Rahul Gandhi Targets Election Commission Over SIR Process Controversy

Rahul Gandhi Targets Election Commission Over SIR Process Controversy

नई दिल्ली8 घंटे पहले

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Rahul Gandhi Targets Election Commission Over SIR Process Controversy

चुनाव आयोग ने बुधवार को स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर चुनाव आयुक्तों में मतभेद से जुड़ी रिपोर्ट को खारिज कर दिया। चुनाव आयोग ने कहा कि पिछले एक साल में लिए गए सभी फैसले सर्वसम्मति से हुए हैं।

आयोग ने कहा कि किसी भी संस्थान में विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय और टिप्पणियां आना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। इसका उद्देश्य पारदर्शिता बनाए रखना और कानूनी नियमों का पालन सुनिश्चित करना है।

इस मामले में राहुल गांधी ने वीडियो जारी कर वोट चोरी को संविधान के खिलाफ बताया है। उन्होंने कहा कि समय आने पर किसी को छोड़ा नहीं जाएगा।

दोनों चुनाव आयुक्तों ने आपत्तियां ज्ञानेश कुमार को भी भेजीं

चुनाव आयुक्तों में मतभेद का विवाद द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के बाद शुरू हुआ। यह रिपोर्ट 23 सितंबर को पब्लिश की गई। इसके मुताबिक, चुनाव आयोग के दो चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कहा कि कई फैसले उनकी जानकारी या मंजूरी के बिना लिए गए।

आयोग के फैसलों पर 28 अक्टूबर 2025 से 14 अगस्त 2026 के बीच 14 बार लिखित आपत्ति जताई गईं। इनमें 16 अप्रैल को चार आपत्तियां दर्ज की गईं। इन आपत्तियों की प्रतियां मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को भी भेजी गईं। कुछ आपत्तियां उन उप चुनाव आयुक्तों को भी भेजी गईं, जो संबंधित काम की निगरानी कर रहे थे।

यह विवाद बिहार से जून 2025 में शुरू हुए स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के बीच सामने आया है। SIR के तहत 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की ड्राफ्ट मतदाता सूचियों से 13 करोड़ से ज्यादा नाम हटाए गए हैं।

अखिलेश ने कहा- सुप्रीम कोर्ट नोटिस ले, आप बोली- सुधार जरूरी

  • राहुल गांधी- मैं इलेक्शन कमीशन और इलेक्शन ऑफिसर्स को साफ कह रहा हूं कि आप जो कर रहे हो गलत कर रहे हो। ये राजद्रोह है, देश के खिलाफ है। टाइम आएगा। हम आपको पकड़ेंगे। बचने वाले नहीं हो।
  • सपा प्रमुख अखिलेश यादव- सभी चुनाव आयुक्त अपना सही काम नहीं कर पा रहे हैं। एक स्वतंत्र निकाय के सदस्यों को अगर न्यायपूर्ण कार्य करने की स्वतंत्रता नहीं है या उनकी कोई सुनवाई नहीं है तो ये लोकतंत्र के लिए बेहद घातक और खतरनाक हालात हैं। कुछ लोगों द्वारा सत्ता की कठपुतली बनकर लोकतंत्र को धोखा देना घोर सांविधानिक अपराध है। ये लोकतंत्र को मिटाने के किसी षड्यंत्र से कम नहीं है। सुप्रीम कोर्ट मामले की खुद जांच करे।
  • AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल- वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने और हटाने का अधिकार सिर्फ ERO को है, फिर दिल्ली में बैठे लोग पूरे देश की वोटर लिस्ट कैसे बदल रहे हैं?
  • ममता TMC की राज्यसभा सदस्य सागरिका घोष- SIR की खामियों और अव्यवस्था’ की जिम्मेदारी मुख्य चुनाव आयुक्त की है। किसके निर्देश पर नागरिकों को कथित तौर पर मताधिकार से वंचित किया जा रहा है।
  • UBT शिवसेना चीफ उद्धव ठाकरे- महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में बैलट पेपर का उपयोग करके फिर से चुनाव होने चाहिए।
  • आम आदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज- सभी विपक्षी दलों को पहले चुनाव आयोग से जुड़े इस मुद्दे को उठाना चाहिए और आयोग को व्यवस्थित करने पर ध्यान देना चाहिए।

ज्ञानेश कुमार को हटाने का पुराना मामला

अप्रैल 2026 में कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने दावा किया था कि विपक्ष के 73 राज्यसभा सांसदों ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए नोटिस दिया है। इसमें ‘साबित कदाचार’ का आरोप लगाया गया था।

कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने भी उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। उन्होंने SIR के दौरान असली वोटर्स के प्रभावित होने का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग की थी।

इससे पहले लोकसभा में भी हटाने का प्रस्ताव दिया गया था, लेकिन लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और राज्यसभा सभापति सीपी राधाकृष्णन ने इसे खारिज कर दिया था।

पहले भी चुनाव आयोग में आयुक्तों के बीच मतभेद के मामले आए

  • 1993-95: टीएन शेषन Vs एमएस गिल-जीवीजी कृष्णमूर्ति1993 में दो और चुनाव आयुक्त नियुक्त होने से आयोग बहुसदस्यीय हो गया। तत्कालीन CEC टीएन शेषन ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। 14 जुलाई 1995 को कोर्ट ने बहुसदस्यीय आयोग को बरकरार रखा। इस दौरान शेषन और साथी आयुक्तों के बीच अधिकारों और कामकाज को लेकर मतभेद भी सामने आए।
  • 2009: CEC ने साथी आयुक्त को हटाने की सिफारिश कीजनवरी 2009 में CEC एन. गोपालस्वामी ने चुनाव आयुक्त नवीन चावला को हटाने की सिफारिश राष्ट्रपति से की। उन्होंने चावला पर पक्षपात का आरोप लगाया। राष्ट्रपति ने सिफारिश नहीं मानी। चावला बाद में अप्रैल 2009 में CEC बने।
  • 2019: अशोक लवासा की अलग राय2019 के लोकसभा चुनाव में चुनाव आयुक्त अशोक लवासा ने नरेंद्र मोदी और अमित शाह से जुड़े आचार संहिता के कुछ मामलों में बहुमत से अलग राय रखी। उन्होंने इसे आदेशों में दर्ज करने की मांग की। 21 मई 2019 को आयोग ने 2:1 से तय किया कि ऐसी असहमति अंतिम आदेश में सार्वजनिक नहीं होगी, लेकिन फाइल में दर्ज की जा सकती है। इसके बाद लवासा ने आचार संहिता से जुड़ी कुछ बैठकों से खुद को अलग कर लिया।

10 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में पूरा हुआ SIR

SIR के पहले और दूसरे फेज में 10 राज्य और 3 केंद्र शासित प्रदेश कवर हो चुके हैं। SIR के बाद बिहार, पश्चिम बंगाल, पुडुचेरी और असम विधानसभा चुनाव में भाजपा जीती है। केरल में कांग्रेस गठबंधन और तमिलनाडु में TVK ने जीत हासिल की है। असम में स्पेशल रिवीजन (SR) हुआ। यहां भी भाजपा सरकार की वापसी हुई।

तीसरा फेज: दिल्ली, महाराष्ट्र समेत 16 राज्यों में SIR

चुनाव आयोग ने 14 मई को हरियाणा, झारखंड, उत्तराखंड, दिल्ली और महाराष्ट्र समेत 16 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में स्पेशल इंटेसिव रिवीजन (SIR) की घोषणा की थी। यह SIR का तीसरा फेज है।

पूरी प्रक्रिया 30 मई से 23 दिसंबर तक चलेगी। इस दौरान 36.73 करोड़ वोटरों का वेरिफिकेशन हो रहा है। जिन राज्यों में SIR होगा, उनमें पंजाब, उत्तराखंड और मणिपुर में अगले साल विधानसभा चुनाव हैं। अन्य 13 राज्यों में 2028 और 2029 में चुनाव होंगे।

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