CJI Suryakant On Judiciary Accountability

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4 घंटे पहले

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CJI Suryakant On Judiciary Accountability

भारत के चीफ जस्टिस सूर्यकांत सोमवार को दिल्ली में आयोजित छठे राम जेठमलानी स्मृति व्याख्यान में शामिल हुए थे।

भारत के चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत ने सोमवार को कहा कि लोगों का न्याय व्यवस्था पर भरोसा बनाए रखने के लिए न्यायपालिका को जांच और आलोचना का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में न्यायपालिका के कामकाज की निष्पक्ष और रचनात्मक आलोचना जरूरी है। इससे न्याय व्यवस्था में जवाबदेही बढ़ती है और सुधार का रास्ता खुलता है।

CJI ने कहा कि जजों को अपने कार्यकाल के अलग-अलग चरणों में शिकायतों का सामना करना पड़ता है। हालांकि उन्होंने सवाल उठाया कि क्या हर शिकायत को वेबसाइट पर सार्वजनिक कर देना चाहिए।

सूर्यकांत ने यह बात ‘जस्टिस सीन टू बी डन: ट्रांसपेरेंसी एंड पब्लिक ट्रस्ट ऐज पिलर्स ऑफ द लीगल सिस्टम’ विषय पर आयोजित छठे राम जेठमलानी स्मृति व्याख्यान में कही। कार्यक्रम का आयोजन दिल्ली में किया गया था।

CJI की 2 बड़ी बातें; कहा- हारने वाले के साथ न्याय हो, तब भरोसा बनता है

जनता का भरोसा दोनों पक्षों के न्याय से बनता है: जनता का भरोसा और जनता की पसंद एक ही बात नहीं है। अदालत का फैसला किसी व्यक्ति की इच्छा के मुताबिक होने से ही भरोसा नहीं बनता। भरोसा तब बनता है, जब हारने वाला पक्ष भी यह महसूस करे कि उसके साथ निष्पक्ष प्रक्रिया अपनाई गई।

न्यायिक संस्थानों में लगातार निगरानी जरूरी: किसी जिले में अदालत का मौजूद होना पर्याप्त नहीं है। आम नागरिक के लिए न्याय व्यवस्था तक पहुंचना आसान होना चाहिए और उसे यह भरोसा होना चाहिए कि अदालत तक पहुंचना ही उसकी सबसे बड़ी लड़ाई नहीं बन जाएगा।

मौजूदा सिस्टम में बदलाव संभव हैं: उन्होंने कहा कि कॉलेजियम और कार्यपालिका के बीच संवाद में कोई बड़ी बाधा नहीं है। मौजूदा व्यवस्था में सुधार संभव है और कोई भी संस्था स्थिर या बदलाव से दूर नहीं हो सकती।

सूर्यकांत 2019 को सुप्रीम कोर्ट के जज बने, 2026 में चीफ जस्टिस

CJI सूर्यकांत को 24 मई 2019 को भारत के सुप्रीम कोर्ट का जज बनाया गया था। उन्होंने 24 नवंबर 2025 को भारत के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली थी।

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