03:19 PM, 28-Jul-2026
लोकसभा में अखिलेश यादव बोले- प्रधान को हटाकर प्रधानमंत्री को बचा लिया
समाजवादी पार्टी अध्यक्ष और सांसद अखिलेश यादव ने कहा कि छात्र आंदोलन ने सरकार को झुकने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने कहा कि वह इस पूरे आंदोलन को दूर से देख रहे थे। उनके मुताबिक, आंदोलन की सफलता के बाद एक नया नारा सामने आया कि सरकार को अहंकार था कि वह कभी नहीं झुकती, लेकिन नई पीढ़ी ने साबित कर दिया कि “सरकार भी झुकती है, झुकाने वाला चाहिए।” उन्होंने कहा कि सरकार ने आंदोलन से जुड़े कई मुद्दों को स्वीकार किया, लेकिन सवाल यह है कि जिन बातों पर सहमति बनी, उन्हें सदन के सामने क्यों नहीं रखा जा रहा है।
पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का जिक्र करते हुए अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए कहा कि जब मंत्री जी लौटे, जो अब मंत्री नहीं रहे, उनके स्वागत से मुझे कोई शिकायत नहीं है। लेकिन सरकार को कितनी राहत मिली होगी कि एक ‘प्रधान’ को हटाकर प्रधानमंत्री को बचा लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार कई वर्षों से नकारात्मक राजनीति कर रही है और इसके लिए हजारों करोड़ रुपये प्रचार पर खर्च किए गए। अखिलेश यादव ने कहा कि वह युवा पीढ़ी को बधाई देते हैं, क्योंकि छात्रों और युवाओं ने अपने आंदोलन के जरिए सरकार को झुकने पर मजबूर कर दिया।
03:14 PM, 28-Jul-2026
पेपर लीक रोकने के लिए यह समय की मांग: बांसुरी स्वराज
भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने कहा कि यह विधेयक न केवल जरूरी है, बल्कि आज के समय की आवश्यकता भी है। उन्होंने कहा कि देश में परीक्षा माफिया अब संगठित रूप ले चुका है और यह कानून उससे प्रभावी ढंग से निपटने का रास्ता तैयार करता है। इस विधेयक को लाना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार की संवेदनशीलता का प्रमाण है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि पेपर लीक एक घोर अपराध है और यह केवल बयान नहीं, बल्कि सरकार की स्पष्ट मंशा है। इसी उद्देश्य से यह विधेयक संसद में लाया गया है। उन्होंने कहा कि यह कानून जांच और न्यायिक प्रक्रिया से जुड़ी जटिलताओं को दूर करने का प्रयास करता है। इसके तहत केंद्र सरकार को विशेष टास्क फोर्स गठित करने का अधिकार दिया गया है। साथ ही जांच एजेंसी को दो महीने के भीतर जांच पूरी करनी होगी, जबकि ट्रायल तीन महीने में पूरा कर फैसला सुनाने का प्रावधान किया गया है।
खुद को वकील बताते हुए बांसुरी स्वराज ने इस पहल के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार को बधाई दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने ‘परीक्षा पर चर्चा’ जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से बच्चों के साथ व्यक्तिगत रूप से जुड़कर उन्हें प्रेरित किया है। उनका प्रयास रहा है कि देश के विद्यार्थी ‘एग्जाम वॉरियर’ बनें, न कि ‘एग्जाम वॉरियर’ बनने से पहले परीक्षा के दबाव में टूटें। भाजपा सांसद ने कहा कि मोदी सरकार के दौरान आईआईटी और मेडिकल संस्थानों की संख्या में वृद्धि हुई है। उन्होंने अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के छात्रों के नामांकन में बढ़ोतरी का उल्लेख करते हुए कहा कि यह सामाजिक न्याय के दायरे को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
03:12 PM, 28-Jul-2026
गोगोई बोले- लड़कियों पर अत्याचार, पैलेट गन का इस्तेमाल…
गौरव गोगोई ने कहा कि छात्र आंदोलन ने यह दिखा दिया कि लोगों के मन से डर खत्म हो चुका है। उन्होंने कहा कि 20 जुलाई की रात 10 बजे भी लोग प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे और लोकतंत्र के समर्थन में खड़े रहे। उन्होंने कहा कि खून से लथपथ चेहरा होने के बावजूद एक छात्र पुलिस के सामने डटा रहा और लोगों को लोकतंत्र की ताकत का एहसास कराया।
उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर के प्रदर्शन के दौरान कुछ आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल का समर्थन नहीं किया जा सकता। साथ ही उन्होंने कहा कि उन भावनाओं को भी याद रखना चाहिए, जिन्हें छात्रों ने सामने रखा। इस दौरान उन्होंने शायर वसीम बरेलवी की पंक्तियां उद्धृत करते हुए कहा, “उसूलों पर आंच आए तो टकराना जरूरी है, जिंदा हो तो जिंदा नजर आना जरूरी है।” गोगोई ने दावा किया कि पुलिस कार्रवाई के दौरान एक युवक ने आगे आकर एक लड़की को बचाने की कोशिश की। उन्होंने यह भी कहा कि एक छात्र ने कहा था कि जिस उंगली से उसने कमल के निशान पर वोट दिया था, उसी उंगली को आज पुलिस ने तोड़ दिया।
उन्होंने देशभर के लोगों का आभार जताते हुए कहा कि कई लोगों ने प्रदर्शनकारियों के लिए स्विगी के माध्यम से भोजन भेजा और वकीलों ने भी लोकतंत्र के समर्थन में उनका साथ दिया। कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया कि छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस ने पैलेट गन का इस्तेमाल किया, एक पुलिसकर्मी ने एक लड़की को थप्पड़ मारा और एक बच्ची के निजी अंग पर हमला किया। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं को भुलाया नहीं जाएगा और इस पूरे मामले में गृह मंत्री से जवाब मांगा। गौरव गोगोई ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार यह विधेयक इसलिए लेकर आई है क्योंकि उसकी पुलिस छात्र आंदोलन को दबाने में सफल नहीं हो सकी। उन्होंने बिहार में प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा एके-47 के इस्तेमाल का भी आरोप लगाया।
03:03 PM, 28-Jul-2026
गोगोई ने कहा- प्रधान सिर्फ एक मुखौटा
कांग्रेस सांसद ने कहा कि आप सुधार नहीं चाहते, क्योंकि RSS के लिए शिक्षा विभाग अहम है। आप चाहते हैं कि शिक्षा के माध्यम से इस पीढ़ी के लोग आपके संगठन के सदस्य बने। डीयू, IIT, जेएनयू ने अपने स्टूडेंट्स ने कहा कि प्रदर्शन में मता जाओ। क्या ऐसे हम आने वाले भारत का निर्माण करेंगे। राहुल गांधी ने बार-बार कहा कि प्रधान सिर्फ एक मुखौटा हैं। उनके हटने से भी शिक्षा में सुधार आएगा, इसका विश्वास न हमें है, न बच्चों को। बच्चे क्या करें। उनके पास पैसे नहीं है कि 30-30 लाख में पैसे खरीद सकें। वे नाराज हैं। जब वे लड़ नहीं पाते तो आत्महत्या कर लेतें हैं।
02:57 PM, 28-Jul-2026
गौरव गोगोई बोले- NTA में 34 स्वीकृत पद, फिर 47 अधिकारियों पर कार्रवाई कैसे?
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि व्यापक चर्चा करने के बजाय प्रधानमंत्री युवाओं से इंस्टाग्राम पर अधिक ध्यान देने की बात करते हैं। गौरव गोगोई ने कहा कि प्रधानमंत्री ने हाई पावर कमेटी के गठन की बात की, लेकिन दो वर्ष पहले गठित राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों का क्या हुआ। उन्होंने कहा कि यदि समिति ने इतना अच्छा काम किया था, तो फिर दो साल बाद पेपर लीक जैसी घटनाएं क्यों हुईं।
उन्होंने दावा किया कि सरकार यह दिखाने की कोशिश कर रही है कि वह इस मुद्दे पर गंभीर है। गोगोई ने कहा कि सरकार ने एनटीए के 47 लोगों को बदले जाने की बात कही है, लेकिन वह जानना चाहते हैं कि ये 47 लोग कौन हैं। उन्होंने कहा कि एनटीए में स्वीकृत पदों की संख्या 34 है और इनमें भी 10 से 12 पद खाली हैं, ऐसे में 47 अधिकारियों पर कार्रवाई का दावा कैसे किया जा रहा है।
कांग्रेस सांसद ने कहा कि एनटीए के महानिदेशक (डीजी) को बदल दिया गया, लेकिन चेयरमैन को पद पर बनाए रखा गया। उन्होंने सवाल उठाया कि चेयरमैन पर इतना भरोसा क्यों जताया जा रहा है। उन्होंने चेयरमैन के पिछले कार्यकाल का भी उल्लेख करते हुए कहा कि वे मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष भी रह चुके हैं, जहां कथित तौर पर अनियमितताओं के आरोप लगे थे।
02:52 PM, 28-Jul-2026
गोगोई ने कहा- 2024 में कानून के बावजूद 2026 में कैसे हुआ पेपर लीक?
गौरव गोगोई ने कहा कि कानून उस समय भी विफल था। आज जिस मंशा से सरकार ये ला रही है, आज भी यह फेल होगा। 2024 में कानून लाने के बावजूद 2026 में भी पेपर लीक हुआ। अफसोस की बात है कि उस समय भी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान थे। तब उन्होंने कहा था “कहां हुआ पेपर लीक, नहीं हुआ पेपर लीक।’ इस बार भी उनका यही रवैया था। 21 बच्चों ने आत्महत्या कर दी। इस्तीफे के बाद कल प्रधान जब संसद में आए तो आपने उनको ऐसे माला पहनाई जैसे वो पाकिस्तान से जंग लड़के आए हों।
02:39 PM, 28-Jul-2026
पेपर लीक संशोधन विधेयक पर गौरव गोगोई का हमला
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने लोकसभा में चर्चा के दौरान सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने असम में आई बाढ़ और उसमें 70 लोगों की मौत का जिक्र करते हुए राज्य के लिए विशेष पैकेज की मांग भी उठाई।पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक, 2026 पर बोलते हुए गोगोई ने कहा कि सरकार इस मुद्दे को लेकर गंभीर नहीं है और यह विधेयक केवल दिखावा करने के लिए लाया गया है। गोगोई ने कहा कि सरकार का यह कदम सिर्फ एक आंखों में धूल झोंकने जैसा प्रयास है। इस विधेयक से परीक्षा प्रणाली में वास्तविक सुधार नहीं होगा और सरकार को इस मुद्दे पर ठोस तथा प्रभावी कदम उठाने चाहिए।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2026 में प्रकाशित एक समाचार रिपोर्ट के अनुसार, 2024 के नीट पेपर लीक मामले में आरोपपत्र दाखिल किए गए 46 आरोपियों में से 44 को जमानत मिल चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि मामले के कथित मास्टरमाइंड संजीव मुखिया 11 महीने तक फरार रहा और गिरफ्तारी के बाद उसे भी जमानत मिल गई। इसके अलावा अमित कुमार बरुआ और अमित कुमार सिंह समेत अन्य आरोपियों को भी जमानत मिलने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कई आरोपियों के नाम गिनाए।
गौरव गोगोई ने कहा कि जिस उद्देश्य से पहले यह कानून लाया गया था, उसमें वह सफल नहीं हो सका और जिस मंशा के साथ अब संशोधन लाया जा रहा है, उसमें भी सफलता की संभावना नहीं दिखती। उन्होंने कहा “यह कानून आपकी विफलता का स्मारक है।”
02:34 PM, 28-Jul-2026
पर लीक मामलों में पांच महीने के भीतर फैसला- डॉ. जितेंद्र सिंह
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार पेपर लीक मामलों में त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट का प्रावधान इस संशोधन विधेयक के जरिए कर रही है। पूरी जांच दो महीने के भीतर पूरी करने की समयसीमा तय की गई है, जबकि इसके बाद ट्रायल कोर्ट में तीन महीने के भीतर सुनवाई पूरी कर फैसला सुनाया जाएगा। घटना होने से लेकर अंतिम निर्णय आने तक पूरे मामले के निपटारे में पांच महीने से अधिक समय नहीं लगेगा। यदि कोई पक्ष फैसले के खिलाफ अपील करना चाहता है, तो उसे 30 दिनों के भीतर अपील करनी होगी। साथ ही, ऐसे मामलों की सुनवाई हाईकोर्ट में डबल बेंच से नीचे नहीं होगी।
उन्होंने आगे कहा कि सरकार एक महत्वपूर्ण विधेयक लेकर आई है और उसकी प्रतिबद्धता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि विधेयक पेश करने के साथ ही कानून मंत्रालय ने स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में टास्क फोर्स का गठित और राधाकृष्णन समिति की 46 प्रमुख सिफारिशों में से 35 को पहले ही लागू किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा पूरी तरह ईमानदार है और यह संशोधन भी उसी दिशा में किया गया एक गंभीर प्रयास है। उनका कहना था कि इन प्रस्तावों पर किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए और यदि कोई विरोध करता है, तो उस पर देश की जनता सवाल उठाएगी।
02:23 PM, 28-Jul-2026
जितेंद्र सिंह ने कांग्रेस को घेरा, बोले- पहले भी लीक होते रहे पेपर

जितेंद्र सिंह, केंद्रीय मंत्री
– फोटो : Amar Ujala Graphics
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान कहा कि यह विधेयक वर्ष 2024 में लाए गए पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) अधिनियम में संशोधन है। उन्होंने कहा कि यह कानून भी मौजूदा सरकार ही लेकर आई थी और स्वतंत्र भारत के इतिहास में अपनी तरह का पहला कानून था। पहले लाया गया कानून और अब प्रस्तुत किया गया संशोधन, दोनों ही छात्रों और युवाओं के हितों की रक्षा के प्रति सरकार की गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस संकल्प की भी पुनर्पुष्टि है कि भारत के बच्चों के भविष्य से किसी भी तरह का समझौता नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस दृष्टि से यह संशोधन विधेयक भारतीय संसद के इतिहास में एक महत्वपूर्ण और मील का पत्थर साबित होने वाला कानून है।
#WATCH | On the Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Amendment Bill, 2026, Union Minister Jitiendra Singh says, “This bill, which was introduced yesterday, is, in fact, an amendment to the earlier bill- Public Examinations Prevention of Unfair Means Act 2024, which… pic.twitter.com/Xu9MI76YBb
— ANI (@ANI) July 28, 2026
जितेंद्र सिंह ने कहा कि कांग्रेस काल में अलग-अलग राज्यों में, अलग-अलग परीक्षाओं में पेपर लीक होते रहे, लेकिन शायद उस तरह की कार्यवाही नहीं की गई जैसी अब की जा रही है। उन्होंने 2009 में रेलवे भर्ती पेपर लीक से 2012 के एम्स एंट्रेस पेपर लीक तक, कांग्रेस काल में हुए पेपर लीक गिनाए और कहा कि इसीलिए सोचा गया कि अब इसे लेकर एक फुलप्रूफ सिस्टम बनाया जाए। भारत में अभी चार प्रमुख परीक्षा एजेंसियां हैं। 1992 में जब सरकार कांग्रेस की थी, एक कमेटी ने सुझाव दिया था केंद्रीय परीक्षा कमेटी के गठन का 2010 में भी एक कमेटी ने ऐसा ही सुझाव दिया था। पहली बार 2024 में यह बिल लाया गया, जून 2024 में लागू किया गया। इस विधेयक के जो मूल उद्देश्य थे, वह परीक्षा में पारदर्शिता और शुचिता सुनिश्चित करना था। छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने की इजाजत किसी को नहीं दी जाएगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि हमें 2024 के बिल को और मजबूत करने की जरूरत है, हम इसी कानून में संशोधन के लिए बिल लाए हैं।
02:12 PM, 28-Jul-2026
किरेन रिजिजू बोले- जरूरत पड़ी तो 10 घंटे भी करेंगे बहस
लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि उन्होंने कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके और एनसीपी सहित सभी दलों के नेताओं और मुख्य सचेतकों से बातचीत की है। उन्होंने बताया कि सभी दलों की सहमति से छह घंटे की निर्धारित चर्चा को बढ़ाकर आठ घंटे करने का फैसला लिया गया है।
#WATCH | On the Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Amendment Bill, 2026, Parliamentary Affairs Minister Kiren Rijiju says, “… I spoke with the leaders of all parties—the Congress Chief Whip, the Samajwadi Party Chief Whip, the DMK, and NCP—and everyone agreed to… pic.twitter.com/aIm9zYBF41
— ANI (@ANI) July 28, 2026
रिजिजू ने सदन में कहा कि यदि विपक्ष को दो घंटे और चाहिए, तो सरकार को इस पर कोई आपत्ति नहीं है और इस संबंध में बैठकर निर्णय लिया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि अध्यक्ष ने भी चर्चा की अवधि एक घंटा और बढ़ाने पर कोई आपत्ति नहीं जताई है। संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि यदि आठ घंटे से भी अधिक समय की आवश्यकता हुई, तो सरकार 10 घंटे तक चर्चा कराने के लिए भी तैयार है।
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