नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। चार्टर्ड अकाउंटेंसी (सीए) को आमतौर पर सिर्फ बैलेंस शीट और टैक्स से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन जब यही वित्तीय सूझबूझ और प्रबंधन की ताकत सामाजिक सरोकारों से जुड़ती है, तो बदलाव की एक नई इबारत लिखी जाती है। इसी दिशा में ऐसी कई महिला सीए हैं, जो अपनी कार्पोरेट फाइलों से बाहर निकलकर समाज के उस हिस्से को सशक्त कर रही हैं, जहां विकास की रोशनी देर से पहुंचती है।
चाहे वो ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना हो, सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे जरूरतमंदों तक पहुंचाना हो, या फिर पंचायती राज व्यवस्था को पारदर्शी और मजबूत करना हो। इन सभी दिशा में महिलाएं कार्य कर रही हैं।
ग्रामीण विकास के लिए किया कार्य
सीए श्वेता अग्रवाल सीए परीक्षा में ऑल इंडिया टापर रही हैं। सीए के साथ वे फिक्की फ्लो इंदौर की चेयरपर्सन भी रही हैं। वे बताती हैं कि इस पद पर रहते हुए उन्होंने करीब 20 गांवों को गोद लेने की पहल की थी। उनकी टीम ने वहां के करीब 20 स्कूलों के बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य की जिम्मेदारी तो ली ही, साथ ही उनके माता-पिता के बैंक खाते खुलवाए और उनके आधार व पैन कार्ड अपडेट करवाए।
इसका सीधा फायदा यह हुआ कि ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं का पैसा सीधे और समय पर मिलने लगा। इसके अलावा, उन्होंने खेती में कीटनाशकों का इस्तेमाल कम करने की ट्रेनिंग भी दिलवाई। इसका लाभ खेती में देखने को मिला।
महिलाओं को रोजगार से जोड़ा
सीए पूजा शर्मा प्रैक्टिसिंग सीए होने के साथ-साथ वे ग्रामीण महिलाओं की जिंदगी बदलने में जुटी हैं। उन्होंने बताया कि गांव की महिलाओं को खेती के साथ-साथ घर बैठे काम की भी जरूरत है ताकि वे आर्थिक रूप से मजबूत हो सकें। इसके लिए उन्होंने बसंदरा गांव की 10-15 महिलाओं का एक स्वयं सहायता समूह बनाया और उन्हें विभिन्न संस्थाओं से जोड़कर ट्रेनिंग दिलवाई।
आज ये महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं। इसके साथ ही वे ग्रामीण महिलाओं के लिए स्वास्थ्य जांच शिविर और कृषि कार्यशालाएं भी आयोजित कराती हैं। युवाओं और स्टार्टअप्स के लिए वे आईएमए के स्टूडेंट विंग्स के साथ मिलकर काम कर रही हैं।
पंचायतों का आधुनिकीकरण करने में निभाई भूमिका
सीए केमिशा सोनी ने साल 1997 में सीए की परीक्षा पास की और वे इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स आफ इंडिया की सेंट्रल काउंसिल में जगह बनाने वाली इस क्षेत्र की पहली महिला बनीं। काउंसिल में नौ साल रहते हुए उन्होंने देश की वित्तीय व्यवस्था में ऐतिहासिक सुधार किए। पहले देश की पंचायतों और स्थानीय निकायों में कोई प्रोफेशनल अकाउंटेंट नहीं होता था, जिससे सरकारी बजट और योजनाओं की सही मानिटरिंग नहीं हो पाती थी।
उन्होंने इस कमी को पहचाना और कमेटी आन पब्लिक एंड गवर्नमेंट फाइनेंशियल मैनेजमेंट की अध्यक्ष रहते हुए देश की ढाई लाख से अधिक पंचायतों के लिए एक विशेष अकाउंटिंग कोर्स तैयार किया। इससे न सिर्फ पंचायतों का हिसाब-किताब पारदर्शी हुआ, बल्कि स्थानीय स्तर पर युवाओं को रोजगार मिला।
क्यों मनाया जाता है सीए डे
हर साल एक जुलाई को भारत में सीए डे यानी चार्टर्ड अकाउंटेंट्स दिवस मनाया जाता है। इसी दिन साल 1949 में भारत की संसद के एक एक्ट के तहत ‘इंस्टीट्यूट आफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया’ (आईसीएआई) की स्थापना की थी।
यह संस्थान देश का एकमात्र ऐसा संगठन है जो सीए की पढ़ाई और उनके लाइसेंस से जुड़े सारे नियम तय करता है। सीए डे मनाने का मकसद देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत, पारदर्शी और सुरक्षित बनाए रखने में सीए समुदाय के योगदान को सम्मान देना है।
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