MP में 88% बारिश, 37 जिलों में कोटा फुल नहीं:  भोपाल-ग्वालियर समेत 18 जिले ही आगे निकले; इंदौर, उज्जैन-जबलपुर पिछड़े – Bhopal News

MP में 88% बारिश, 37 जिलों में कोटा फुल नहीं: भोपाल-ग्वालियर समेत 18 जिले ही आगे निकले; इंदौर, उज्जैन-जबलपुर पिछड़े – Bhopal News

MP में 88% बारिश, 37 जिलों में कोटा फुल नहीं:  भोपाल-ग्वालियर समेत 18 जिले ही आगे निकले; इंदौर, उज्जैन-जबलपुर पिछड़े – Bhopal News


मानसूनी सीजन को अब 15 दिन बाकी बचे हैं, लेकिन मध्य प्रदेश में 88% बारिश ही हुई है। इंदौर, उज्जैन-जबलपुर समेत 37 जिलों में कोटा फुल नहीं हुआ है। भोपाल, ग्वालियर सहित 18 जिले ही आगे निकले हैं। आलीराजपुर में तो कोटे की आधी बारिश भी नहीं हुई, जबकि निवाड़ी में 49% पानी ज्यादा गिर चुका है। IMD (मौसम केंद्र) भोपाल की माने तो अगले 4 दिन तक प्रदेश में कहीं भी अति भारी या भारी बारिश का अनुमान नहीं है। बता दें कि प्रदेश के पश्चिमी हिस्से यानी- भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, चंबल और नर्मदापुरम संभाग के कई जिलों में पिछले चार दिन से भारी बारिश का दौर चल रहा था। सोमवार को भी कुछ जिलों में तेज बारिश रिकॉर्ड की गई, लेकिन मंगलवार से सिस्टम कमजोर हो जाएगा। इस वजह से 15 से 17 सितंबर तक प्रदेश में हल्की बारिश का दौर जारी रहेगा। पूर्वी हिस्से में रिकॉर्ड बारिश, लेकिन पश्चिम पिछड़ा
मौसम विभाग के अनुसार, इस बार प्रदेश के पूर्वी हिस्से- जबलपुर, सागर, रीवा और शहडोल संभाग में रिकॉर्ड बारिश हुई। सागर के निवाड़ी में कोटे से 49%, मऊगंज में 44%, सतना में 34%, मैहर में 29% पानी ज्यादा गिर गया। यदि इंच के हिसाब से बात करें तो मऊगंज में सबसे ज्यादा 54.9 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई। सतना में 50 इंच से ज्यादा पानी गिरा। दूसरी ओर, इंदौर संभाग के आलीराजपुर में सिर्फ 16 इंच पानी ही गिरा है। 15 से कमजोर होगा सिस्टम
मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक ने बताया, 15 सितंबर से प्रदेश में बारिश की तीव्रता और प्रसार में धीरे-धीरे कमी आने का पूर्वानुमान है। सात दिन के पूर्वानुमान में पश्चिमी मध्य प्रदेश में कभी तेज तो कभी हल्की बारिश होने की संभावना है। अब तक 32.8 इंच बारिश, 23 जिलों में ज्यादा
IMD (मौसम केंद्र) की माने तो प्रदेश में अब तक 834.4 मिमी यानी, 32.8 इंच बारिश हो चुकी है। हालांकि, यह अब तक की सामान्य बारिश 34.9 इंच (886.6 मिमी) की तुलना में 2.1 इंच कम है। वहीं, ओवरऑल 6 प्रतिशत कम पानी गिरा है। पूर्वी हिस्से में 1% और पश्चिमी हिस्से में औसत से 11% बारिश कम हुई है। 32 जिलों में 2% से 49% तक कम बारिश
प्रदेश के पूर्वी हिस्से- जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में 1% तक कम बारिश हुई है। बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, मंडला, रीवा, सागर, सिवनी में 2% से 25% तक कम बारिश हुई है। पिछले एक सप्ताह में यह आंकड़ा काफी सुधरा है। कई जिलों में बाढ़ के हालात बने। इससे आंकड़े में सुधार आया और सीजन में पहली बार पूर्वी हिस्सा आंकड़ों में बेहतर रहा है, लेकिन सोमवार तक आंकड़ा माइनस में एक प्रतिशत हो गया। वहीं, पश्चिमी हिस्से के आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, खंडवा, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में औसत से 2% से 49% कम पानी गिरा है। इन 23 जिलों में ज्यादा बारिश
IMD की माने तो अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़्र, श्योपुर और शिवपुरी में ही औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की गई। मैप से समझें, 4 दिन ऐसा रहेगा मौसम जून में सूखा, जुलाई-अगस्त में अच्छी बारिश मौसम विभाग के अनुसार, जून में 14% कम बारिश हुई थी। जुलाई के शुरुआती दिनों में तेज बारिश होने से यह कमी घट गई। इसके बाद मानसून दो बार ब्रेक हुआ और कई दिन तक बारिश नहीं हुई। आखिरी सप्ताह में फिर से स्ट्रॉन्ग सिस्टम एक्टिव हो गया। इसके बावजूद 13% कम बारिश हुई है। हालांकि, जुलाई और अगस्त का कोटा फुल हो गया, लेकिन जून की भरपाई नहीं हो पाई। इसी वजह से अब तक प्रदेश में 6% कम बारिश हुई है। प्रदेश की सामान्य बारिश 37.3 इंच
प्रदेश की सामान्य बारिश 37.3 इंच है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर जिले की सामान्य बारिश 38 से 39 इंच तक है। अब जानिए, एमपी के 5 बड़े शहरों में बारिश का रिकॉर्ड… भोपाल में 4 साल से कोटे से ज्यादा बारिश
भोपाल में सितंबर महीने की औसत बारिश 7 इंच है, लेकिन पिछले 5 साल से कोटे से ज्यादा पानी बरस रहा है। ओवरऑल रिकॉर्ड की बात करें तो साल 1961 में पूरे सितंबर माह में 30 इंच से ज्यादा पानी गिरा था। वहीं, 24 घंटे में सर्वाधिक 9.2 इंच बारिश का रिकॉर्ड 2 सितंबर 1947 को बना था। इस महीने औसत 8 से 10 दिन बारिश होती है। वहीं, दिन में तापमान 31.3 डिग्री और न्यूनतम तापमान 22.2 डिग्री सेल्सियस तक रहता है। इंदौर में सितंबर में रिकॉर्ड 30 इंच बारिश
इंदौर में सितंबर महीने में रिकॉर्ड 30 इंच बारिश हो चुकी है। यह ओवरऑल रिकॉर्ड साल 1954 में बना था। वहीं, 20 सितंबर 1987 को 24 घंटे में पौने 7 इंच पानी गिर चुका है। इस महीने इंदौर में औसत 8 दिन बारिश होती है, लेकिन इस बार 15 या इससे अधिक दिन तक बारिश हो सकती है। ग्वालियर में वर्ष 1990 में गिरा था 25 इंच पानी
ग्वालियर में सितंबर 1990 में 647 मिमी यानी साढ़े 25 इंच बारिश हुई थी। यह सितंबर में मासिक बारिश का ओवरऑल रिकॉर्ड है। वहीं, 7 सितंबर 1988 को 24 घंटे में साढ़े 12 इंच बारिश हुई थी। सितंबर में ग्वालियर की औसत बारिश करीब 6 इंच है, लेकिन पिछले चार साल से इससे अधिक बारिश हो रही है। ग्वालियर में इस बार अगस्त में ही बारिश का कोटा पूरा हो गया। ऐसे में सितंबर में जितनी भी बारिश होगी, वह बोनस की तरह ही रहेगी। जबलपुर में 24 घंटे में साढ़े 8 इंच बारिश का रिकॉर्ड
सितंबर महीने में जबलपुर में भी मानसून जमकर बरसता है। 20 सितंबर 1926 को जबलपुर में 24 घंटे के अंदर साढ़े 8 इंच बारिश का रिकॉर्ड है। वहीं, पूरे महीने में 32 इंच बारिश साल 1926 को हो चुकी है। यहां महीने में औसत 10 दिन बारिश होती है। वहीं, सामान्य बारिश साढ़े 8 इंच है। पिछले 3 साल से सामान्य से ज्यादा पानी गिर रहा है। उज्जैन में 1981 में पूरे मानसून का कोटा हो गया था फुल
उज्जैन की सामान्य बारिश 34.81 इंच है, लेकिन वर्ष 1961 में सितंबर की बारिश ने ही पूरे सीजन की बारिश का कोटा फुल कर दिया था। इस महीने 1089 मिमी यानी करीब 43 इंच पानी गिरा था। वहीं, 24 घंटे में सर्वाधिक साढ़े 5 इंच बारिश का रिकॉर्ड 27 सितंबर 1961 को बना था। सितंबर महीने में उज्जैन की सामान्य बारिश पौने 7 इंच है, लेकिन पिछले दो साल से 12 इंच से ज्यादा बारिश हो रही है। इस महीने औसत 7 दिन बारिश होती है।

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