मध्यप्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव में भाजपा 6016 वोटों से हार गई। हार के बाद दैनिक भास्कर ने भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी से पूछा कि आखिर ‘सपूत’ कौन नहीं निकला? इस पर उन्होंने कहा कि भाजपा के लोग कांग्रेस के षड्यंत्र का शिकार हुए। वहीं, कांग्रेस
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सबसे पहले बात आशुतोष की…
सवाल: जनसमर्थन मिला, फिर कहां कमी रह गई?
जवाब: जनादेश सिर झुकाकर स्वीकार किया है। अपने सभी शुभचिंतक, कार्यकर्ता, मतदाता भाई-बहनों से मैंने जो कहा था, उसका स्मरण कराया है। मैंने बोला है कि भारतीय जनता पार्टी हमारी मां है, तो मां के साथ हमारा कौन सा व्यवहार होना चाहिए? और मां तो मां होती है, अगर हम सपूत का व्यवहार नहीं करते… तो ठीक नहीं है।
सवाल: क्या लगता है किसने सपूत का व्यवहार नहीं किया?
जवाब: हमारे कुछ लोग जाने-अनजाने में कांग्रेस के षड्यंत्र का शिकार हुए हैं। जो षड्यंत्र का शिकार हुए हैं, वो हमारे अपने ही हैं। हमारा अपना एक ही सूत्र वाक्य है कि हम सबके और सब हमारे। सुबह के भूले शाम को इस बात को जरूर समझेंगे कि पार्टी मां होती है और कैरेक्टर को हमेशा एक… भेद कर रखना चाहिए।
सवाल: आगे की क्या रणनीति है?
जवाब: कोई रणनीति नहीं, साधारण कार्यकर्ता हूं, कार्यकर्ताओं के बीच में रहूंगा, कोई बात ही नहीं है। साधारण कार्यकर्ता हूं। कार्यकर्ताओं के सुख-दुख में साथ रहूंगा, हमेशा शामिल रहूंगा, उपलब्ध रहूंगा।

नामांकन के आखिरी दिन एक सभा में नरोत्तम ने आशुतोष को जिताने का वादा किया था। हर दरवाजे पर शीश झुकाने की बात भी कही थी।

सोमवार को उपचुनाव में हार के बाद काउंटिंग स्थल से लौटते आशुतोष तिवारी।
अब बात विजयी प्रत्याशी घनश्याम की…
सवाल: जीत के बाद कैसा महसूस कर रहे हैं?
जवाब: अच्छा महसूस कर रहा हूं, लेकिन डर भी लग रहा है। जनता ने मुझ पर भरोसा जताया है। यह उपचुनाव था और आमतौर पर माना जाता है कि उपचुनाव में सत्ता पक्ष को बढ़त मिलती है। पूरा मंत्रिमंडल, मुख्यमंत्री, दोनों उपमुख्यमंत्री और कई मंत्री यहां डटे रहे।
जनता को प्रलोभन देने, दबाव बनाने और धमकाने जैसी कोशिशें भी हुईं। इसके बावजूद जनता ने मुझे जिताया है। अब लोगों की उम्मीदें मुझसे बहुत बढ़ गई हैं। यही चिंता है कि उनकी अपेक्षाओं पर कैसे खरा उतर पाऊंगा और इसके लिए कितनी मेहनत करनी होगी।
सवाल: क्या आपको लगता है कि भीतरघात का असर चुनाव पर पड़ा?
जवाब: हां, भीतरघात का असर पड़ा। मेरा मानना है कि इससे करीब दो से पांच हजार वोट प्रभावित हुए।

कांग्रेस से टिकट नहीं मिलने के बाद अवधेश नायक नाराज थे, तब भाजपा प्रत्याशी आशुतोष उनसे मिलने पहुंचे थे। हालांकि, नायक ने कांग्रेस के लिए प्रचार किया था।

उपचुनाव जीतने के बाद कांग्रेस के घनश्याम सिंह ने मीडिया से बात की।
सवाल: शुरुआती राउंड में बड़ी बढ़त थी, लेकिन आखिरी दौर में अंतर कम हो गया। इसकी क्या वजह रही?
जवाब: आखिरी दो राउंड में जहां बड़ा अंतर आया, वह बसई क्षेत्र है। ये दतिया से काफी दूर है और चारों तरफ उत्तर प्रदेश व शिवपुरी जिले से घिरा हुआ है। वहां बड़े पैमाने पर पैसा और शराब बांटी गई। उत्तर प्रदेश के कुछ भाजपा नेताओं की भी भूमिका रही। हमारी भी थोड़ी कमी रही कि हम उनके चुनावी मैनेजमेंट को पूरी तरह रोक नहीं पाए।
सवाल:अब आपकी पहली प्राथमिकता क्या रहेगी?
जवाब: मेरी पहली प्राथमिकता दतिया में अमन-चैन और सामाजिक सौहार्द बनाए रखना होगी। जुआ, सट्टा और नशीले पदार्थों के कारोबार पर रोक लगाना जरूरी है, क्योंकि ये युवाओं को गलत दिशा में ले जाते हैं। युवाओं को रचनात्मक दिशा देना हमारी जिम्मेदारी होगी।
आज राजनीति में जाति और धर्म के नाम पर समाज में जहर घोलने का काम हो रहा है। भाजपा, बसपा और एएसपी (भीम आर्मी) सभी अपने-अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए समाज को बांट रहे हैं। नेताओं की भाषा भी लगातार मर्यादा से बाहर होती जा रही है। पहले ऐसी परंपरा नहीं थी। हमें फिर से आपसी भाईचारे और सम्मान की संस्कृति को मजबूत करना होगा।
सवाल: विधायक बनने के बाद आपका पहला अभियान क्या होगा?
जवाब: सबसे पहला अभियान जुआ और सट्टे के खिलाफ रहेगा। इस पर सख्ती से कार्रवाई कराई जाएगी।
जानिए किस राउंड में किसने मारी बाजी…


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दतिया उपचुनाव का नतीजा सिर्फ एक सीट का फैसला नहीं, बल्कि दोनों दलों की रणनीति और भविष्य की राजनीति का संकेत भी बन गया। मुख्यमंत्री, मंत्री, विधायक और संगठन की पूरी ताकत झोंकने के बावजूद बीजेपी प्रत्याशी आशुतोष तिवारी कांग्रेस के घनश्याम सिंह से 6,016 वोटों से हार गए। 2023 में भी कांग्रेस ने इसी सीट पर डॉ. नरोत्तम मिश्रा को 7,742 वोटों से हराया था। पढ़ें पूरी खबर
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