इंदौर में आयोजित एक कार्यक्रम में साध्वी ऋतम्भरा ने अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए कहा कि इंदौर उनकी संघर्षभूमि है और यहीं से उनके सार्वजनिक जीवन की महत्वपूर्ण यात्रा शुरू हुई। उन्होंने कहा कि भारत का इतिहास ऐसे युवाओं से भरा है, जिन्होंने अपने त्याग, तप और समर्पण से राष्ट्र का निर्माण और पोषण किया। समाज में जागृति लाने के लिए कभी-कभी चिंगारी भी देनी पड़ती है, लेकिन भारतीय संस्कृति का मूल उद्देश्य रिश्ते जोड़ना और उन्हें निभाना है।
उन्होंने भारतीय संस्कृति की विशेषता बताते हुए कहा कि हम चंद्रमा से भी अपना रिश्ता स्थापित करने वाले लोग हैं। भारतीय परिवारों के बच्चे तुलसी के पौधों की तरह होते हैं, जिन्हें वासनाओं की शराब से नहीं, बल्कि गंगाजल जैसे संस्कारों से सींचा जाता है। राम जन्मभूमि आंदोलन का उल्लेख करते हुए साध्वी ऋतम्भरा ने कहा कि उनके गुरु ने पहले ही बता दिया था कि यह आंदोलन शुरू होने के बाद व्यक्तिगत जीवन का मोह समाप्त हो जाएगा, लेकिन भगवान श्रीराम के लिए सब कुछ न्योछावर करना ही उनका संकल्प था।
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उन्होंने वर्ष 1990 के आंदोलन की यादें साझा करते हुए कहा कि उस समय उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने कहा था कि अयोध्या में “परिंदा भी पर नहीं मार सकता।” इसके बावजूद रामभक्तों का उत्साह नहीं टूटा। उन्होंने बताया कि वे संत का वेश धारण कर कानपुर से यात्रा कर रही थीं। ट्रेन में कुछ लोग राम मंदिर के विरोध में बातें कर रहे थे, लेकिन संवाद के माध्यम से उन्होंने उनके विचार बदलने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि राम मंदिर 500 वर्षों के संघर्ष, बलिदान और आस्था का प्रतीक है।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन पर टिप्पणी करते हुए साध्वी ऋतम्भरा ने कहा कि वहां कुछ लड़कियां आंदोलन करने के बजाय अभद्र भाषा का प्रयोग कर रही थीं, जो उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य यह होना चाहिए था कि समाज में पुरुष मां-बहन के लिए अपशब्दों का प्रयोग न करें। उन्होंने युवाओं से मर्यादित भाषा और शालीन व्यवहार अपनाने की अपील की।
अयोध्या स्थित राम मंदिर में हुई चोरी की घटना पर उन्होंने कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है और इसने पूरे समाज को शर्मसार किया है। उन्होंने कहा कि बड़े समाज में कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जो पूरे राष्ट्र और समाज को लज्जित कर देते हैं। श्रद्धा से चढ़ाए गए धन पर गिद्ध-दृष्टि रखना गंभीर और दंडनीय अपराध है। दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि राम जन्मभूमि की यह घटना इसलिए भी अधिक पीड़ादायक है, क्योंकि वहां पिछले 500 वर्षों से केवल धन नहीं, बल्कि लोगों ने अपने प्राणों तक का बलिदान दिया है।
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