Dewas News: बैलगाड़ी दौड़ में उमड़ा जनसैलाब, शेरा-शक्ति की जोड़ी रही विजेता; विजेताओं को मिली बुलेट-बाइक

Dewas News: बैलगाड़ी दौड़ में उमड़ा जनसैलाब, शेरा-शक्ति की जोड़ी रही विजेता; विजेताओं को मिली बुलेट-बाइक

देवास जिले के सतवास तालाब मैदान में ग्रामीण खेलों की भव्यता देखने को मिली। यहां राष्ट्रीय स्तर की बैलगाड़ी दौड़ प्रतियोगिता आयोजित हुई। करीब

15 हजार से अधिक लोग इस आयोजन के साक्षी बने। बैतूल, बाबई, छिंदवाड़ा, हरदा, खंडवा, इंदौर और महाराष्ट्र से आईं 100 से ज्यादा बैलगाड़ियां मैदान में उतरीं। प्रतियोगिता बुधवार सुबह 10 बजे शुरू होकर शुक्रवार सुबह 10 बजे तक चली। विजेताओं को बुलेट, मोटरसाइकिल, इलेक्ट्रिक स्कूटी जैसे आकर्षक इनाम दिए गए।

आधुनिक दौर में भले ही बैलगाड़ी दौड़ की परंपरा धीरे-धीरे सिमटती जा रही हो, लेकिन सतवास में इसका उत्साह आज भी बरकरार है। कन्नौद रोड स्थित तालाब मैदान में आयोजित प्रतियोगिता में पूरी रात बड़ी संख्या में दर्शक मैदान और तालाब की पाल पर जमे रहे तथा रोमांचक मुकाबलों का आनंद लेते रहे। रातभर मैदान पर मेले जैसा माहौल बना रहा।




Crowds gathered for the bullock cart race in Dewas, the pair of Shera and Shakti emerged victorious.

देवास के सतवास में बैलों की दौड़ देखने उमड़े हजारों लोग
– फोटो : अमर उजाला


प्रतियोगिता के फाइनल मुकाबलों में मगरिया के पदम पटेल के बैल शेरा-शक्ति ने शानदार प्रदर्शन करते हुए प्रथम स्थान हासिल किया और प्रथम पुरस्कार के रूप में रॉयल एनफील्ड बुलेट जीती। द्वितीय स्थान पर मगरिया के काव्यांश पटेल के बैल टाइगर और बाव्या रहे, जिन्हें पल्सर बाइक पुरस्कार स्वरूप प्रदान की गई। तृतीय स्थान पर छोटी हरदा के प्रहलाद पटेल के बैल रहे, जिन्हें बाइक पुरस्कार में मिली। वहीं चतुर्थ स्थान पर रामभरोस जानी के बैल बाव्या-विराट रहे, जिन्हें इलेक्ट्रिक स्कूटी प्रदान की गई। सभी विजेता बैल मालिकों को शील्ड एवं सम्मान देकर पुरस्कृत किया गया।

 


Crowds gathered for the bullock cart race in Dewas, the pair of Shera and Shakti emerged victorious.

विजेता बैलों का जुलूस भी निकाला गया।
– फोटो : अमर उजाला


बैलों का जुलूस निकला

प्रथम पुरस्कार जीतने के बाद विजेता बैल शेरा-शक्ति का बैंड-बाजों के साथ नगर में भव्य जुलूस निकाला गया। जुलूस सतवास के प्रमुख मार्गों से होकर गुजरा, जहां जगह-जगह लोगों ने विजेता बैलों का तिलक कर पुष्पमालाएं पहनाईं और उनका स्वागत किया। वहीं बैल मालिक पदम पटेल का भी नागरिकों द्वारा सम्मान किया गया। बड़ी संख्या में ग्रामीण और दौड़ प्रेमी जुलूस में शामिल हुए, जिससे पूरे नगर में उत्सव जैसा माहौल बना रहा। उल्लेखनीय की दर्शकों में सबसे ज्यादा उत्साह बैल शेरा को लेकर रहता है, क्योंकि शेरा ने अपने मालिक को कई इनाम जितवाए हैं। महाराष्ट्र में आयोजित प्रतियोगिता में भी शेरा की बदौलत ही पहला इनाम ट्रैक्टर का मिला था।

प्रतियोगिता की सबसे खास बात यह रही कि बदलते दौर में भी बैलगाड़ी दौड़ के प्रति लोगों का जुनून कम नहीं हुआ है। एक ओर जहां यह परंपरा धीरे-धीरे विलुप्त होती जा रही है, वहीं सतवास में उमड़ी भीड़ ने साबित कर दिया कि ग्रामीण संस्कृति और लोक खेलों के प्रति लोगों का लगाव आज भी कायम है। बैलगाड़ियों की रफ्तार, दर्शकों का उत्साह और पूरी रात चले मुकाबलों ने इस आयोजन को यादगार बना दिया।आयोजन समिति अध्यक्ष नर्मदा पटेल,हेमंत देदड़,मुकेश सेवर आदि ने आयोजन को सफल बनाने के लिए नागरिकों का आभार माना है।

 


Crowds gathered for the bullock cart race in Dewas, the pair of Shera and Shakti emerged victorious.

सतवास की बैल दौड़ प्रतियोगिता में हिस्सा लेने महाराष्ट्र तक बैल लाए गए थे।
– फोटो : अमर उजाला


शेरा की कहानी

ग्राम मगरिया के उन्नत किसान पदम पटेल ने 3 वर्ष पूर्व शेरा को मात्र 4.50 रुपए में खरीदा था। आज उसे दौड़प्रेमी 21 लाख में खरीदने को तैयार है। लेकिन मालिक उसको बेचना नही चाहते। शेरा अभी तक करीब 50 लाख रुपये का इनाम जीत चुका है। मुंबई,नासिक,नागपुर,सतारा जैसे बड़े शहरों में भी शेरा ने स्पर्धाओं में भाग लेकर इनाम जीते हैं। पदम पटेल ने बताया कि उनके पास शेरा, टाइगर और भाव्या तीन बैल हैं और सतवास की प्रतियोगिता में इनमें विजेता और उपविजेता ये तीनों ही रहे। शेरा के साथ शक्ति नाम का बैल जामली के किसान का है। उनकी जोड़ है इसलिए उसको बुलाना पड़ता है। शेरा प्रतिदिन 10 लीटर दूध पीता है। इसके अलावा उसको ताकत के लिए बादाम, उडद के लड्डू, माखन, अंजीर भी समय समय पर दिया जाता है। शेरा को प्रतिदिन नहलाया जाता है और एक घंटे मालिश की जाती है।प्रतिदिन करीब तीन किमी तक घुमाया जाता है। यही नही गर्मी से बचाव के लिए कूलर की हवा दी जाती है। किसी भी दौड़ में हजारों लोग सिर्फ शेरा को देखने आते हैं।


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