CJI Suryakant Statement | Judiciary Protects Indian Constitution Values

CJI Suryakant Statement | Judiciary Protects Indian Constitution Values

नई दिल्ली4 मिनट पहले

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CJI Suryakant Statement | Judiciary Protects Indian Constitution Values

CJI सूर्यकांत ने कहा कि भारतीय न्यायपालिका संविधान की संरक्षक है। न्यायपालिका किसी पक्ष या विपक्ष के लिए फैसला नहीं करती, बल्कि संवैधानिक मूल्यों के आधार पर निर्णय लेती है।

ये बातें CJI ने डीडी न्यूज को दिए इंटरव्यू में कहीं। उन्होंने कहा- संविधान को देश की सबसे बड़ी ताकत है। संविधान की मूल संरचना की रक्षा और उसे मजबूत करना न्यायपालिका की सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा, “न्यायपालिका किसी पक्ष या विपक्ष के लिए फैसला नहीं करती। वह संवैधानिक मूल्यों और संविधान की रक्षा के लिए समर्पित होकर निर्णय लेती है।”

CJI सूर्यकांत ने कहा कि देश की सबसे बड़ी ताकत संविधान है। इसी वजह से संविधान को सर्वोच्च माना गया है। उन्होंने बताया कि संविधान में समानता, गरिमा, कानून का राज, लोकतांत्रिक मूल्य और स्वतंत्र न्यायपालिका जैसे मौलिक अधिकारों की गारंटी दी गई है।

उन्होंने कहा, “इस बुनियादी संवैधानिक ढांचे की रक्षा और मजबूती में भारतीय न्यायपालिका की निर्णायक भूमिका है। न्यायपालिका को इस भूमिका के लिए प्रतिबद्ध रहना होगा।”

CJI का दावा- संविधान की मूल संरचना नहीं बदलेगी

CJI ने कहा कि देश की परिस्थितियों में बदलाव के बावजूद संविधान की मूल संरचना वही रहेगी। उन्होंने कहा, “इसे बदला नहीं जा सकता। हमें इसी सम्मान और गरिमा के साथ इसे मजबूत करना होगा।”

न्यायिक सक्रियता और निष्पक्षता को लेकर चल रही बहस पर CJI ने कहा- समाज के कमजोर और वंचित लोगों के लिए अदालतों का हस्तक्षेप उसकी संवैधानिक जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि देश की बड़ी आबादी सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़ी है। ऐसे लोग अपने कानूनी और संवैधानिक अधिकारों के लिए आसानी से अदालत का रुख नहीं कर पाते।

ज्यूडीशियरी में जनहित याचिका-सुओ मोटो जरूरी

CJI ने कहा कि ऐसे लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए जनहित याचिका यानी PIL और सुओ मोटो मामले जरूरी साधन हैं।

उन्होंने कहा, “समुदाय के अधिकारों, लोगों के अधिकारों, सामाजिक अधिकारों और संवैधानिक अधिकारों के लिए कदम उठाना हमारी जिम्मेदारी है। अदालत खुद कार्रवाई कर सकती है या कोई व्यक्ति जनता के प्रतिनिधि के तौर पर जनहित याचिका के जरिए अदालत आ सकता है। कई बार सुओ मोटू कार्रवाई या किसी दूसरे तरीके से भी कदम उठाए जाते हैं।”

उन्होंने कहा कि इन अधिकारों की रक्षा करना न्यायपालिका की संवैधानिक जिम्मेदारी है, लेकिन लोग इस जिम्मेदारी को न्यायिक सक्रियता कहते हैं।

CJI ने बताया कि पारंपरिक मामलों में आम तौर पर दो पक्षों के बीच सुनवाई होती है। इसके उलट, ऐसे मामलों में कोई व्यक्ति अपने निजी अधिकार के लिए नहीं, बल्कि जनता या समाज के बड़े हिस्से के अधिकारों से वंचित किए जाने का मुद्दा अदालत के सामने रखता है।

उन्होंने कहा, “इस सक्रियता का असली मतलब यही है कि पारंपरिक तरीके से दो पक्षों के बीच मामला सुनने के बजाय कोई व्यक्ति जनता या समाज के किसी बड़े हिस्से के अधिकार से वंचित किए जाने की बात अदालत के सामने रखता है।”

CJI ने कहा कि इस माध्यम से अदालत उन लोगों का अधिकार वापस दिलाती है, जो सीधे अदालत के सामने मौजूद नहीं होते, लेकिन किसी प्रतिनिधि के जरिए अदालत तक पहुंचते हैं।

उन्होंने कहा, “इसलिए न्यायिक सक्रियता को किसी और रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह हमारी कानूनी और संवैधानिक जिम्मेदारी का अभिन्न हिस्सा है।”

केस पेंडेंसी कम करने पर जोर

CJI सूर्यकांत ने अदालतों में लंबित मामलों को कम करने और केस मैनेजमेंट पर भी बात की। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने भारत के मुख्य न्यायाधीश का पद संभाला, तब उनकी प्राथमिकता केवल प्रशासनिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं थी।

उन्होंने कहा, “ऐसे कई दूसरे क्षेत्र हैं, जिनमें हमें काम करके सफलता हासिल करनी है। देश में लंबित मामलों को लेकर हमने विशेष कदम उठाने का फैसला किया। इसके लिए हमने केस मैनेजमेंट की एक आसान योजना बनाई, जिसे अदालत में डॉकेट मैनेजमेंट कहा जाता है।”

CJI ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट और जिला अदालतों में संवैधानिक पीठों के गठन और कुछ मामलों को समूह में रखने से न्यायिक कामकाज को व्यवस्थित करने में मदद मिली है।

उन्होंने कहा कि कुछ मामले बेहद संवेदनशील या महत्वपूर्ण होते हैं। इनका देश और अलग-अलग अदालतों पर बड़ा असर पड़ता है, जिसके चलते हजारों मामले लंबित रह जाते हैं।

CJI ने कहा, “हमने सबसे पहले ऐसे मामलों की सुनवाई का फैसला किया। इसके तहत संवैधानिक पीठों का गठन किया गया और कई मामलों को एक साथ रखा गया। इसका मकसद ऐसे मामलों की पहचान करना था, जिनकी सामूहिक सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों को कम करने में मदद मिल सके।”

उन्होंने कहा कि ऐसे कई फैसलों के जरिए सुप्रीम कोर्ट की पेंडेंसी पर काम किया गया। इसके साथ ही अलग-अलग सुधारों के माध्यम से हाईकोर्ट और जिला अदालतों में भी जमीनी स्तर पर निर्णायक भूमिका निभाई गई।

24 मई 2019 को सुप्रीम कोर्ट के जज बने थे

CJI सूर्यकांत को 24 मई 2019 को भारत के सुप्रीम कोर्ट का जज बनाया गया था। उन्होंने 24 नवंबर 2025 को भारत के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली थी।

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