फाइनल में ऑस्ट्रेलियाई मुक्केबाज से मिली हार
फाइनल मुकाबले में लवलीना का सामना ऑस्ट्रेलिया की एम्मा-सू ग्रीनट्री से हुआ। दोनों खिलाड़ियों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली, लेकिन जजों ने 4-1 के विभाजित फैसले से ऑस्ट्रेलियाई मुक्केबाज के पक्ष में निर्णय दिया। मुकाबले के दौरान लवलीना ने कई सटीक पंच लगाए और अंत तक संघर्ष किया, लेकिन ग्रीनट्री की आक्रामक रणनीति और बेहतर रिंग कंट्रोल को निर्णायकों ने अधिक अंक दिए।
हर बड़े मंच पर पदक जीतने वाली तीसरी भारतीय मुक्केबाज
इस रजत पदक के साथ लवलीना का नाम भारतीय मुक्केबाजी के दिग्गजों की सूची में और मजबूत हो गया है। उनके खाते में अब ओलंपिक कांस्य, विश्व चैंपियनशिप में एक स्वर्ण और दो कांस्य, एशियाई खेलों का रजत और कॉमनवेल्थ गेम्स का रजत शामिल हो गया है। उन्होंने 69 किग्रा और 75 किग्रा दोनों भार वर्गों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शानदार सफलता हासिल की है।
भारत के ऐतिहासिक मुक्केबाजी अभियान में अहम योगदान
ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय मुक्केबाजों ने अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। भारत ने मुक्केबाजी में सात स्वर्ण और तीन रजत समेत कुल 10 पदक जीतकर नया इतिहास रचा। लवलीना का रजत पदक इस ऐतिहासिक अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। हालांकि वह स्वर्ण पदक से चूक गईं, लेकिन उनका यह प्रदर्शन एक बार फिर साबित करता है कि वह लगातार बड़े मंचों पर भारत के लिए पदक जीतने वाली सबसे भरोसेमंद मुक्केबाजों में शामिल हैं।
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