देश में हरियाली बढ़ाने के नाम पर बीते दस साल में 1,163.42 करोड़ रुपये खर्च हुए, लेकिन कैग की जांच में पौधारोपण के जमीनी असर की तस्वीर चौंकाने वाली मिली। नौ राज्यों में पौधारोपण की 153 जगहों की सेटेलाइट तस्वीरें खंगाली गईं तो करीब 70% जगहों पर 2016-17 से 2019-20 के बीच लगाए गए पौधों से 2024 तक पेड़ों में कोई साफ बढ़ोतरी नहीं दिखी। राज्यों ने इन जगहों पर 1,245.69 हेक्टेयर में पौधारोपण होने का दावा किया था, लेकिन कैग की जांच में इस उपलब्धि पर ही सवाल खड़े हो गए।
जिन 153 जगहों की जांच हुई, उनके सरकारी नक्शों में कुल क्षेत्रफल 1,305 हेक्टेयर बताया गया था, जबकि सेटेलाइट से नापने पर यह 1,807.01 हेक्टेयर निकला। यानी आंकड़ों में ही 502.01 हेक्टेयर का अंतर मिला। कैग की जांच में यह भी सामने आया कि 153 में सिर्फ 46 जगहों पर ही पौधारोपण के बाद हरियाली में बदलाव दिखा। इन जगहों के लिए 561.32 हेक्टेयर क्षेत्र बताया गया था, लेकिन वास्तविक पौधारोपण गतिविधि सिर्फ 179.43 हेक्टेयर में मिली। यानी जांचे गए पूरे क्षेत्र का महज 9.93 फीसदी हिस्सा ही ऐसा था, जहां पौधारोपण का असर दिखाई दिया।
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