नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। रतलाम और उसके आसपास का क्षेत्र केवल अपने ऐतिहासिक महत्व, राज परिवार द्वारा संजोई गई तस्वीर, संस्कृति और खानपान के लिए ही नहीं जाना जाता, बल्कि यह स्थान प्राकृतिक सौंदर्य के लिए भी विख्यात है। वर्षाकाल में यहां का सौंदर्य और भी निखर उठता है।
नदियां जहां कल-कल बहती हुई सुरों की ताल छेड़ती हैं, वहीं ऊंचाई से गिरने वाले झरने हर किसी को अपनी ओर खींच लेते हैं। प्रकृति का अनुपम नजारा ऐसा कि उसे निहारने वालों का मेला यहां लग जाता है। प्राकृतिक नजारों के बीच यहां आस्था का दीप भी जलता है और आधुनिक सुविधाओं का संगम भी नजर आता है।
भोलेनाथ के दर्शन के साथ प्रकृति को निहारने पहुंचते हैं लोग
भीषण तपन के बाद बरसात में छाई शीतलता, हरियाली और खूबसूरती पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर ही लेती है। रतलाम और उसके आसपास ऐसे कई स्थल हैं जिनकी खूबसूरती इस मौसम में कई गुना बढ़ जाती है। ऐसा ही एक स्थान है ‘सैलाना’। वही सैलाना जो खरमोर के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है। यहां दूर-दूर से लोग दर्शन-वंदन के साथ प्रकृति को निहारने और पिकनिक मनाने पहुंचते हैं।
सैलाना क्षेत्र के दोनों केदारेश्वर महादेव मंदिर आस्था का प्रमुख केंद्र बने हुए हैं। पहाड़ियों के बीच स्थित इन प्राचीन शिव मंदिरों में भगवान भोलेनाथ के दर्शन के लिए प्रतिदिन बड़ी संख्या में भक्त पहुंचते हैं। धार्मिक महत्व के साथ यहां का प्राकृतिक वातावरण भी लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है।
रतलाम जिला मुख्यालय से करीब 25 किलोमीटर और सैलाना नगर से लगभग चार किलोमीटर दूर अडवानिया रोड व सरवन रोड स्थित दोनों केदारेश्वर महादेव मंदिर हरियाली से आच्छादित खूबसूरत पहाड़ियों पर बने हुए हैं।
पहाड़ियों से गिरते झरने सुंदरता को और बढ़ा देते हैं
मुख्य मार्ग से करीब एक किलोमीटर अंदर स्थित इन मंदिरों तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को प्राकृतिक वातावरण के बीच से होकर गुजरना पड़ता है। दोनों मंदिरों की खासियत यहां झरने भी हैं। वर्षा के मौसम में पहाड़ियों से गिरते झरने मंदिर परिसर की सुंदरता को और बढ़ा देते हैं। हरियाली और शांत वातावरण के बीच भगवान शिव के दर्शन करने का अलग ही धार्मिक अनुभव श्रद्धालुओं को मिलता है।
श्रावण मास में यहां विशेष पूजा-अर्चना और अभिषेक का दौर चलता है। जिसके लिए जिले ही नहीं प्रदेश और देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु पहुंचते हैं। जिला मुख्यालय से सैलाना तक बस सुविधा उपलब्ध है, जहां से मंदिरों तक पहुंचने के लिए स्थानीय वाहन मिल जाते हैं।
देवझर का 45 फीट ऊंचा झरना आकर्षण का केंद्र
प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर देवझर इन दिनों पर्यटकों और श्रद्धालुओं की पहली पसंद बना हुआ है। रतलाम जिले से करीब 37 किलोमीटर और ग्राम आम्बा से लगभग 12 किलोमीटर दूर पहाड़ियों के बीच स्थित देवझर का करीब 45 फीट ऊंचा झरना वर्षाकाल में पूरे वेग से बहने लगता है। चारों ओर हरियाली से घिरी पहाड़ियां और झरने का मनमोहक दृश्य यहां पर्यटकों को आकर्षित करता है। देवझर धार्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण स्थान है।
यहां भगवान महादेव का प्राचीन मंदिर स्थित है। स्थानीय लोगों के अनुसार मंदिर करीब 500 वर्ष पुराना है। मंदिर परिसर में स्थित दो प्राचीन गुफाएं भी धार्मिक मान्यताओं का केंद्र हैं। देवझर पहुंचने के लिए रतलाम से सैलाना मार्ग होते हुए आम्बा और फिर कोटड़ा गांव तक वाहन से पहुंचा जा सकता है। इसके बाद करीब 600 मीटर पैदल मार्ग तय कर मंदिर और झरने तक पहुंचना पड़ता है।
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