भारतीय जूडोका ईशरूप नारंग कांस्य पदक लाने से चूक गईं। ईशरूप का महिला 78 किग्रा के कांस्य पदक मुकाबले में कनाडा की कोरोली गॉडबाउट से सामना हुआ। ईशरूप हालांकि, भारत के खाते में एक और पदक नहीं जोड़ सकीं। इसके साथ ही भारत का जूडो में अभियान समाप्त हो गया है। ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों की जूडो स्पर्धा में भारत ने दो स्वर्ण, एक रजत और एक कांस्य के साथ चार पदक जीते।
जूडो में दो स्वर्ण सहित जीते चार पदक
भारत ने राष्ट्रमंडल खेलों की जूडो स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन किया। भारत के लिए अस्मिता डे और हर्ष सिंह ने अपने-अपने वजन वर्गों में स्वर्ण पदक जीते, जबकि यामिनी मौर्य को रजत और उन्नति शर्मा को कांस्य पदक मिला था। ईशरूप के पास कांस्य लाने का मौका था, लेकिन वह ऐसा करने में सफल रहीं। ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों के अंतिम दिन जूडो में भारत की ओर से ईशरूप के अलावा अवतार सिंह और यश घंघास भी चुनौती पेश करने उतरे थे। अवतार और यश शुरुआती दौर में ही बाहर हो गए थे, जबकि ईशरूप ने रेपचेज के जरिये कांस्य पदक मुकाबले में जगह बनाई थी।
अवतार-यश का निराशाजनक प्रदर्शन
भारत के अवतार सिंह को पुरुषों के 100 किग्रा वर्ग के प्री क्वार्टर फाइनल में साइप्रस के अरिस्टोस माइकल के खिलाफ इप्पोन से हार का सामना करना पड़ा। वहीं यश, घंघास भी पुरुषों के 100 किग्रा से अधिक वजन वर्ग में राउंड 16 में वेल्स के जोशुआ व्हाइटहाउस से 0-1 से हारकर प्रतियोगिता से बाहर हो गए। व्हाइटहाउस ने मुकाबले के बीच में एक निर्णायक युको हासिल किया और अंत तक अपनी बढ़त बनाए रखी। चार मिनट तक चले मुकाबले में यश को दो पेनल्टी भी मिलीं और वह वापसी नहीं कर सके। इसके साथ ही उनका अभियान पहले ही दौर में समाप्त हो गया। युको खिलाड़ी के प्रतिद्वंद्वी को गिराने या प्रतिद्वंद्वी को पांच से नौ सेकेंड तक ‘होल्ड-डाउन’ करने पर दिया जाता है। वहीं इप्पोन जूडो का सर्वोच्च अंक होता है। इप्पोन मिलते ही मुकाबला तुरंत समाप्त हो जाता है।