sunny deol :अभिनेता सनी देओल की फिल्म “बंटवारा 1947” ने रिलीज का एक हफ्ता पूरा कर लिया है. सनी देओल अपनी इस फिल्म की कहानी को दिल छू लेने वाली करार देते हैं, जिसने उन्हें फिल्म इस फिल्म से जोड़ा. साल 2010 में उन्होंने फिल्म की कहानी सुनी थी.उसके बाद से वह इस फिल्म का हिस्सा बनना चाहते थे. उर्मिला कोरी से हुई बातचीत
एक एक्टर के तौर पर आपने बंटवारे के समय और उससे जुड़ी घटनाओं पर आधारित इस फिल्म में काम किया है, क्या आपने इसके लिए कोई रिसर्च की थी?
रिसर्च का काम तो डायरेक्टर और राइटर ही करते हैं.मैंने पहले भी कहा है कि मैं उन एक्टर्स में से नहीं हूं, जो बहुत पढ़ते लिखते हैं.मैं फिल्म की स्क्रिप्ट और निर्देशक के विजन के अनुसार काम करता हूँ.हालांकि मैंने मम्मी, पापा और दादा-दादी से बहुत सी कहानियाँ सुनी हैं. मुझे पता है कि क्या हुआ था. जब मैंने कहानी सुनी, तो वह बिल्कुल वैसी ही थी जैसा उन्होंने बताया था.
क्या आपने नाटक “जिस लाहौर नई वेख्या, ओ जम्या ए नई” देखा या पढ़ा है , जिस पर यह फिल्म बनी है ?

नहीं मैं नाटक न तो पढ़ पाया और ना ही उसके मंचन को देखा है. मुझे राजजी ने इसकी कहानी सुनाई जो मुझे बहुत अच्छी लगी.
खबरें थी कि आपके दिवंगत पिता धर्मेंद्र जी को भी इस फिल्म की कहानी पसंद आयी थी ?
हाँ उन्हें भी बंटवारा की कहानी बहुत पसंद आयी थी.उन्होंने भी मुझे यह फिल्म करने को कही थी।
आपके पिता इंडस्ट्री के लीजेंड एक्टर्स में से रहे हैं, उनके रेफ़्रेन्स से कितनी कहानियां आप तक शुरुआत में पहुंचती थी और क्या वो आपको करनी भी पड़ती थी?
(हंसते हुए )हां पापा के रेफ़्रेन्स से लोग स्क्रिप्ट लेकर आते थे. कई बार कुछ कहानियां पापा को पहले ही मालूम पड़ जाती थी.वो बोल भी देते थे कि वो फिल्म करी ना.कहानी अच्छी नहीं है.
आपके साथ आपके बेटे करण ने भी स्क्रीन सांझा की है,किस तरह से उस अनुभव को परिभाषित करेंगे ?
वह फिल्म के निर्देशक राज जी का कॉल था कि वह फिल्म में मेरे बेटे की भूमिका में करण को कास्ट करना चाहते हैं.निश्चित तौर पर मैं अपने बेटे के साथ स्क्रीन साझा करना चाहता था लेकिन अच्छी कहानी की जरूरत थी. जो बंटवारा 1947 ने मौक़ा दिया. वैसे यह पूरा बहुत ही इमोशनल करने वाला था.
आपके कैरियर उतार चढ़ाव से भरा रहा है, लो फेज में किस तरह से खुद को आप मोटिवेट करते हैं ?
मैं हमेशा सबसे यही कहता हूँ. काम करते रहो. उम्मीद मत छोड़ो. कड़ी मेहनत करते रहो. सही समय ज़रूर आएगा. जब वह समय आए, तो आपको उसके लिए तैयार रहना चाहिए.
मौजूदा दौर में फिल्ममेकिंग में टेक्नोलॉजी हावी हो गयी है, इसे आप कैसे देखते है?
टेक्नोलॉजी सभी के लिए जरुरी है. हमारी पुरानी फ़िल्मों में हमने जो काम किया था, उसे कौन जानता? टेक्नोलॉजी की वजह से वे आज भी ज़िंदा हैं और नई पीढ़ी ने उन्हें देख रही है. पसंद कर रही है और हम आज भी प्रासंगिक बने हुए हैं. आज की पीढ़ी भी घायल,घातक की बात करती है तो अच्छा लगता है.उनके सीक्वल की बातें होती हैं क्योंकि टेक्नोलॉजी की वजह से वह फिल्में आज की पीढ़ी तक भी पहुंची है.
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