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मध्यप्रदेश में आबादी की सरकारी भूमि पर काबिज ग्रामीणों को पहले पट्टा और अब मुफ्त रजिस्ट्री कराकर देने की राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना में नया पेंच सामने आया है। बुधवार को पंचायत राज संचालनालय ने आयुक्त भू-संसाधन एवं प्रबंधन को पत्र लिखकर कहा है कि रजिस्ट्री से पहले ग्राम पंचायत से नो ड्यूज या एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) लेने के मामले में नियमानुसार कार्रवाई की जाए। यह पत्र मध्यप्रदेश राज्य पंचायत परिषद, नई दिल्ली की ओर से पंचायत राज संचालनालय को लिखी गई चिट्ठी के आधार पर जारी किया गया है। प्रदेश में 17 सितंबर से स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना शुरू की गई थी। हालांकि, पटवारियों को निष्पादक (एक्जीक्यूटर) बनाए जाने पर कानूनी विवाद के चलते पटवारियों ने तीन हफ्ते तक काम नहीं किया था। इसके बाद राज्य सरकार ने स्पष्ट किया कि इस योजना में काम करने वाले किसी पटवारी के विरुद्ध न्यायालय में चालान की कार्रवाई के लिए सरकार अभियोजन स्वीकृति नहीं देगी। इसके बाद पटवारियों ने काम शुरू किया। पंचायतों की आमदनी बढ़ाने के लिए एनओसी लेने की मांग पिछले दस दिन में रजिस्ट्री कराने की प्रक्रिया तेज हुई है। प्रदेश के सभी जिलों में स्वामित्व योजना के हितग्राहियों के नाम पर रोज एक लाख से अधिक रजिस्ट्रियां होने लगी हैं। इसी बीच पंचायत राज संचालनालय का पत्र राजस्व विभाग तक पहुंच गया है। पत्र में कहा गया है कि स्वामित्व योजना के अंतर्गत आबादी भूमि की रजिस्ट्री से पहले ग्राम पंचायत से नो ड्यूज या एनओसी अनिवार्य किए जाने की मांग मध्यप्रदेश राज्य पंचायत परिषद, नई दिल्ली के प्रदेश अध्यक्ष अशोक सिंह सेंगर ने की है। सेंगर का कहना है कि एनओसी अनिवार्य किए जाने से पंचायतों की आमदनी बढ़ेगी और आय के नए स्रोत बनेंगे। इस पर पंचायत राज संचालनालय के संचालक छोटे सिंह ने आयुक्त भू-संसाधन एवं प्रबंधन से कहा है कि स्वामित्व योजना से संबंधित काम राजस्व विभाग द्वारा किया जा रहा है। इसलिए विभाग इस मामले में नियमानुसार कार्रवाई करे। एनओसी से संपत्ति कर की वसूली तेज होने की उम्मीद मुख्यमंत्री और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के मंत्री को भी मध्यप्रदेश राज्य पंचायत परिषद से संबद्ध अखिल भारतीय पंचायत परिषद की ओर से पत्र दिया गया है। इसमें कहा गया है कि रजिस्ट्री कराने वाले हितग्राहियों से एनओसी ली जाए। इसके जरिए यह सुनिश्चित किया जाए कि संबंधित हितग्राही पर संपत्ति कर बकाया नहीं है। आवास योजना का ऋण भी बकाया नहीं है। साथ ही, जिस भूमि की रजिस्ट्री कराई जा रही है, वह सार्वजनिक या अतिक्रमित भूमि नहीं है। परिषद का मानना है कि इससे पंचायतों की आय बढ़ने के साथ संपत्ति कर की वसूली भी तेज होगी। 50 लाख रजिस्ट्रियां होनी हैं, रोज एक लाख से अधिक हो रहीं प्रदेश में 27 अक्टूबर तक 7 लाख 62 हजार से अधिक रजिस्ट्रियां की जा चुकी हैं। अभियान के अंतर्गत अब हर दिन एक लाख से अधिक निःशुल्क रजिस्ट्रियां की जा रही हैं। योजना के माध्यम से प्रदेश के 40 हजार से अधिक गांवों के लगभग 50 लाख परिवारों को निःशुल्क रजिस्ट्री की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इससे ग्रामीणों को अपनी संपत्ति पर स्पष्ट कानूनी अधिकार मिलने के साथ ही बैंक से ऋण लेने का अवसर भी मिलेगा। सबसे ज्यादा रजिस्ट्रियां छिंदवाड़ा में, राजगढ़ दूसरे नंबर पर प्रदेश में सबसे अधिक 36,982 रजिस्ट्रियां छिंदवाड़ा जिले में हुई हैं। राजगढ़ 33,130 रजिस्ट्रियों के साथ दूसरे और सागर 29,543 रजिस्ट्रियों के साथ तीसरे स्थान पर है। वहीं, छतरपुर चौथे और शिवपुरी पांचवें स्थान पर है। सर्वाधिक रजिस्ट्री वाले टॉप-10 जिले विदिशा 11वें, इंदौर 20वें स्थान पर रजिस्ट्री के मामले में विदिशा 11वें स्थान पर है। यहां 22,093 रजिस्ट्रियां हुई हैं। वहीं, इंदौर 16,708 रजिस्ट्रियों के साथ 20वें स्थान पर है। इन जिलों में इतनी रजिस्ट्रियां हुईं रजिस्ट्री में भोपाल पिछड़ा, बॉटम-20 जिलों में शामिल स्वामित्व योजना के अंतर्गत रजिस्ट्री कराने के मामले में भोपाल की प्रगति धीमी है। जिले में 27 अक्टूबर तक सिर्फ 5,318 रजिस्ट्रियां हुई हैं। भोपाल कम रजिस्ट्री वाले 20 जिलों में शामिल है। सबसे कम 1,042 रजिस्ट्रियां मऊगंज में हुई हैं। इसके बाद अनूपपुर में 1,347 और उमरिया में 1,576 रजिस्ट्रियां हुई हैं। सबसे कम रजिस्ट्री वाले 20 जिले
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