
विभाग की ओर से 12वीं, ग्रेजुएशन और बीएड में कंप्यूटर योग्यता को वर्ष 2018 में मान्य करने के आदेश जारी किए गए, लेकिन जिला परिषद ने वर्ष 2013 में ही लिपिक नियुक्त कर दिए, जो उस समय इस आधार पर पात्र नहीं थे। इसके अलावा ऐसे कर्मचारियों को नौकरी दी गई, जो संविदा की नौकरी के दौरान ही दूसरे राज्यों और जिलों से कंप्यूटर की डिग्री लाए और उनके अनुभव अवधि ओवरलैप हो रही है।
वर्ष 2017 और 2022 में भी जबरदस्त गड़बड़ियां हुईं। तीन से चार आवेदकों की ओर से आवेदन शुल्क जमा करने तक का साक्ष्य नहीं मिला। इसके बावजूद उन्हें लिपिक बनाया गया। अब इस पूरे मामले में सख्त एक्शन देखने को मिल सकता है।
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