
वसीम के अनुसार इंदौर में बचाए गए 54 बच्चों में अधिकांश बाल मजदूरी करते हुए मिले। कई बच्चों को कारखानों, दुकानों और अन्य स्थानों पर काम कराया जा रहा था। समय रहते कार्रवाई होने से इन्हें सुरक्षित निकाला जा सका, लेकिन आशंका है कि अभी भी कई बच्चे ऐसे नेटवर्क के चंगुल में फंसे हो सकते हैं। संस्था का कहना है कि चाइल्ड ट्रैफिकिंग केवल कानून-व्यवस्था का नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी का विषय है। यदि आम लोग सतर्क रहें और संदिग्ध गतिविधियों की समय पर जानकारी दें, तो कई मासूमों का बचपन बर्बाद होने से बचाया जा सकता है।
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