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है।
राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय ग्वालियर में AI के उपयोग पर शोध कार्य होगा। इसके लिए विश्वविद्यालय और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रोपड़ पंजाब के बीच एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
इस परियोजना के तहत विद्यार्थी फसल रोग की पहचान, मौसम, मिट्टी की नमी, सिंचाई प्रबंधन और नई कृषि तकनीकों के विकास में AI का उपयोग करेंगे।
AI आधारित तकनीकों का दिया जाएगा प्रशिक्षण
विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. अरविंद कुमार शुक्ला ने बताया कि AI को कृषि अनुसंधान और व्यावहारिक जरूरतों से जोड़ने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
इसके लिए विद्यार्थियों को AI आधारित तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। वर्तमान में किसानों के लिए फसल में रोग की पहचान करना बड़ी चुनौती है।
जानकारी के अभाव में कई बार वह अनुमान के आधार पर कीटनाशकों का उपयोग करते हैं। AI आधारित तकनीक इस समस्या को हल कर सकती है।
किसान संक्रमित फसल की फोटो खींचकर एआइ सिस्टम पर अपलोड करेंगे, जिसका विश्लेषण कर संभावित रोग की पहचान और नियंत्रण के उपायों की जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।
मिट्टी बताएगी कब करनी है सिंचाई
मौसम के पूर्वानुमान को कृषि प्रबंधन से जोड़कर बुवाई, सिंचाई और फसल सुरक्षा के निर्णय अधिक सटीक बनाए जा सकेंगे।
इसके अलावा AI के माध्यम से खेत की मिट्टी में नमी का आकलन कर किसान जान सकेंगे कि फसल को कब और कितनी सिंचाई की जरूरत है।
कृषि विश्वविद्यालय स्थानीय जलवायु, मिट्टी और फसलों को ध्यान में रखकर AI आधारित तकनीक विकसित करने की संभावनाएं तलाशेगा।
रिसर्च का उद्देश्य ऐसी तकनीक तैयार करना है, जिसका सीधा लाभ किसानों को मिल सके।
कृषि में AI के बेहतर उपयोग के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रोपड़ के साथ एमओयू हुआ है। विद्यार्थी जल्द ही एआइ के माध्यम से कृषि क्षेत्र में रिसर्च शुरू करेंगे।

Mood bana diya bhai inhone to…


