मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्य प्रदेश सरकार नशे के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। नशे के अवैध कारोबार में शामिल लोगों और गिरोहों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि जैसे प्रदेश से नक्सलवाद खत्म हुआ है, अब सरकार नशा मुक्त मध्यप्रदेश बनाने के लिए पूरी ताकत से काम करेगी। मुख्यमंत्री मंगलवार को भोपाल के रवींद्र भवन में ‘नशे से दूरी है जरूरी 2.0’ अभियान के शुभारंभ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने अभियान की प्रचार सामग्री और किट का वितरण भी किया तथा लोगों को नशा नहीं करने की शपथ दिलाई। डॉ. यादव ने कहा कि नशा केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समाज को बर्बाद कर देता है, इसलिए नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ किसी तरह की नरमी नहीं बरती जाएगी। पुलिस को ऐसे मामलों में सख्ती से कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
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19 धार्मिक स्थलों पर नशे पर रोक लगाई
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश के 19 धार्मिक स्थलों के आसपास शराब और अन्य नशे पर रोक लगाई गई है। साथ ही धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं को भी नशा मुक्ति अभियान से जोड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने वर्ष 2029 तक भारत को नशा मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा है। इसी दिशा में मध्य प्रदेश पुलिस स्कूलों और कॉलेजों में जागरूकता कार्यक्रम, हेल्पलाइन और काउंसलिंग के जरिए युवाओं को नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित कर रही है। नशे की लत से प्रभावित लोगों के पुनर्वास पर भी काम किया जा रहा है।
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सार्वजनिक स्थलों पर जागरूकता कार्यक्रम होंगे
विशेष पुलिस महानिदेशक पंकज कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि 15 जुलाई से 30 जुलाई तक पूरे प्रदेश में ‘नशे से दूरी है जरूरी 2.0’ अभियान चलाया जाएगा। इसमें एनसीसी, एनएसएस, खेल संगठनों, व्यापारिक संस्थाओं और नागरिक समितियों की भागीदारी रहेगी। स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक स्थानों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। कार्यक्रम में सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण मंत्री नारायण सिंह कुशवाहा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। सरकार का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य लोगों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना और समाज को नशा मुक्त बनाने में जनभागीदारी बढ़ाना है।