28 फरवरी को जब इस्राइल और अमेरिका ने मिलकर ईरान पर हमला बोला था, तब पूरी दुनिया के सामने यह खुलकर सामने आया कि दोनों ही देश एक-दूसरे से खुलकर खुफिया जानकारियां साझा कर रहे हैं। धीरे-धीरे अलग-अलग रिपोर्ट्स में भी यह साफ होने लगा कि आखिर कैसे इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ईरान पर हमले के लिए तैयार किया। यहां तक कि कौन सी खुफिया जानकारी उनसे साझा की और कौन से खतरों पर ट्रंप को आगाह किया, जिसके चलते दोनों देशों ने साथ में ही ईरान पर हमला बोला।
हालांकि, अब ईरान युद्ध के बीच में ही अमेरिका और इस्राइल के बीच दरार पड़ती नजर आ रही है। दरअसल, हाल ही में अमेरिकी रक्षा विभाग ने इस्राइल की जासूसी के जोखिम को लेकर अलर्ट जारी किया है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पहले इस्राइली खुफिया गतिविधियों को लेकर जो सतर्कता उच्च स्तर पर थी, अब उसे बढ़ाकर क्रिटिकल यानी संकटपूर्ण घोषित कर दिया गया है। सीधे शब्दों में समझें तो अमेरिका को इस्राइली खुफिया तंत्र की तरफ से जासूसी का खतरा और ज्यादा महसूस होने लगा है।
Source link
#Explainerकय #अमरक #क #जसस #कर #रह #इसरइल #कय #टरप #परशसन #न #जर #कय #अलरट #पहल #कबकस #हआ #ऐस #Israel #Alleged #Spying #Espionage #Pentagon #Report #Donald #Trump #Benjamin #Netanyahu #Alert #Iran #War #Explained



