प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज ऑस्ट्रेलिया दौरे पर भारतीय समुदाय को संबोधित किया। मेलबर्न के मार्वल स्टेडियम में 30,000 से अधिक लोग जुटे हैं। यह ऑस्ट्रेलिया में किसी भी विश्व नेता के लिए आयोजित अब तक की सबसे बड़ी सभाओं में से एक मानी जा रही है। प्रधानमंत्री ने ‘ग्रो मोर, अचीव मोर’ नारे के साथ भारत के युवाओं की आकांक्षाओं को भी रेखांकित किया। पीएम मोदी ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में यह मेरी तीसरी यात्रा है, जो एक हैट्रिक है। 21वीं सदी का भारत एक विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में काम कर रहा है। आज का भारत कहता है ‘ग्रो मोर, अचीव मोर’।
भारत में हो रहे विकास / प्रयासों पर क्या बोले पीएम मोदी?
उन्होंने कहा, भारत 6जी तकनीक पर काम कर रहा है, क्योंकि अब भारतीय कहते हैं ‘ग्रो मोर, अचीव मोर’। आज, चिप से लेकर जहाजों तक, भारत में बन रहे हैं। देश में विनिर्माण का नया तंत्र विकसित हो रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने ऑस्ट्रेलियाई समकक्ष का जिक्र करते हुए वहां मौजूद प्रवासी भारतीयों से उनके सम्मान में फ्लैश लाइट जलाने को कहा। उनके ऐसा कहने के बाद पूरा स्टेडियम मोबाइल की फ्लैश लाइट से जगमगा उठा।
भारतीयता हमेशा जिंदा रही, पीएम ने पूछा- दोनों देशों के मजबूत रिश्ते में किसकी भूमिका?
पीएम मोदी ने कहा, भारत और ऑस्ट्रेलिया के रिश्ते किस ऊंचाई पर हैं, ये सब जानते हैं। इसमें सबसे बड़ी भूमिका मोदी की नहीं, इसमें आप सभी साथियों की भूमिका है। इंडियन डायस्पोरा की भूमिका है। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘साथियों आप में से कई साथी फर्स्ट टाइम ऑस्ट्रेलिया आए और कईयों का जन्म जन्म भी यही हुआ। पीढ़ियां बदल गई। लेकिन भीतर की भारतीयता हमेशा हमेशा जिंदा रही।… साथियों, हम भारतीय ऐसे ही हैं जैसे दूध में चीनी मिल जाती है। उसे और मीठा कर देती है। वैसे ही हम भारतीय दुनिया में अपने प्रेम का रंग घोलते रहते हैं। घर में दूध ऑस्ट्रेलिया वाला आता है लेकिन चाय भारत वाली बनती है। अरे चाय वाला दाल सब्जियां ऑस्ट्रेलिया की है लेकिन उनमें तड़का मसालों का ही लगता है।’
अटेस्टेशन का उदाहरण देकर पीएम मोदी ने क्या समझाया?
अटेस्टेशन यानी दस्तावेजों को प्रमाणित करने की प्रक्रिया का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा, अटेटेस्टेशन की मजबूरी कुछ साल पहले तक बहुत कॉमन हुआ करती थी। यानी कुछ भी करना हो। कहीं भी अप्लाई करना हो अपने डॉक्यूमेंट किसी अधिकारी से अटैच कराने ही पड़ते थे। कतार में खड़े रहना पड़ता था सुबह-सुबह और क्या काम था यह बताने के लिए कि हां तुम वही हो। हमारे लिए तो नागरिक देवो भवा अब यह स्थिति नहीं है। अब ज्यादातर काम सेल्फ अटेस्टेशन से ही चल जाता है। वहां से जो यात्रा शुरू हुई वो भारत में डीजी लॉकर तक पहुंच गई है। एक ऐसी डिजिटल व्यवस्था जिसमें भारतीय अपने डॉक्यूमेंट्स डिजिटल फॉर्मेट में रख सकते हैं। इसमें एक क्लिक में डॉक्यूमेंट शेयर होता है, वेरीफाई होता है, एक्सेप्ट होता है।
700 मिलियन से ज्यादा डीजी लॉकर यूजर
पीएम मोदी ने कहा, व्यवस्था बनाना एक चीज है। उसे स्केल और सिक्योर फीचर के साथ बनाना बहुत बड़ी उपलब्धि होती है। आज भारत में डीजी लॉकर यूजर्स का आंकड़ा जरा याद रखना कठिन है। इस वक्त 70 करोड़ यानी 700 मिलियन से ज्यादा डीजी लॉकर यूजर हैं और इनमें 850 करोड़ से अधिक डॉक्यूमेंट स्टोर है, यानी 80 करोड़ से अधिक।
पीएम मोदी के भाषण की कुछ मुख्य बातें
- आप सभी ने पासपोर्ट से जुड़ी परेशानियां भी सही होगी। आप याद कीजिए कितने हफ्ते लगते थे पासपोर्ट बनने में? लेकिन आज पासपोर्ट औसतन कुछ ही दिनों में मिल जाता है।
- भारत का सामर्थ्य जितना बढ़ता है उसका फायदा पूरी मानवता को होता है। हमारे संस्कार हैं- सर्वे भवंतु सुखिन: यानी सब सुखी रहें। यही शाश्वत संस्कार आज भी भारत की नीतियों को निर्धारित करते हैं।
- वेनेजुएला में भूकंप की इतनी बड़ी त्रासदी आई। इतना बड़ा विनाश हुआ। सैकड़ों लोगों की जान गई। हमने दूरी कितनी है देखा नहीं। हमने वेनेजुएला की उस पीड़ा को अपनी पीड़ा समझा। भारत ने रिलीफ और रेस्क्यू के लिए ऑपरेशन चलाया।
- तुर्किये और सीरिया में जब भूकंप आया तब भी भारत ने बहुत तेजी से राहत और बचाव के लिए मदद भेजी थी।
- पिछले साल हमने म्यांमार में ऑपरेशन ब्रह्मा चलाया। श्रीलंका में साइक्लोन की तबाही हुई तो ऑपरेशन सागर बंधु चलाया।
- कोरोना काल की यादें भी आज तक हमारे मन में ताजा है। हमने दुनिया भर से भारत के ही नहीं अन्य देशों के नागरिकों को भी अपने अपने घर पहुंचाया।
- कोरोना जैसी महामारी के बीच भारत ने जरूरतमंदों तक दवाई पहुंचाई। 100 से अधिक देशों को वैक्सीन भेजी।
- युद्ध क्षेत्रों में भी भारत ने संकट में फंसे व्यक्तियों को बाहर निकालने के लिए भरसक प्रयास किया।
- भारत जब मदद करता है तो पासपोर्ट नहीं देखता। भारत जब मदद भेजता है तो पासपोर्ट का रंग नहीं देखता। इसलिए दुनिया भी भारत पर इतना विश्वास करती है।
- मानवता के हित में काम करने में ऑस्ट्रेलिया की भी बहुत बड़ी भूमिका है। यह हम दोनों देशों की पार्टनरशिप का एक अहम पिलर है
क्या भारत का हेल्थ केयर सिस्टम नागरिक देवो भव का उदाहरण?
प्रधानमंत्री ने कहा, आज करोड़ों भारतीयों के पास एक सिक्योर डिजिटल हेल्थ आईडी है। इसमें हेल्थ रिकॉर्ड्स की पूरी हिस्ट्री डिजिटली स्टोर होती है। इससे भारत में डायग्नोसिस और बेहतर हो रहा है और इससे इलाज की व्यवस्था और सुधर रही है। यही नहीं टेली कंसल्टेशन का चलन भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। भारत का एक ई संजीवनी प्लेटफार्म है। इससे अभी तक 48 करोड़ 48 करोड़ यानी 480 मिलियन टेली कंसल्टेशन हो चुकी है। इस प्लेटफार्म से सवा दो लाख से अधिक हेल्थ केयर प्रोवाइडर जुड़े हैं।
खेल के क्षेत्र में भारत की भूमिका पर क्या बोले पीएम मोदी?
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, हम दोनों देशों की साझेदारी को एक और सेक्टर मजबूती देता है। यह सेक्टर है स्पोर्ट्स खेलकूद। स्पोर्ट्स की दुनिया में ऑस्ट्रेलिया अपने आप में एक ब्रांड है। लेकिन भारत में भी स्पोर्ट्स इकोसिस्टम ट्रांसफॉर्म हो रहा है। साथियों आपने खेलो इंडिया मिशन का नाम सुना होगा। यह सिर्फ एक स्पोर्ट्स पॉलिसी नहीं है। यह अभियान स्कूल लेवल से ही हजारों खिलाड़ियों का एक पूल तैयार कर रहा है। भारत में स्कूल यूनिवर्सिटी, नेशनल लेवल, स्कूल लेवल खेलो इंडिया गेम्स होते हैं। इनमें लाखों एथलीट्स पार्टिसिपेट करते हैं। इस मिशन के तहत भारत के रिमोट एरियाज में भी स्पोर्ट्स इंफ्रा तैयार किया जा रहा है। इससे ज्यादा से ज्यादा एथलीट्स को खासतौर पर हमारी बेटियों को ज्यादातर अवसर मिल रहे हैं और यह सिर्फ शहरों तक सीमित नहीं है।
2030 के कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत मेजबान
सांसद, खेल, महाकुंभ जैसे आयोजनों से गांवगांव में स्पोर्ट्स को फिटनेस से जोड़ा जा रहा है। करियर ओपोरर्चुनिटी से कनेक्ट किया जा रहा है। और यह जो कुछ भी हो रहा है, इसका इंपैक्ट फील्ड में दिख रहा है। भारत के एथलीट्स, भारत की टीम बेटर से बेस्ट होती जा रही है। साथियों, यही कॉन्फिडेंस भारत को स्पोर्टिंग लीग के नेक्स्ट लेवल पर ले जा रहा है। 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स भारत होस्ट कर रहा है। भारत 2036 ओलंपिक्स को होस्ट करने का भी दावेदार है। मुझे पूरा विश्वास है स्पोर्ट्स के क्षेत्र भी ऑस्ट्रेलिया और भारत की पार्टनरशिप का और विस्तार होके रहेगा।

‘केम छो’ और वणक्कम से संबोधन की शुरुआत?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजराती भाषा में वहां मौजूद जनता से उनका हाल भी पूछा। पीएम मोदी ने ‘केम छो’ और वणक्कम जैसे भारतीय अभिवादनों के साथ प्रवासी भारतीयों के साथ संवाद की शुरुआत करते हुए सिडनी में हुए कार्यक्रम को भी याद किया। पीएम मोदी ने कहा कि जिस गर्मजोशी के साथ उनका स्वागत किया ये अद्भुत है। उन्होंने कहा कि वे इतने शानदार स्वागत के लिए अपने दोस्त और ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री अल्बानीज के आभारी हैं।
मेलबर्न मीट्स मोदी कार्यक्रम की झलकियां?
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सम्मान में आयोजित सामुदायिक कार्यक्रम में भारत का राष्ट्रगान गूंजा।
- विक्टोरिया की प्रीमियर जेसिंटा बोलीं- भारत ट्रेड का नहीं बल्कि ट्रस्ट का सबब है।
- 1991 में वह पहली बार बैकपैकर के रूप में भारत आए थे ऑस्ट्रेलिया के मौजूदा प्रधानमंत्री अल्बानीज।
- पीएम मोदी ने कहा- कुछ दिन बाद ही मेलबर्न में इंडियन फिल्म फेस्टिवल शुरू होने वाला है। मैं इसके सफल आयोजन की शुभकामनाएं देता हूं।
भारत क्या कर रहा है? प्रधानमंत्री ने सबकुछ गिनाया
पीएम मोदी ने कहा, साथियों 21वीं सदी का भारत आज विकसित होने के लक्ष्य पर काम कर रहा है। हम 140 करोड़ एस्पिरेशन से भरे राष्ट्र हैं। हम अधीर हैं। बेसब्र है। हम दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती इकॉनमी है। लेकिन हम जल्द से जल्द दुनिया की टॉप थ्री इकॉनमी बनना चाहते हैं। क्योंकि हमारी प्रेरणा है ग्रो मोर अचीव मोर। ग्रो मोर ग्रो मोर ग्रो मोर। पीएम मोदी ने कहा;
- साथियों भारत अब स्पेस में अपना गगनयान भेजने की तैयारी कर रहा है। भारत अब अपना स्पेस स्टेशन बनाने के लक्ष्य पर चल रहा है।
- कुछ साल पहले तक 5G टेक्नोलॉजी को लेकर बड़े सवाल देश के सामने थे। कब लॉन्च होगी? कैसे रोल आउट होगा? कितना समय लग जाएगा? हमने 2022 के अंत में 5G रोल आउट करना शुरू किया। और आज भारत के 99% जिले इससे कवर्ड हो चुके हैं।
- आपको खुशी होगी दोस्तों भारत 5G का फास्टेस्ट रोल आउट करने वाले देशों में से एक देश है। आज भारत दुनिया का दूसरा बड़ा 5G मार्केट बन चुका है।
- भारत आज मेड इन इंडिया 6G टेक्नोलॉजी पर तेजी से काम कर रहा है।
- पिछले 12 वर्षों में भारत के दो दर्जन से अधिक शहरों में मेट्रो नेटवर्क पहुंच चुका है।
- आज भारत में हर दिन सवा करोड़ से अधिक लोग मेट्रो में सफर करते हैं। भारत दुनिया का तीसरा बड़ा मेट्रो नेटवर्क वाला देश है। लेकिन हम हम भारतीय इससे भी संतुष्ट नहीं है।
- मैन्युफैक्चरिंग का भारत में एक नया इको सिस्टम डेवलप किया जा रहा है।
- भारत का नागरिक बी द पीपल और इन सपनों को एनर्जी दे रहा है। पीपल फर्स्ट यानी नागरिक देवो भव का मंत्र ये आज के भारत की गवर्नेंस का मूल मंत्र बन गया है।
ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र कर क्या बोले पीएम मोदी?
प्रधानमंत्री ने कहा, ‘हम कहते हैं ग्रोमर ग्रोमर इसलिए हम भारत में नमो भारत रैपिड रेल और वंदे भारत जैसे सेमी हाई स्पीड नेटवर्क को तेजी से बढ़ा रहे हैं। एक और उदाहरण मेक इन इंडिया का है। बीते 12 वर्षों में मेक इन इंडिया ग्लोबल ब्रांड बन गया है। हमारे मोबाइल फोन, हमारे इलेक्ट्रॉनिक्स, दुनिया भर में पहुंचे। हमारे ऑटोमोबाइल, हमारे फार्मा प्रोडक्ट का ग्लोबली और विस्तार हुआ। भारत के डिफेंस प्लेटफार्म की कैपेबिलिटी और क्रेडिबिलिटी दुनिया देख रही है। आपने आपने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ऑपरेशन सिंदूर के दौरान डेमो तो देख ही लिया होगा। धमाके आतंकियों के अड्डों पर हो रहे थे और गूंज पूरी दुनिया में सुनाई दे रही थी।
पीएम मोदी का स्वागत कैसे हुआ?
इससे पहले दिन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मेलबर्न पहुंचने पर भारतीय समुदाय के लोगों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। बड़ी संख्या में लोग ठंड के मौसम की परवाह किए बिना उनका स्वागत करने पहुंचे। पूरे माहौल में ‘भारत माता की जय’ और ‘मोदी, मोदी’ के नारे लगातार गूंजते रहे।

भारतीय समुदाय के स्वागत पर पीएम मोदी ने क्या कहा?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय समुदाय के स्नेह और आत्मीय स्वागत की सराहना करते हुए इसे ‘सचमुच अविस्मरणीय’ बताया। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा, ‘मेलबर्न का मौसम भले ही ठंडा हो, लेकिन भारतीय समुदाय से मिला गर्मजोशी भरा स्वागत सचमुच अविस्मरणीय था। उनका स्नेह और भारत के साथ उनका अटूट जुड़ाव हमेशा मेरे लिए खुशी और गर्व का विषय रहा है।’
मेलबर्न का कार्यक्रम हाउसफुल, यह ब्लॉकबस्टर है?
पीएम मोदी ने कहा, ‘मैं उस जमीन के पारंपरिक मालिकों को नमन करते हुए अपनी बात शुरू करना चाहता हूं जहां हम मिल रहे हैं और मैं उनके बुजुर्गों – चाहे वे पहले के हों, अभी के हों या आने वाली पीढ़ी के – को सम्मान देता हूं। यह कार्यक्रम हाउसफुल है। यह ब्लॉकबस्टर है… इससे पहले मैं आप सभी से सिडनी में दो बार मिल चुका हूं। मैं मेलबर्न के लोगों से मिलने का भी इंतज़ार कर रहा था। इसलिए इस बार मैंने सोचा कि मैं मेलबर्न के लोगों के साथ ‘फ्लैट व्हाइट कॉफी’ पीऊंगा।’

अलग-अलग टाइम जोन का जिक्र क्यों?
उन्होंने कहा, यहां कई साथी ऐसे होगें जिनके घरों में कम से कम दो टाइम जोन चलते हैं। यहां बच्चे स्कूल से घर तो ऑस्ट्रेलियाई समय के हिसाब से आते हैं, लेकिन भारत में दादा-दादी, नाना- नानी वीडियो कॉल पर इंतजार कर रहे होते हैं। जब यहां वीकेंड होता है, तो भारत में किसी शादी की लाइव-स्ट्रीमिंग चल रही होती है। यानी, दूरी हजारों किलोमीटर की है, लेकिन रोजमर्रा की जिंदगी अब भी भारत से जुड़ी हुई है।
पीएम मोदी देश में जेन जी और भजन क्लबिंग के ट्रेंड पर क्या बोले?
प्रधानमंत्री ने कहा, ‘दोस्तों, आपने सुना होगा कि भारत में आजकल ‘भजन क्लबिंग’ का नया ट्रेंड चल रहा है। हमारी जेन जी (Gen Z) इसे आगे बढ़ा रही है। और यहां ऑस्ट्रेलिया में भी, मैंने सुना है कि आपके वीकेंड भी आस्था और आध्यात्मिकता से भरे होते हैं। कहीं किसी के घर में भगवान सत्यनारायण की कथा हो रही है, तो कहीं गुरुद्वारे में प्रार्थना, कहीं बच्चे भांगड़ा कर रहे हैं या भरतनाट्यम की प्रस्तुति दे रहे हैं, या फिर कोई क्रिकेट टूर्नामेंट चल रहा है।’

अहमदाबाद से मेलबर्न के रिश्ते पर पीएम मोदी क्या बोले?
2023 में हुए सिडनी के कार्यक्रम का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा, प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज सिडनी में भी साथ थे। आज यहां मेलबर्न में भी भारतीय समुदाय के बीच आए और एक प्रकार से, यह एक पूरा चक्र बन गया है। अहमदाबाद, जहां दुनिया का सबसे बड़ा क्रिकेट मैदान है और मेलबर्न, जहां एक मशहूर स्टेडियम है हम दोनों साथ रहे हैं। हम सबने देखा है कि जब प्रधानमंत्री अल्बानीज बोलते हैं, तो वे भारतीयों के दिल और दिमाग में छा जाते हैं।
21वीं सदी के भारत का लक्ष्य क्या?
पीएम मोदी ने प्रवासी भारतीयों के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा, आप सभी अपनी ऑस्ट्रेलिया की ग्रोथ को अपने परिश्रम से सींच रहे हैं। लेकिन मैं जानता हूं कि आपकी एक नजर हमेशा भारत पर रहती है। आप भारत की गतिविधियों, उसकी प्रगति इसकी खोज खबर आप लेते रहते हैं। दोस्तों, 21वीं सदी का भारत विकसित बनने के लक्ष्य पर काम कर रहा है। एक सपना पूरा होता है, तो दूसरा सपना जन्म लेता है। पहले कहा जाता था, ‘एक दीप से जले दूसरा, जलते दीप हजार’, लेकिन आज मैं कहता हूं, ‘एक सपने से जन्मे दूसरा सपना, सपने जन्मे हजार’

प्रधानमंत्री मेलबर्न में भारतीयों की मौजूदगी पर क्या बोले?
देश की विविधता का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा, मेलबर्न एक ही दिन में चार सीजन के दर्शन करा देता है। लेकिन भारतीय समुदाय ने अपने सांस्कृतिक रंगों से इसे और भी जीवंत बना दिया है। यहां मेलबर्न में और आस-पास काफी ऐसे स्थान और बाजार हैं जो भारतीयता के रंगों से भरे हैं। कोई इन्हें ‘लिटिल इंडिया’ कहता है, कोई ‘मिनी इंडिया’ कहता है। नाम जो भी हो, लेकिन रंग भारतीयता से भरे हुए हैं। किसी ने मुझे ऐसे ही एक बाजार का वीडियो दिखाया। वीडियो में बता रहे थे कि वहां खूब सेल चलती रहती है और इस सेल के चक्कर लोग ‘गन-चक्कर’ बन जाते हैं। शॉपिंग करने का मन न हो, फिर भी खरीददारी करनी ही पड़ती है। मैं सही कह रहा हूं न? सेल का आकर्षक होता है, है ना?। प्रधानमंत्री के ऐसा कहने पर स्टेडियम में मौजूद दर्शकों ने पूरे जोश के साथ उनके कथन का समर्थन किया।
चांद के दक्षिणी ध्रुव पर भारत के कदम, 2014 का जिक्र कर क्या बोले पीएम मोदी?
अंतरिक्ष जगत में भारत की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा, ‘आपने देखा है कि भारत ने मून के साउथ पोल पर पर चंद्रयान उतारा है। दुनिया में कोई और देश ऐसा नहीं कर पाया… भारत अब अपना गगनयान भेजने की तैयारी कर रहा है। भारत अब अपना स्पेस स्टेशन बनाने के लक्ष्य पर काम कर रहा है।’ अपने 2014 के ऑस्ट्रेलिया दौरे को याद करते हुए कहा कि उस समय करीब 28 वर्षों के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने ऑस्ट्रेलिया की यात्रा की थी। उस दौरान मैंने कहा था कि अगली बार भारत के प्रधानमंत्री के आने के लिए लोगों को 28 साल इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
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प्रधानमंत्री ने व्यापार और ट्रेड एग्रीमेंट का जिक्र कर क्या कहा?
पीएम मोदी ने कहा, आपने एक शेर सुना होगा। आपको तो याद भी होगा। मैं अकेला ही चला था। जानिब ए मंजिल मगर, लोग साथ आते गए और कारवां बनता गया। ऐसे ही भारत और ऑस्ट्रेलिया का एग्रीमेंट महज एक शुरुआत थी। आज ये कारवां दुनिया के लगभग 40 देशों के साथ ट्रेड एग्रीमेंट तक पहुंच चुका है। हम केवल ट्रेडिंग नेशन नहीं है। हम इनोवेशन को साइंस एंड टेक्नोलॉजी को महत्व देते हैं। ऑस्ट्रेलिया की अनेक उपलब्धियां हैं। हियरिंग इंप्लांट, वाईफाई, सर्वाइकल कैंसर वैक्सीन, फ्लाइट ब्लैक बॉक्स, सीक्रेट बैलेट वोटिंग ऐसे कितने इनोवेशंस हैं जिनमें ऑस्ट्रेलिया का एक बड़ा रोल रहा है। आज ये पूरी दुनिया को बेहतर बनाने का काम कर रहे हैं।
भारत नवाचार के मोर्चे पर क्या कर रहा है?
उन्होंने कहा, भारत भी अपने साइंस टेक और इनोवेशन इकोसिस्टम को ट्रांसफॉर्म कर रहा है। आपको यह जानकर खुशी होगी आज भारत के 10,000 स्कूलों में अटल टिंकरिंग लैब चल रही है। ये स्कूल लेवल पर ही इनोवेशन का माइंडसेट तैयार कर रही है। बीते 12 वर्षों में भारत दुनिया का तीसरा बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन गया है। आज भारत में 2 लाख से अधिक रजिस्टर्ड स्टार्टअप्स हैं। भारत में हर महीने 4000 से ज्यादा नए स्टार्टअप रजिस्टर हो रहे हैं। डिफेंस और स्पेस जैसे सेक्टर में भी सैकड़ों स्टार्टअप्स काम कर रहे हैं। इनके उदाहरण मैं इसलिए दे रहा हूं क्योंकि ये सारे सेक्टर पहले भारत में बंद थे। कुछ साल पहले ही इनको प्राइवेट एंटरप्रेन्योरशिप के लिए खोला गया।भारत का एक स्पेस स्टार्टअप बहुत जल्द अपने रॉकेट में पहली बार सेटेलाइट लॉन्च करने जा रहा है।
शिक्षा जगत के लिए क्या बोले पीएम मोदी?
बकौल प्रधानमंत्री मोदी, ‘एजुकेशनल स्किल इनोवेशन में भारत और ऑस्ट्रेलिया का रिश्ता और गहरा हो रहा है और मजबूत हो रहा है। आज ऑस्ट्रेलिया में हजारों भारतीय स्टूडेंट पढ़ रहे हैं और अब ऑस्ट्रेलियन यूनिवर्सिटी भारत में भी अपने कैंपस खोल रही है। बिकिन और वंगोंग यूनिवर्सिटी के कैंपस शुरू हो चुके हैं। और भी ऑस्ट्रेलियन यूनिवर्सिटीज इस तरफ आगे बढ़ रही है। और ये केवल नए कैंपस खोलने तक की बात नहीं है। यह दुनिया को स्किल इनोवेटिव टैलेंट देने का ग्लोबल लीडरशिप तैयार करने का भी अभियान है।
पीएम मोदी ने मेलबर्न के लोगों से क्या वादा कराया?
प्रधानमंत्री ने कहा, साथियों अब मैं आपसे एक आग्रह भी करूंगा। करूं? करोगे? मेरी बात मानोगे? वादा कुछ समय पहले हमने हमारी प्रवासी कम्युनिटी के बच्चों के लिए भारत को जानो क्विज की शुरुआत की है। यह क्विज दुनिया को भारत की डायवर्सिटी से परिचित कराती है और साथ ही भारतीय कम्युनिटी के परिवारों को अपनी विरासत से जोड़ती है। मुझे जानकर अच्छा लगा कि इस साल ऑस्ट्रेलिया में बहुत सारे युवा साथियों ने इस कार्यक्रम के कर्टन रेजर में पार्टिसिपेट किया। अब इस कंपटीशन के छठे संस्करण की शुरुआत होने जा रही है। इस बार गेमिफाइड मोड में बहुत से कंपटीशन होने जा रहे हैं। मैं ऑस्ट्रेलिया में भारतीय कम्युनिटी के सभी परिवारों से आग्रह करूंगा कि इसमें जरूर हिस्सा लें। लेकिन साथ-साथ आप ऑस्ट्रेलिया के दोस्तों को भी आपके स्कूल में पढ़ने वाले साथियों को, कॉलेज में पढ़ने वाले साथियों को उनको भी इस कंपटीशन में जरूर जोड़ें।
क्या भारत और ऑस्ट्रेलिया की पार्टनरशिप का अलग दौर आया?
पीएम मोदी ने कहा, साथियों आप सभी ने भारत ऑस्ट्रेलिया के रिश्तों को मजबूत बनाने में बहुत मेहनत की है। बहुत योगदान दिया है। लेकिन आपका काम यहां खत्म नहीं हुआ है। बल्कि यहां से आपकी जिम्मेदारियां और बढ़ गई है। अब भारत और ऑस्ट्रेलिया की पार्टनरशिप का एक अलग ही फेज शुरू हो रहा है। इसलिए आप ऐसे ही भारत ऑस्ट्रेलिया संबंधों को अपने जोश से भरते रहिए। चौके मारते रहिए। आपकी सफलता में ही भारत और ऑस्ट्रेलिया की सफलता है।
पीएम मोदी को लेकर क्या बोले ऑस्ट्रेलियाई पीएम और पूर्व प्रधानमंत्री?
ऑस्ट्रेलियाई पीएम अल्बानीज ने पीएम मोदी के संबोधन से पहले उनके आगमन पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी इस देश के सच्चे दोस्त हैं। अल्बानीज ने भारत यात्रा की यादों को साझा करते हुए कहा कि भारत में उनका भव्य स्वागत किया गया था। वे अहमदाबाद में मिले सम्मान को भुला नहीं सकते। वहीं, पूर्व प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने कहा, ‘यह हमेशा से बहुत अहम रहा है। प्रधानमंत्री मोदी और मेरे बीच बहुत अच्छे निजी और पेशेवर संबंध रहे हैं। ऑस्ट्रेलियाई और भारतीय प्रधानमंत्रियों के बीच संबंधों में करी और क्रिकेट को लेकर थोड़ी-बहुत हंसी-मजाक आम बात थी। लेकिन हम ‘क्वाड’ और इंडो-पैसिफिक में सकारात्मक भूमिका निभाने में इसकी अहमियत को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।’ पश्चिम एशिया के संघर्ष और परमाणु सहयोग पर वे आगे कहते हैं, ‘यह पहले से ही था। और यह पिछले दशक की शुरुआत में एबॉट सरकार के समय हुआ था, जब सिविल न्यूक्लियर पार्टनरशिप एग्रीमेंट लागू किया गया था। और इसकी शुरुआत तब हुई थी जब हमने भारत को यूरेनियम बेचना शुरू किया थ।’
‘बैकपैकर के रूप में भारत आया’
प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज ने कहा कि उनका भारत से जुड़ाव बहुत पुराना है। उन्होंने बताया कि 1991 में वह पहली बार एक बैकपैकर के रूप में भारत आए थे और छह सप्ताह तक देश के अलग-अलग हिस्सों की यात्रा की थी। इस दौरान उन्होंने स्वादिष्ट भोजन का आनंद लिया, लोगों की दिलचस्प कहानियां सुनीं और भारतीय परिवारों की मेहमाननवाजी का अनुभव किया। अल्बनीज ने कहा कि अगर किसी को भारत को सही मायने में समझना है, तो उसे ट्रेन में सफर करना चाहिए। उन्होंने कहा कि इतने वर्षों बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ऑस्ट्रेलियाई अंदाज में स्वागत करना उनके लिए सम्मान की बात है। उन्होंने यह भी कहा कि ऑस्ट्रेलियाई-भारतीय समुदाय हर संकट के समय सबसे पहले मदद के लिए आगे आता है और समाज के साथ मजबूती से खड़ा रहता है।
ऑस्ट्रेलिया की तरक्की में भारतीय समुदाय का बड़ा योगदान
एंथनी अल्बानीज ने कहा कि भारतीय समुदाय की मेहनत और उदारता ऑस्ट्रेलिया की प्रगति में अहम भूमिका निभा रही है। उन्होंने कहा कि भारतीय मूल के लोग हेल्थकेयर, आईटी और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा से देश को मजबूत बना रहे हैं। इसके अलावा भारतीय उद्यमी छोटे कारोबारों को आगे बढ़ा रहे हैं और बड़ी संख्या में भारतीय छात्र उच्च शिक्षा के लिए ऑस्ट्रेलिया आकर देश की शिक्षा व्यवस्था और अर्थव्यवस्था में योगदान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह योगदान खास तौर पर शिक्षा के प्रमुख केंद्र माने जाने वाले विक्टोरिया राज्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
भारत ट्रेड का नहीं बल्कि ट्रस्ट का सबब, किसने ऐसा कहा?
इससे पहले विक्टोरिया की प्रीमियर जेसिंटा ने पीएम मोदी का स्वागत किया। उन्होंने कहा, विक्टोरिया भारतीयों का सम्मान करता है, आपके मूल्यों का आदर करता है; हमारे लिए भारत ट्रेड का नहीं बल्कि ट्रस्ट का सबब है। उन्होंने इस मंच से भारत के लोगों को विक्टोरिया आने का न्योता दिया।
‘मेलबर्न मीट्स मोदी’ में उमड़ा जनसैलाब
‘मेलबर्न मीट्स मोदी’ नाम से आयोजित इस कार्यक्रम में भारतीय समुदाय का अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिला। पूरा स्टेडियम ‘मोदी, मोदी’ और ‘भारत माता की जय’ के नारों से गूंज उठा। बड़ी संख्या में पहुंचे लोगों ने इस आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया और हर तरफ उत्साह का माहौल दिखाई दिया।
मार्वल स्टेडियम में आखिर कैसा माहौल?
मेलबर्न का प्रसिद्ध मार्वल स्टेडियम भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय की भारी मौजूदगी से पूरी तरह गुलजार नजर आया। कार्यक्रम के दौरान सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, संगीत और देशभक्ति से ओत-प्रोत नारों ने माहौल को और भी ऊर्जावान बना दिया। हजारों लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंच पर आने का बेसब्री से इंतजार करते रहे।

भारत और ऑस्ट्रेलिया की दोस्ती की कैसी तस्वीर देखने को मिली?
पूरे स्टेडियम में भारत का तिरंगा और ऑस्ट्रेलिया का राष्ट्रीय ध्वज एक साथ लहराते दिखाई दिए। यह नजारा दोनों देशों के बीच मजबूत होते रिश्तों और भारतीय समुदाय के भारत से गहरे भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक बन गया।
भारतीय समुदाय ने पीएम मोदी को लेकर क्या कहा?
प्रधानमंत्री के संबोधन से पहले भारतीय समुदाय के कई सदस्यों ने अपनी खुशी और उत्साह साझा किया। एक सदस्य ने कहा कि सचमुच, मेलबर्न के दिल में आज इतिहास बन रहा है। एक अन्य व्यक्ति ने कहा, ‘मैं आज बेहद उत्साहित हूं और मोदी जी को देखने का बेसब्री से इंतजार कर रहा हूं। ‘मेलबर्न मीट्स मोदी’ हमारे लिए बेहद खास अवसर है।’ एक और अन्य सदस्य ने कहा, ‘मैं नरेंद्र मोदी का बहुत बड़ा प्रशंसक हूं। आज के आधुनिक और मजबूत भारत के निर्माण में उनका बड़ा योगदान रहा है। उन्होंने कई ऐतिहासिक फैसले लिए हैं, जिनकी वजह से भारत आज नई ऊंचाइयों पर पहुंच रहा है।’
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