Ranbir Kapoor Interview | Lessons From Failure & Success in Bollywood

Ranbir Kapoor Interview | Lessons From Failure & Success in Bollywood


4 घंटे पहले

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रणबीर कपूर ने ‘रामायण’ फिल्म के ट्रेलर में राम का रोल किया है जिसे लेकर वे चर्चा में हैं। उनके जीवन की खास बातें, उन्हीं की जुबानी… मैं फिल्मी परिवार में पैदा हुआ। मेरे लिए फिल्मों की दुनिया कोई दूर की चीज नहीं थी। मैंने बचपन से अपने आसपास कामयाबी देखी, शोहरत देखी, नाम देखा। परिवार में कई पीढ़ियों से बड़े कलाकार रहे हैं पर मैंने सिर्फ उनकी कामयाबी नहीं देखी, उन्हें असफल और हताश होते भी देखा। छोटी उम्र में मैंने समझ लिया था कि फिल्म इंडस्ट्री में सिर्फ बड़े नाम के साथ पैदा होना काफी नहीं है। मुझे जिंदगी में कई चीजें आसानी से मिलीं। जब इंडस्ट्री में आया तो दरवाजे खुले हुए थे। लेकिन मैं यह भी जानता था कि अगर अपनी अलग पहचान नहीं बनाई है, अगर अपने परिवार के नाम के सहारे चलूंगा, तो ज्यादा दूर नहीं जा पाऊंगा। परिवार की कामयाबियों ने मुझे बहुत सिखाया, लेकिन उनकी नाकामियों ने उससे ज्यादा सिखाया। मैंने अपने परिवार के लोगों को देखा और समझने की कोशिश की कि कुछ लोग क्यों आगे बढ़े और कुछ लोग क्यों पीछे रहे। मैं उनकी गलतियों को भी देखता था। मुझे लगता है कामयाबी से सीखना आसान है, लेकिन नाकामी से सीखना ज्यादा जरूरी है। क्योंकि नाकामी आपको आईना दिखाती है। इंडस्ट्री के कई डायरेक्टर और प्रोड्यूसर मुझे लॉन्च करना चाहते थे। मेरे पास मौके थे। लेकिन मैं संजय लीला भंसाली का बहुत बड़ा फैन था। मैंने अपना रिज्यूमे बनाया और उनके ऑफिस के बाहर जाकर बैठ गया। उस वक्त शायद मुझे नहीं पता था कि यह अनुभव मेरी जिंदगी में कितना काम आएगा। लेकिन उस इंतजार ने मुझे मजबूत बनाया। उसने मुझे सिखाया कि मौका सामने होने के बावजूद मेहनत करनी पड़ती है। फिर मेरी पहली फिल्म आई और बहुत बड़ी नाकामी साबित हुई। आज पीछे मुड़कर देखता हूं तो लगता है कि पहली फिल्म का सफल न होना मेरे लिए अच्छा था। उस फिल्म ने मुझे बहुत जल्दी बता दिया कि इंडस्ट्री कैसी है। यहां कभी बहुत प्यार मिलेगा, तो कभी बहुत निराशा। मेरी जिंदगी में सफलता से ज्यादा नाकामी ने मुझे बदला है। हर नाकामी ने मुझे थोड़ा और जमीन से जोड़ा। उसने मुझे समझाया कि एक एक्टर की जिंदगी सिर्फ तालियों और कैमरों की चमक नहीं है। इसमें उतार-चढ़ाव हैं और आपको दोनों के लिए तैयार रहना है। मैं अपनी नौकरी यानी अपने काम को कभी हल्के में नहीं लेता। सफलता मिलती है तो बहुत ज्यादा हवा में नहीं उड़ता। बस सोचता हूं कि चलो, फिल्म चल गई, अब अगली फिल्म की तैयारी करते हैं। अगर फिल्म नहीं चलती तो खुद से कहता हूं कि कोई बात नहीं, अगली बार और मेहनत करेंगे। मैंने खुद को सफलता और नाकामी के बीच संतुलित रखना सीखा है।

जो प्यार मिलता है उसे लौटाना भी जरूरी है मेरे पिता का स्वभाव थोड़ा गुस्सैल था। जब कोई फैन उनके पास फोटो के लिए आता और वो मना कर देते, तो मैं उसके चेहरे पर निराशा देखता था। मैंने तय किया कि मैं किसी फैन को निराश नहीं करूंगा। जो प्यार लोग आपको देते हैं, उसे लौटाना भी जरूरी है। (तमाम इंटरव्यू में…)



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