
दयाराम ने बताया कि हादसे से कुछ देर पहले उनकी बड़े भाई अमर से फोन पर बातचीत की थी। दयाराम ने बताया कि फोन पर अमर के आखिरी शब्द थे, “अमर, मुझे 50 किलो गेहूं चाहिए।”अमर ने दयाराम से गेहूं लेने की बातचीत की और फोन रख दिया। छोटे भाई ने कहा कि अगर मेरे मोबाइल में बैलेंस होता या गेहूं लेने के लिए बड़े भैया पांच मिनट मेरे पास ही रुक जाते तो शायद हादसा न होता। दयाराम ने कहा कि अमर भैया और पिता ने परिवार का बोझ मुझ पर छोड़ दिया है। जब तक भाई थे, मुझ पर जिम्मेदारियों का बोझ नहीं था, लेकिन अब मैं अकेले कैसे संभालूंगा? दयाराम ने बताया कि बड़े भाई हमेशा कहते थे कि खुद टेंशन मत लो, दूसरे को टेंशन दो।
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