Supreme Court Ban: No Social Media Posting of Court Proceedings

Supreme Court Ban: No Social Media Posting of Court Proceedings

नई दिल्ली19 मिनट पहले

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Supreme Court Ban: No Social Media Posting of Court Proceedings

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कोर्ट की सुनवाई की ऑडियो या वीडियो रिकॉर्डिंग बिना पहले से अनुमति लिए सोशल मीडिया या किसी भी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पोस्ट नहीं की जा सकती। हालांकि, कोर्ट ने साफ किया है कि इस फैसले से मीडिया की खबरों पर कोई रोक नहीं लगेगी।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने पत्रकार हर्षिता ग्रोवर की तरफ से दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह अंतरिम आदेश दिया।

कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के सेक्रेटरी जनरल या संबंधित हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल की अनुमति के बिना कोर्ट की रिकॉर्डिंग को एडिट करना, शेयर करना, अपलोड करना, दोबारा पोस्ट करना या उससे कमाई करना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।

लाइव-स्ट्रीमिंग का दुरुपयोग हो रहा है: याचिकाकर्ता

याचिकाकर्ता हर्षिता ग्रोवर की ओर से सीनियर वकील विकास सिंह ने कहा कि अदालतों में लाइव-स्ट्रीमिंग और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की शुरुआत इसलिए की गई थी ताकि न्यायिक प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी बने और आम लोग कोर्ट की कार्यवाही देख सकें। लेकिन अब इसका गलत इस्तेमाल हो रहा है।

उन्होंने कहा कि लंबी सुनवाई में से कुछ सेकंड या मिनट के वीडियो काटकर सोशल मीडिया पर वायरल किए जाते हैं। इन क्लिप्स को सही संदर्भ के बिना दिखाया जाता है और उनके साथ भ्रामक कैप्शन व सनसनीखेज टिप्पणियां जोड़ दी जाती हैं। इससे लोगों के सामने कोर्ट की कार्यवाही की गलत तस्वीर पेश होती है।

सीजेआई बोले- मैंने भी यह अनुभव किया है

  • इस जनहित याचिका में केंद्र सरकार, बार काउंसिल ऑफ इंडिया, मेटा और एक्स (X) को पक्षकार बनाया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने इन सभी को नोटिस जारी किया है। साथ ही, दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को भी इस मामले में शामिल करने का निर्देश दिया है।
  • याचिका में कहा गया है कि कोर्ट की सुनवाई के कुछ हिस्सों को चुनकर गलत तरीके से सोशल मीडिया पर फैलाया जा रहा है। इन वीडियो से कुछ लोग पैसे भी कमा रहे हैं। इससे जजों और वकीलों की छवि खराब होती है और लोगों के बीच भ्रम फैलता है।
  • सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि हाल ही में उनके एक बयान को भी गलत तरीके से पेश किया गया। उन्होंने बताया कि एक मामले में सुबह 10 बजे तक कोई याचिका दाखिल नहीं हुई थी, लेकिन मीडिया में खबर चला दी गई कि उन्होंने सुनवाई से इनकार कर दिया।
  • जब याचिकाकर्ता की ओर से अंतरिम आदेश की मांग की गई, तो सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सोशल मीडिया पर फैल चुकी चीजों को पूरी तरह रोकना आसान नहीं है। लेकिन अदालत की गरिमा और लोगों का न्यायपालिका पर भरोसा बनाए रखना बहुत जरूरी है।

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