Explainer:तीन मिनट के हाइड्रेशन ब्रेक पर क्यों छिड़ी बहस, सवाल- खिलाड़ियों को बचा रहे या रोमांच बिगाड़ रहे? – Fifa World Cup 2026 Hydration Breaks: Player Safety Measure Or Disruption To The Game? Explainer
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फीफा विश्व कप 2026 में पहली बार एक ऐसा नियम लागू किया गया है, जिसने खिलाड़ियों की सुरक्षा और खेल के स्वरूप को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको की संयुक्त मेजबानी में खेले जा रहे इस विश्व कप में फीफा ने सभी मैचों में प्रत्येक हाफ के बीच तीन मिनट का अनिवार्य हाइड्रेशन ब्रेक लागू किया है। इसका उद्देश्य खिलाड़ियों को अत्यधिक गर्मी से बचाना और उनके स्वास्थ्य की रक्षा करना है, लेकिन इस फैसले के समर्थकों और विरोधियों दोनों के अपने-अपने तर्क हैं।
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हाइड्रेशन ब्रेक
– फोटो : AP/Reuters
क्यों लागू किया गया नया नियम?
विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 का विश्व कप इतिहास के सबसे गर्म टूर्नामेंटों में से एक साबित हो सकता है। अमेरिका के कई शहरों में तापमान 35 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच रहा है। इसी खतरे को देखते हुए फीफा ने यह फैसला लिया कि हर मैच में, मौसम कैसा भी हो, खिलाड़ियों को बीच में तीन मिनट का हाइड्रेशन ब्रेक दिया जाएगा। फीफा का कहना है कि यह नियम सभी टीमों के लिए समान परिस्थितियां सुनिश्चित करता है और पिछले टूर्नामेंटों के अनुभवों के आधार पर तैयार किया गया है।
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हाइड्रेशन ब्रेक
– फोटो : AP/Reuters
आलोचना क्यों हो रही है?
कई कोच और फुटबॉल विशेषज्ञ मानते हैं कि भीषण गर्मी में ब्रेक उचित हैं, लेकिन हर मैच में इन्हें अनिवार्य बनाना जरूरी नहीं है।
आलोचकों का कहना है कि इससे खेल की गति और रोमांच प्रभावित होता है।
इसके अलावा प्रसारण कंपनियां इन ब्रेक्स का उपयोग विज्ञापनों के लिए कर रही हैं, जिससे कुछ फैंस को लगता है कि फुटबॉल का नैचुरल फ्लो में रुकावट आ रही है।
कई कोचों का यह भी मानना है कि इन ब्रेक्स के दौरान रणनीति बदलने का मौका मिल जाता है, जिससे मैच का संतुलन प्रभावित हो सकता है।
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हाइड्रेशन ब्रेक
– फोटो : AP/Reuters
गर्मी खिलाड़ियों के लिए कितनी खतरनाक?
खेल विज्ञान के विशेषज्ञों के अनुसार गर्म और उमस भरे मौसम में खेलने से खिलाड़ियों को ‘एक्सर्शनल हीट इलनेस’ यानी अत्यधिक शारीरिक गर्मी से जुड़ी बीमारी का खतरा होता है।
इसके लक्षणों में मांसपेशियों में ऐंठन, अत्यधिक थकान, प्रदर्शन में गिरावट, सिरदर्द, चक्कर आना, उल्टी जैसा महसूस होना और डिहाइड्रेशन शामिल हैं।
जापान की वासेदा यूनिवर्सिटी की खेल वैज्ञानिक यूरी होसोकावा ने कहा, ‘जब शरीर का आंतरिक तापमान 40.5 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच जाता है तो खिलाड़ी भ्रमित हो सकता है, आक्रामक व्यवहार कर सकता है या बेहोश भी हो सकता है।
यह हीट स्ट्रोक के गंभीर संकेत हैं और तत्काल चिकित्सा सहायता की जरूरत होती है।’ विशेषज्ञों के अनुसार खेल के दौरान होने वाला हीट स्ट्रोक खिलाड़ियों की मौत के प्रमुख कारणों में शामिल है।
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– फोटो : AP/Reuters
डिहाइड्रेशन कैसे बढ़ाता है खतरा?
वैज्ञानिकों के मुताबिक गर्म मौसम में खिलाड़ी एक घंटे में एक से दो लीटर तक पसीना बहा सकते हैं। अक्सर खिलाड़ी उतना पानी नहीं पी पाते जितना शरीर से बाहर निकल जाता है। शोध बताते हैं कि यदि शरीर के वजन का केवल दो प्रतिशत हिस्सा भी पानी की कमी के कारण कम हो जाए तो खिलाड़ी के प्रदर्शन पर असर पड़ सकता है। इससे निर्णय लेने की क्षमता, प्रतिक्रिया समय और शारीरिक दक्षता प्रभावित होती है।