मध्यप्रदेश पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर प्रदेशभर के साथ-साथ इंदौर में भी स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा कदम उठाया गया है। यातायात पुलिस और परिवहन विभाग द्वारा चलाए गए 10 दिवसीय संयुक्त विशेष चेकिंग अभियान के तहत इंदौर में नियमों की धज्जियां उड़ाने वाली स्कूल बसों पर सख्त कार्रवाई की गई है। 8 जुलाई से 17 जुलाई तक चले इस अभियान के दौरान पुलिस टीमों ने मुस्तैदी दिखाते हुए सड़कों से लेकर स्कूलों के परिसरों तक जाकर 1 हजार से ज्यादा बसों को खंगाला।
अभियान के मुख्य आंकड़े
कुल जांच की गई बसें: 1126
कार्रवाई के दायरे में आईं बसें: 163 (सुरक्षा मानकों और दस्तावेजों में कमी पाए जाने पर)
अभियान की अवधि: 8 जुलाई से 17 जुलाई (10 दिन)
कई बड़े हादसे हो चुके
इंदौर में समय-समय पर होने वाले बस हादसे यह याद दिलाते हैं कि सुरक्षा मानकों में जरा सी भी लापरवाही मासूमों की जान पर भारी पड़ सकती है। इंदौर के इतिहास में स्कूल बस हादसों का जिक्र आते ही दिल्ली पब्लिक स्कूल (DPS) की बस का वह खौफनाक हादसा सामने आ जाता है, जिसमें कनाडिया बाईपास पर बस और ट्रक की भीषण भिड़ंत हुई थी। उस हादसे में स्टीयरिंग फेल होने और स्पीड गवर्नर न चलने के कारण कई स्कूली बच्चों और बस चालक की असमय मौत हो गई थी। इंदौर के कई अंदरूनी और बाईपास मार्गों पर चल रहे निर्माण कार्यों और उनके कारण लगने वाले ट्रैफिक जाम के बीच स्कूल बसों की सुरक्षा और भी संवेदनशील हो जाती है। ऐसे रास्तों पर अनियंत्रित गति या तकनीकी खराबी किसी बड़े हादसे को न्योता दे सकती है। यही वजह है कि ऐसे अभियानों के जरिए प्रशासन बसों की फिटनेस को लेकर जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रहा है।
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इन सुरक्षा मानकों पर रही पैनी नजर
एडिशनल डीसीपी (पश्चिम) संतोष कुमार कौल के मुताबिक, यह कार्रवाई केवल चालान काटने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित सुरक्षा गाइडलाइन और मोटर वाहन अधिनियम के सख्त प्रावधानों को लागू करवाना है। जांच के दौरान कई बिंदुओं को परखा गया। इसमें देखा गया कि बसों में सीसीटीवी (CCTV), जीपीएस (GPS), स्पीड गवर्नर (गति नियंत्रक) और इमरजेंसी एग्जिट (आपातकालीन द्वार) चालू स्थिति में हैं या नहीं। बस के भीतर फर्स्ट एड बॉक्स की उपलब्धता है या नहीं। वाहनों के परमिट, फिटनेस सर्टिफिकेट, बीमा (इंश्योरेंस) और ड्राइवरों के लाइसेंस की वैधता भी चेक की गई।
चौराहों पर भी चेकिंग जारी
पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह चेकिंग सिर्फ बड़ी बसों तक सीमित नहीं है। स्कूल के बच्चों को लाने-ले जाने वाले वैन, ऑटो और मैजिक की भी चौराहों पर लगातार रैंडम चेकिंग की जा रही है ताकि हर स्तर पर बच्चों का सफर सुरक्षित बनाया जा सके।
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