Aishwarya Lakshmi n bold dress controversy says is your tradition lies in lady cleavage

Aishwarya Lakshmi n bold dress controversy says is your tradition lies in lady cleavage


Aishwarya Lakshmi On Dress: मलयायम एक्ट्रेस ऐश्वर्या लक्ष्मी ने हाल ही में अपने कपड़े पर कमेंट करने वालों को लेकर पलटवार किया है। दरअसल, कुछ समय पहले ऐश्वर्या लक्ष्मी एक डायमंड ज्वेलरी एग्‍ज‍िबिशन में पहुंची थीं तभी से उनके कपड़ों को लेकर सोशल मीडिया पर बवाल मचा हुआ था।

Aishwarya Lakshmi n bold dress controversy says is your tradition lies in lady cleavage

ऐश्वर्या लक्ष्मी ने इसपर रिएक्ट करते हुए कहा कि इवेंट में साफ दिख रहा था कि फोटोग्राफर उनके चेहरे पर फोकस नहीं कर रहे थे, बल्कि अजीब एंगल से तस्वीरें ले रहे थे। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या किसी महिला का क्लीवेज सच में इस देश की सबसे बड़ी समस्या है? क्‍या संस्कृति की बातचीत सिर्फ महिला की नेकलाइन तक सीमित है?

ऐश्वर्या लक्ष्मी में अपने इंटरव्यू में कहा कि इवेंट में फोटोग्राफरों के तरीके से असहज महसूस कर रही थीं। ऐश्वर्या लक्ष्मी ने कहा, “वे मेरे चेहरे पर फोकस नहीं कर रहे थे। मुझे असहज महसूस हुआ और जब आप असहज महसूस करवाते हैं तो आपकी बॉडी लैंग्वेज भी बदल जाती है। मुझे लगा कि मेरी पर्सनल बाउंड्री का उल्लंघन हुआ है।”

ऐश्‍वर्या लक्ष्‍मी ने आगे कहा, ‘मैंने एक ड्रेस पहनी थी जिसमें की-होल नेकलाइन थी। मेरे दोस्तों को वह ड्रेस बहुत पसंद आई। उसमें थोड़ा क्लीवेज दिख रहा था और की-होल का डिजाइन था। हालांकि, पहनने से पहले मुझे अंदाजा नहीं था कि की-होल इतना बड़ा होगा। लेकिन पहनने के बाद वह बहुत अच्छी लग रही थी। आम तौर पर मेरे साथ मेरी सहेलियों का ग्रुप होता है। डायमंड ज्वेलरी के साथ उस ड्रेस को पहनने से मुझे एक बहुत अलग लुक मिला और मेरी सहेलियों ने भी उसकी तारीफ की।’

ऐश्‍वर्या लक्ष्‍मी आगे कहती हैं, ‘उस इवेंट के तुरंत बाद ही लोगों ने ऐसी बातें करना शुरू कर दी। कहने लगे कि ओह, उसे अचानक एहसास हुआ और वह खुद को ढकने की कोशिश कर रही है। मैंने वे बातें सुनीं। मुझे वह आउटफिट पहनने में कोई असहजता महसूस नहीं हुई, लेकिन मुझे अच्छी तरह पता था कि आपकी नजरें उसमें क्या ढूंढ रही थीं। क्या आपकी संस्कृति कपड़ों की लंबाई या गले की गहराई से तय होती है? नहीं, संस्कृति तो इंसान के बर्ताव से पहचानी जाती है। क्या इन लोगों के कमेंट्स सच में सभ्य होते हैं?’



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