Ladakh Protest News | Sonam Wangchuk Announces Agitation Against Govt

Ladakh Protest News | Sonam Wangchuk Announces Agitation Against Govt

नई दिल्ली5 घंटे पहले

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Ladakh Protest News | Sonam Wangchuk Announces Agitation Against Govt

लद्दाख के एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने लेह और कारगिल के नेताओं की बुधवार को दिल्ली में हुई बैठक पर निराशा जताई। वांगचुक ने कहा कि अगर लद्दाख के मुद्दे पर सरकार से कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला तो 19 से 24 सितंबर तक फिर आंदोलन करेंगे।

उन्होंने दैनिक भास्कर से कहा- हमें सरकार पर भरोसा है इसलिए हर बार सरकार के साथ बातचीत करने आते हैं। उम्मीद है कि ये भरोसा न टूटे।

वांगचुक ने कहा कि दिल्ली में बैठक बहुत अच्छे माहौल में हुई लेकिन उसमें कुछ निकला नहीं। चार महीने पहले जो फैसले हुए थे, उन्हें ही दोहराया गया। कोई नया प्रस्ताव नहीं आया और लद्दाख की मांगों पर भी सरकार ने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। सरकार ने स्थानीय शासन और जमीन से जुड़े नियमों में बड़े बदलाव न करने का आश्वासन भी नहीं दिया।

इससे पहले उन्होंने X पर लिखा- आज हमें मशहूर कॉमेडियन जसपाल भट्टी की मीटिंग्स की याद आ रही है। जैसा कि हमने अंदाजा लगाया था, 9 सितंबर को हुई यह मीटिंग लद्दाख का ध्यान 10 सितंबर से शुरू होने वाले बड़े लेह से कारगिल पदयात्रा मार्च से हटाने के लिए बस एक गुमराह करने वाली बात लग रही है। दुर्भाग्य से भरोसा कम हो रहा है और अविश्वास बढ़ रहा है।

छठी अनुसूची की मांग का उद्देश्य

लद्दाख के स्थानीय लोग और नागरिक संगठन, जैसे लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस, संविधान की छठी अनुसूची को लागू करने की मांग कर रहे हैं।

इसका मुख्य उद्देश्य लद्दाख की 97% से ज्यादा जनजातीय आबादी की पहचान, उनकी अनूठी संस्कृति, भाषा और पर्यावरण को बाहरी हस्तक्षेप से बचाना है।

छठी अनुसूची के तहत स्वायत्त जिला परिषदें स्थानीय लोगों को ये अधिकार देती हैं-

  • जमीन की सुरक्षा: बाहरी लोगों को जमीन खरीदने या कब्जा करने से रोकने के लिए नियम बनाए जा सकते हैं।
  • संस्कृति की सुरक्षा: शादी, तलाक, विरासत और स्थानीय परंपराओं पर अपने नियम बनाए जा सकते हैं।
  • स्थानीय प्रशासन: स्थानीय लोग अपने क्षेत्र के विकास और संसाधनों से जुड़े फैसले खुद ले सकते हैं।

सितंबर 2025 में आंदोलन के दौरान हिंसा भड़की

लद्दाख को राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर सोनम वांगचुक ने सितंबर 2025 में आंदोलन किया था। इस दौरान 24 सितंबर को लेह में हिंसा हो गई थी। इन प्रदर्शनों में 4 लोगों की मौत हो गई थी और 90 लोग घायल हुए थे।

हिंसा के दो दिन बाद 26 सितंबर को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत वांगचुक को हिरासत में लिया गया था। इसके बाद उन्हें फौरन जोधपुर शिफ्ट कर दिया था। 170 दिन से वे जोधपुर जेल में थे। उन्हें 14 मार्च को रिहा किया गया था।

वांगचुक का लद्दाख में जन्म, श्रीनगर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की

वांगचुक का जन्म 1966 में लेह जिले के अल्ची के पास, लद्दाख में हुआ था। उनके गांव में स्कूल न होने के कारण 9 साल की उम्र तक उनका किसी स्कूल में दाखिला नहीं हुआ। इस दौरान उनकी मां ने उन्हें बुनियादी शिक्षा दी।

9 साल की उम्र में उन्हें श्रीनगर ले जाया गया और वहां एक स्कूल में दाखिला दिलाया गया। बाद में दिल्ली के विशेष केंद्रीय स्कूल में भी उन्होंने पढ़ाई की। फिर नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी यानी NIT, श्रीनगर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में BTech किया।

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